गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट : बसपा ब्राह्मण, गुर्जर और मुस्लिम पर कर रही विचार, किसकी होंगी नैया पार !
Gautam Buddha Nagar Lok Sabha seat: BSP is considering Brahmin, Gurjar and Muslim, whose boat will cross!

Panchayat 24 : आगामी लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी है । कभी बसपा का गढ कहे जाने वाली गौतम बुध नगर लोक सभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी नए जातीय-राजनीतिक समीकरणों पर विचार कर रही है। सूत्रों की माने तो बहुजन समाज पार्टी गौतम बुध नगर लोक सभा सीट पर ब्राह्मण गुर्जर और मुस्लिम उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर रही है। उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसले के लिए पार्टी विरोधी राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा का इंतजार कर रही है। देखा है कि बहुजन समाज पार्टी किस नाम के ऊपर दाँव खेलती है।
दरअसल , उत्तर प्रदेश में साल 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी कि पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। पूरे उत्तर प्रदेश के साथ मायावती का जादू उनके गृह जनपद गौतम बुद्ध नगर में भी दिखाई दिया था। नए परिसीमन के बाद साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की थी। साल 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में भले ही बहुजन समाज पार्टी की सत्ता समाजवादी पार्टी की आंधी में ढह गई थी लेकिन मायावती के गृह जनपद गौतम बुद्ध नगर में मायावती का जलवा कायम रहा। जिले की दादरी और ज़ेवर विधानसभा सीटों को पार्टी जितने में सफल रही। तीसरी विधानसभा नोएडा भाजपा की झोली में गई थी। बाद में जैसे-जैसे मायावती और बहुजन समाज पार्टी की चमक देश और प्रदेश की राजनीती में फीकी पड़ने लगी, वैसे-वैसे गौतम बुद्ध नगर जिले में भी लोगों के सर से पार्टी का जादू उतरने लगा। इसकी बानगी साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में देखने को मिली। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डॉ महेश शर्मा चुनाव जीत गए। बसपा सुप्रीमो मायावती के गृह जनपद में बहुजन समाज पार्टी के ग्राफ में यह गिरावट यही नहीं रुकी। साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका। जिले की तीनों विधानसभा सीटों, नोएडा, दादरी और जेवर पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो गया। बहुजन समाज पार्टी का यह खराब प्रदर्शन 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जारी रहा। हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में जिले की जनता ने बहुजन समाज पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया है।
साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। प्रदेश में पार्टी एक सीट पर सिमट कर रह गई। लोकसभा चुनाव 2024 से पूर्व विपक्षी दलों ने पूरे प्रयास किया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ एक गठबंधन बनाया जाए। विपक्ष द्वारा इस दिशा में कुछ प्रयास भी किए गए। इंडिया गठबंधन से एनडीए गठबंधन को टक्कर देने कि कोशिश शुरू हुई। शुरू में बहुजन समाज पार्टी की ओर से भी कुछ इस तरह के संकेत दिए गए कि वह इंडिया गठबंधन में शामिल हो सकती है लेकिन यह कोशिश परवान न चढ़ सकी। बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने लोकसभा चुनाव में अकेले ही ताल ठोकने की घोषणा करते हुए गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद स्पष्ट हो गया कि उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर बहुजन समाज पार्टी अपने प्रत्याशी चुनाव लड़ाएगी।
बहुजन समाज पार्टी के सामने आगामी लोकसभा चुनाव में गौतम बुद्ध नगर सभा सीट पर अपने पुराने वैभव को पाने चुनौती है। इसके लिए पार्टी कई जाति और राजनीतिक समीकरण एवं गठजोड़ पर विचार कर रही है। सूत्रों की माने तो आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी के पास टिकट के कुछ अहम दावेदार बताए जा रहे हैं। इनमें से एक मुस्लिम चेहरा है। यह मुस्लिम चेहरा खुर्जा तथा आसपास के क्षेत्र की राजनीति में बड़ा नाम बताया जाता है। चर्चा इस बात की भी है बहुजन समाज पार्टी गुर्जर प्रत्याशी पर भी दावा खेल सकती है। सूत्रों की माने तो यह गुर्जर प्रत्याशी पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ चुके है। सूत्र यह भी बताते हैं कभी बहुजन समाज पार्टी में बड़ा चेहरा रहे एक गुर्जर नेता भी अंदर खाने बसपा का टिकट पाने की दौड़ में शामिल है। हालांकि यह दावेदार वर्तमान में बहुजन समाज पार्टी का दामन छोड़कर एक राष्ट्रीय पार्टी के रथ पर सवार है। सूत्रों की माने तो यदि पार्टी इन्हें उम्मीदवार बनाती है तो वह घर वापसी कर सकते हैं। इसके अलावा पार्टी के सामने एक ब्राह्मण चेहरा भी बताया जाता है. इनका संबंध नोएडा से बताया जाता है। माना जा रहा है बहुजन समाज इस ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेलकर स्वर्ण मतदाताओं को साधने का प्रयास कर सकती है। ऐसे में पार्टी के सामने आगामी लोकसभा चुनाव में दलित -मुस्लिम, गुर्जर-दलित, और स्वर्ण-दलित-शहरी गठजोड़ विकल्प के रूप में मौजूद है। हालांकि विकल्प का चयन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व विरोधी दलों की रणनीति देखकर करेगा।