राकेश टिकैत ने जेवर में किया ऐलान : 16 फरवरी को पूरे भारत में चक्का जाम, 14 मार्च को होगा दिल्ली कूच
Rakesh Tikait announced in Jewar: Chakka jam across India on 16 February, march to Delhi on 14 March

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर जिले में वीरवार का दिन किसान और किसान आन्दोलनों के नाम रहा। जहां एक तरफ हजारों किसान दिल्ली में संसद घेराव के लिए कूच कर गए। रास्ते में पुलिस और किसानों के बीच झड़ें हुई। वहीं, जेवर को मेहंदीपुर गांव में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पहुंंचे। राकेश टिकेत ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं पर कोई भी राजनीतिक दल और पार्टी ध्यान नहीं दे रही है। किसान हितों को अनदेखा किया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन पूरे देश में 16 फरवरी को चक्का जाम और 14 मार्च को दिल्ली कूच की घोषणा की है।
राकेश टिकैत ने देश की राजनीतिक दलों की तुलना अंग्रेजों से करते हुए कहा कि जिस तरह से अंग्रेज भारत में व्यापार के उद्देश्य से आए थे। बाद में धीरे धीरे पूरे देश पर कब्जा कर लिया। ऐसे ही राजीनतिक दल देश सेवा के लिए बने हैं। आज इनका पूरे देश पर कब्जा कर लिया है। राकेश टिकैत ने कहा कि इससे खतरा जमीन को है। युवाओं के रोजगार को है। राजनीतिक दल लोगों को दाने दाने के लिए मोहताज करना चाहते हैं। उनका कहना है कि असली लड़ाई जमीन की है। सरकार चाहती है कि किसान संघर्ष न करें। किसान की फसल दिन में नहीं बिक रही है। वहीं, किसान की जमीन रातों रात बिक रही हैं। पूंजीपति अपनी पूंजी बड़ी मात्रा में जमीन में लगा रहा है। किसानों को विभिन्न व्यापारिक तरीकों से लूटा जा रहा है। किसानों के मोटे अनाज समाप्त कर दी गई है। सरकारों की नीतियां है कि किसान एवं काश्तकार खेती से हटकर उद्योगपतियों के उद्योगों में मजदूर बनकर काम करें।
भारतीय किसान यूनियन के जिला मीडिया प्रभारी सुनील जुनैदपुर ने बताया कि किसानों की फसलों की एमएसपी, तीन कृषि कानूनों के विरोध में चलाए गए किसान आन्दोलन में किसानों पर लगाए गए मुकदमें वापस लिए जाने, लखीमपुर खीरी में मारे गए किसानों को न्याय दिलाने के लिए भारतीय किसान यूनियन अन्य संगठनों के साथ मिलकर देश भर में 16 फरवरी को चक्का जाम करेगी। वहीं, आगामी 14 मार्च को दिल्ली कूच किया जाएगा। दिल्ली कूच का स्वरूप पर 16 फरवरी की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 14 मार्च का दिल्ली कूच पूर्व की तरह दिल्ली की सीमाओं को सील किए जाने, संसद घेराव या फिर किसी अन्य रूप में हो सकता है। ,