एनसीआर / दिल्ली

हाईवे और एक्सप्रेसवे पर रोड के टोल वाले झाम से परेशान यात्रियों के लिए रहत भरी खबर, टोल प्लाजा भी साल 2026 के अंत तक नहीं लगेंगी लंबी कतारें

In good news for commuters frustrated by traffic jams at toll plazas on highways and expressways, there will be no more long queues at toll plazas by the end of 2026.

Panchayat 24 (नई दिल्ली) : देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा की लंबी प्रतीक्षा से परेशान वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जानकारी दी कि केंद्र सरकार जल्द ही मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हाईवे प्रबंधन सिस्टम को लागू करने की दिशा में काम कर रही है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद हाईवे पर टोल बूथ पर वाहन रोकने या गति कम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वाहन चालक बिना किसी अवरोध के तेज और सहज सफर का अनुभव कर सकेंगे। मंत्री ने बताया कि यह आधुनिक टोलिंग सिस्टम वर्ष 2026 के अंत तक देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू कर दिया जाएगा।

2026 तक इन मार्गों पर हुआ सफल परीक्षण

गडकरी ने सदन को अवगत कराया कि दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे और बेंगलुरु–मैसूरु एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों पर इस प्रणाली के पायलट प्रोजेक्ट सफल रहे हैं। इन्हीं अनुभवों के आधार पर पूरे देश में इसे लागू करने की समय-सीमा तय की गई है।
सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है, ताकि बैंक खातों से सीधे टोल वसूली और नियमों से बचने वालों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जा सके।

कैसे काम करेगा एमएलएफएफ टोल सिस्टम

नई एमएलएफएफ तकनीक के अंतर्गत हाई-स्पीड कैमरों और AI की मदद से चलती गाड़ियों की पहचान की जाएगी। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एइनपीआर) और सैटेलाइट आधारित जीएनएसएस टोलिंग सिस्टम का उपयोग होगा। वाहन ने जितनी दूरी तय की होगी, उसी के अनुसार स्वतः टोल शुल्क काट लिया जाएगा।

मिलेंगे कई अतिरिक्त लाभ

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग केवल टोल संग्रह तक सीमित नहीं रहेगा। AI-संचालित हाईवे प्रबंधन प्रणाली वास्तविक समय में ट्रैफिक की स्थिति, सड़क दुर्घटनाओं या रास्ते में खड़े वाहनों की पहचान कर सकेगी। इससे आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

सरकारी खर्च में कमी, पर्यावरण को लाभ

‘पे-एज़-यू-यूज़’ आधारित सैटेलाइट तकनीक से उन यात्रियों को राहत मिलेगी, जो हाईवे का सीमित हिस्सा ही उपयोग करते हैं। साथ ही, भौतिक टोल प्लाजा और बैरियर पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने से होने वाली ईंधन बर्बादी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। निर्बाध यातायात से देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, जो वर्तमान में विकसित देशों की तुलना में अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

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