श्रीकांत त्यागी प्रकरण : डॉ महेश शर्मा से वार्ता के दौरान मांगेराम त्यागी पर लगा देश के दलित समाज को अपमानित करने का आरोप, सोशल मीडिया पर दलित समाज के लोग जता रहे आपत्ति, पढि़ए कैसे बदल रहा है पूरे प्रकरण का रंग?
Shrikant Tyagi Case: During a conversation with Dr. Mahesh Sharma, Mangeram Tyagi was accused of humiliating the Dalit society of the country, people of Dalit society are raising objections on social media, read how the color of the whole episode is changing?
Panchayat 24 : नोएडा के सेक्टर-93बी स्थित ग्रैंड ओमेक्स हाऊसिंग सोसायटी की रहने वाली एक महिला तथा श्रीकांत त्यागी का विवाद देश भर में चर्चित हो चुका है। इस प्रकरण में त्यागी समाज के मांगेराम त्यागी द्वारा डाॅ महेश शर्मा से फोन पर बड़बोलेपन में कुछ ऐसा कह दिया कि दलित समाज नाराज हो गया है। मांगेराम त्यागी और डॉ महेश शर्मा के बीच बातचीत का यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इससे आहत होकर बुधवार को पूरे दिन दलित समाज की ओर से मांगे राम त्यागी द्वारा कही गई बातों पर कठोर आपत्ति जताई गई है। दलित समाज के युवा इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जता रहे हैं। दलित समाज के लोग मामले में मांगेराम त्यागी द्वारादलित समाज से मांफी मांगने की मांग कर रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर दलित समाज सरकार सरकार से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, पिछले 5 अगस्त को नोएडा की ग्रैंड ओमेक्स हाऊसिंग सोसायटी में मामूली बात को लेकर एक महिला तथा श्रीकांत त्यागी के बीच विवाद हो गया। श्रीकांत त्यागी ने महिला को अभद्र बातें कही। दुर्व्यवहार करते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस ने सक्रियाता दिखाई। हालांकि, पुलिस की सुस्त चाल के कारण श्रीकांत त्यागी कई दिनों तक पुलिस को छकाता रहा। पुलिस लाख प्रयासों के बावजूद भी श्रीकांत त्यागी को पकड़ नहीं सकी। बाद में एक नाटकीय तरीके से मेरठ में श्रीकांत त्यागी की गिरफ्तारी हुई। पूरे प्रकरण में पुलिस की काफी किरकिरी हुई।
वैश्य समाज आया पीडित महिला के पक्ष में
श्रीकांत त्यागी प्रकरण में जातीय कार्ड बहुत अहम किरदार निभा रहा है। इसके कारण पूरा मामला आए दिन रंग बदल रहा है। धीरे धीरे मामला राजनीतिक एवं जातीय होता जा रहा है। हालांकि इसकी शुरूआत, आवेश में ही सही श्रीकांत त्यागी ने की थी। श्रीकांत त्यागी ने प्रकरण में पीडित महिला से दुर्व्यवहार करते हुए महिला तथा महिला के पति के खिलाफ जातीय टिप्पणी की थी। इस बात को लेकर वैश्य समाज ने विरोध जताया। वैश्य समाज की ओर से घटना के अगले ही दिन नोएडा डीसीपी हरीश चन्दर को ज्ञापन सौंपा। वैश्य समाज के इस प्रतिनिधिमंडल ने वैश्य समाज का अपमान करने तथा वैश्य जाति का नाम लेकर गाली गलौच करने के लिए श्रीकांत त्यागी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
श्रीकांत त्यागी की पत्नी और बच्चों को लेकर त्यागी समाज ने खोला मोर्चा
शुरूआत में प्रकरण को लेकर सुस्त दिख रही गौतम बुद्ध नगर पुलिस पर पूरे प्रकरण में दबाव बनने लगा। हाई प्रोफाइल सोसायटी से जुड़ा होने के कारण मामला मीडिया की सुर्खिया बनने लगा। पुलिस ने फरार चल रहे श्रीकांत त्यागी को गिरफ्तार करने के लिए उसकी पत्नी को घंटों तक हिरासत में लेकर पूछताछ की। श्रीकांत त्यागी के बच्चों का रोते बिलखते हुए वीडियो वायरल हुआ। वहीं, अतिसक्रियता दिखाते हुए पुलिस ने एक के बाद एक कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर श्रीकांत त्यागी के परिवार पर पुलिस की ज्यादती की खबर सुनकर श्रीकांत त्यागी की पत्नी के कुछ रिश्तेदार उनका हालचाल जानने के लिए सोसायटी पहुंचे। इन पर श्रीकांत त्यागी के गुंडे होने का आरोप लगा। हंगामा हुआ। पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस कमिश्नर बनाम स्थानीय सांसद बना मामला
सोसायटी में श्रीकांत त्यागी के गुंडों द्वारा उत्पात मचाने की शुरूआती खबर सुनकर स्थानीय सांसद डॉ महेश शर्मा मौके पर पहुंच गए। उनका कहना था कि जब वह यहां पहुंचे तो सोसायटी में अराजकता का माहौल था। पुलिस मौके पर नहीं थी। हालांकि बाद में पुलिस मौके पर पहुंची। डॉ महेश शर्मा पूरे प्रकरण पर काफी नाराज हुए। उन्होंने मीडिया के सामने ही लखनऊ में प्रमुख सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को पूरे प्रकरण से अवगत कराया।
डॉ महेश शर्मा ने शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी से फोन पर कहा कि पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह की उन्होंने विशेष तौर पर शिकायत की। उन्हें कहा कि हमे शर्मआती है कि प्रदेश में उनकी सरकार है। उनकी सरकार में इस तरह की अराजकता मची हुई है। मीडिया के सामने ही डॉ महेश शर्मा ने आवेश में पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह के लिए अमर्यादित शब्दों का भी प्रयोग किया।
डॉ महेश शर्मा द्वारा मामले की लखनऊ में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी से शिकायत करने पर पुलिस तथा प्रशासन में हड़कम्प मच गया। मामले में लखनऊ की सीधी एंट्री हो गई। मामले पर लखनऊ से फोन आने पर देर रात तक पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह तथा जिलाधिकारी सुहास एलवाई सहित सभी आला अधिकारियों ने सोसायटी में देर रात तक कैंप किया। सोसायटी में हंगामा करने वाले 6 युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। देर रात तक पुलिस तथा प्रशासन ने श्रीकांत त्यागी की गिरफ्तारी के लिए मंथन किया। लगभग 4 घंटों चली मैराथन बैठक के बाद पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार सिंह ने श्रीकांत त्यागी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने की घोषणा कर दी।
अगली सुबह नोएडा प्राधिकरण की एक टीम सेक्टर-93बी स्थित ग्रैंड ओमेक्स हाऊसिंग सोसायटी पहुंची और श्रीकांत त्यागी के फ्लैट पर हुए अवैध निर्माण को गिरा दिया। इसके बाद जीएसटी की एक टीम भंगेल स्थित श्रीकांत त्यागी की मार्कीट पर पहुंची और जांच पड़ताल की। नोएडा प्राधिकरण की श्रीकांत त्यागी की ओर से भंगेल स्थित मार्कीट में अतिक्रमण की बात कही। प्राधिकरण की ओर से अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाए जाने की भी बातें कहीं गई। इस समय तक पूरे प्रकरण में पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह तथा स्थानीय सांसद डॉ महेश शर्मा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थी। लोग मामले में पुलिस कमिश्नर तथा डॉ महेश शर्मा की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा करने लगे थे।
प्रकरण ने त्यागी समाज बनाम स्थानीय सांसद विवाद का रूप ले लिया, पुलिस कमिश्नर पिक्चर से हुए गायब
पुलिस द्वारा मेरठ से श्रीकांत त्यागी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। कई तरह के खुलासे भी पुलिस ने मामले में किए। पूर्व मंत्री तथा सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा श्रीकांत त्यागी को विधायक स्टीकर उपलब्ध कराने का पुलिस कमिश्नर का बयान काफी सुर्खियों में रहा। इस पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए मानहानि का केस दायर करने की बात कही गई। हालांकि पुलिस की ओर से इसकी जानकारी होने से इंकार किया गया। इसके बाद एकाएक मामला बदल गया। पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह पिक्चर से गयाब हो गए और स्थानीय सांसद तथा त्यागी समाज आने सामने हो गए। त्यागी समाज ने डॉ महेश शर्मा पर मामले में पक्षपात पूर्ण कार्रवाई कराने का आरोप लगाया। त्यागी समाज द्वारा पुलिस कार्रवाई के विरोध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए। धीरे धीरे विरोध के केन्द्र में पुलिस कार्रवाई के स्थान पर स्थानीय सांसद डॉ महेश शर्मा आ गए।
भंगेल में 21 अगस्त को प्रस्तावित है त्यागी समाज की महापंचायत
त्यागी समाज द्वारा रह रहकर डॉ महेश शर्मा पर निशाने साधे जाने लगे। हालात यह हो गए हैं कि नोएडा के भंगेल में त्यागी समाज की एक महापंचायत प्रस्तावित है। जानकारों की माने तो महापंचायत में श्रीकांत त्यागी, उनकी पत्नी और बच्चों पर हुई ज्यादती की आड़ में डॉ महेश शर्मा और भाजपा को निशाने पर लिया जाएगा। जानकारों का मानना है कि पूरे प्रकरण में डॉ महेश शर्मा विरोधी भाजपा लॉबी तथा भाजपा विरोधी दल सक्रिय हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि महापंचायत में त्यागी समाज के सम्मान के नाम पर डॉ महेश शर्मा और भाजपा विरोध की घोषणा की जा सकती है।
बता दें कि जिस तरह से डॉ महेश शर्मा का जिले की राजीनति में कद बढ़ा है, उससे भाजपा के अंदर सक्रिय विरोधी लॉबी डॉ महेश शर्मा से पार नहीं पा सकी है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी भाजपा विरोधी दलों पर भारी साबित हो रही है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े वर्ग त्यागी समाज को इस प्रकरण की आड़ में डॉ महेश शर्मा विरोधी भाजपा लॉबी डॉ महेश शर्मा और विरोधी दल भाजपा के विरोध में खड़ा करना चाहते हैं। जानकारों का कहना है कि इस महापंचायत में राजनीतिक नजरिए से एक तीर से कई निशाने साधने के प्रयास किए जाने की संभावना है।
प्रकरण में कैसे आया दलित समाज ?
भंगेल में त्यागी समाज की महापंचायत से पूर्व त्यागी समाज के मांगेराम त्यागी द्वारा प्रकरण पर स्थानीय सांसद डॉ महेश शर्मा से फोन पर बात की गई। इस पूरी बातचीत ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। डॉ महेश शर्मा से बातचीत के दौरान मांगेराम त्यागी ने दलित समाज के प्रति जातिसूचक तथा अपमानित शब्दों का प्रयोग किया गया है। दलित समाज को एक तरह से राजनीतिक दलों का बधुआ बताते हुए उदाहरण दिए गए है। ऑडियो वायरल होने के बार दलित समाज में मांगेराम त्यागी द्वारा प्रयोग किए गए शब्दों पर आपत्ति जता रहा है।
दादरी के चिटेहरा गांव निवासी राहुल आर्यन अपनी फेसबुक पोस्ट में कहते हैं कि कि त्यागी समाज की लड़ाई पूरे प्रकरण में पुलिस प्रशासन से हो सकती है। डॉ महेश शर्मा से हो सकती है। दलित समाज का इस प्रकरण में कोई लेना देना नहीं है। फिर मांगेराम त्यागी को देश के दलित समाज का अपमान करने की क्या आवश्यकता थी। ?
वहीं जारचा निवासी योगेश गौतम ने अपने फेसबुक लाइव में भी मांगेराम त्यागी के वायरल ऑडियो को लेकर कुछ इसी तरह की आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मांगेराम त्यागी ने जिस तरह से उपहास भरे अंदाज में कहा है ” हम भाजपा के चमार नहीं है” यह देश के सम्पूर्ण दलित समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि देश के दलित समाज ने देश के विकास में किसी अन्य समाज की अपेक्षा किसी भी तरह कमतर योगदान नहीं है। उनका कहना है कि मांगेराम त्यागी ने जनता के चुने हुए प्रतिनिधि के सामने दलित समाज को जिस तरह से संबोधित किया है, वह निंदनीय है। इससे देश के दलित समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। योगेश गौतम ने मांग करते हुए कहा है कि मांगेराम त्यागी अपनी बातों के लिए दलित समाज से माफी मांगे। अन्यथा सरकार से निवेदन है कि दलित समाज के खिलाफ की गई अशोभनिय टिप्पणी को लेकर मांगेराम त्यागी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।