सेक्टर-150 हादसा: नोएडा प्राधिकरण की सख्ती, जूनियर इंजीनियर की सेवा समाप्त

Panchayat 24 (नोएडा) : सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले ने प्रशासन को झकझोर दिया है। घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम ने नोएडा ट्रैफिक सेल विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। वहीं, क्षेत्र में यातायात और संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने संबंधित विभागों से लोटस बिल्डर से जुड़े आवंटन और निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही निर्माणाधीन परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था का पुनः निरीक्षण करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं।
कैसे हुआ हादसा
दरअसल, नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार देर रात सेक्टर-150 के पास एटीएस ली-ग्रैंडिओस मोड़ पर यह दर्दनाक हादसा हुआ। गुरुग्राम से घर लौट रहे 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार अनियंत्रित होकर नाले की दीवार तोड़ते हुए निर्माणाधीन मॉल के पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी। बताया जा रहा है कि घना कोहरा और तेज रफ्तार हादसे की प्रमुख वजह रहे।
डूबने से पहले युवराज ने अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी। सूचना मिलते ही पिता करीब 15 मिनट में मौके पर पहुंचे। पुलिस, दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने करीब साढ़े चार घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। लगभग 30 फीट गहरे पानी से युवराज को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पिता का आरोप : सुरक्षा इंतजाम नदारद
मृतक के पिता राजकुमार मेहता, जो सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी में रहते हैं और एसबीआई से निदेशक पद से सेवानिवृत्त है। उन्होंने पुलिस को दी तहरीर में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटनास्थल के आसपास न तो मजबूत बैरिकेडिंग थी, न ही रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड लगाए गए थे। सेक्टर-150 के निवासी पहले भी प्राधिकरण से सुरक्षा उपायों की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोड़ पर संकेतक नहीं लगे हैं, ब्रेकर पर पीली पट्टी तक नहीं है और सड़क पर गड्ढे बने हुए हैं। इसी कारण वाहन चालक मोड़ का अंदाजा नहीं लगा पाते और हादसे हो जाते हैं। कुछ दिन पहले एक ट्रक भी इसी स्थान पर नाले में गिर चुका है।
निर्माणाधीन बेसमेंट बना जानलेवा
जिस बेसमेंट में कार गिरी, वहां सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। न तो चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। बेसमेंट में करीब 30 फीट तक पानी भरा हुआ है, जो बरसात का नहीं बल्कि आसपास की सोसायटियों से निकलने वाला पानी बताया जा रहा है। निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यह पानी लंबे समय से जमा है।
जानकारी के अनुसार यह बेसमेंट करीब दो वर्ष पहले खोदा गया था और तब से अधूरा पड़ा है। पिलर आधे-अधूरे हैं और सरिया तक बाहर दिखाई दे रही है। हादसे के बाद निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि निर्माण स्थलों और सड़क सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने वालों पर सख्ती होगी, ताकि भविष्य में किसी परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।



