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नोएडा सेक्‍टर-150 प्रकरण : डीएम और सीईसी के पिता-पुत्री संबंधों की अमर्यादित आलोचना विषय की गंभीरता का संकट

Noida Sector-150 case: The inappropriate criticism of the father-daughter relationship between the District Magistrate and the Chief Election Commissioner undermines the seriousness of the issue.

Panchayat 24 (नोएडा) : नोएडा सेक्‍टर-150 में युवा इंजीनियर युवराज की बिल्‍डर भूखंड में खोदे गए बेसमेंट में भरे पानी में डूबने से हुई मौत के मामले में जिम्‍मेवार लोगों में निसंदेह गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूप का नाम भी शामिल है। लेकिन उन्‍हें जिम्‍मेवार ठहराने का आधार क्‍या है ? गौतम बुद्ध नगर की डीएम होने के साथ जिला आपदा प्रबंधन की भी अहम जिम्‍मेवारी उनके पास है ? या फिर इस लिए कि वह देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार की बेटी है ?

मैंने अपनी कल की पोस्‍ट- नोएडा सेक्टर-150 की दर्दनाक घटना : विकास के दावे, मौत की हकीकत, मलाईदार और कमाईदार जिले में डूब गया सिस्टम – में लिखा है कि किस तरह अधिकांश अधिकारी एवं कर्मचारी गौतम बुद्ध नगर को केवल मलाईदार एवं कमाईदार जिला समझकर यहां तैनाती पाने के लिए लालायित रहते हैं। जो भी अधिकारी कमाई और मलाई काटने के उद्देश्‍य से कहीं पर तैनाती पाएगा, वह कर्तव्‍यपालन के लिहाज से निकम्‍मा, उदासीन और जन सरोकार के प्रति संवेदीनहीन ही होगा। यह बात 18 जनवरी को युवराज की मौत के मामले में स्‍व: सिद्ध हो चुकी है।

जनआक्रोश के दाबव में सरकार ने एसआईटी का गठन करके लोगों को शांत करने का प्रयास किया है। एसआईटी की क्‍या रिपोर्ट होगी ? कौन दोषी होगा ? दोषियों पर क्‍या कार्रवाई होगी ? यह भविष्‍य के गर्भ में हैं, लेकिन पूरे प्रकरण ने नोएडा के हाईटेक सिटी के दावों की पोल खोल दी है। लेकिन इस प्रकरण में देश के चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। फिर इस प्रकरण में उनका नाम क्‍यों बार-बार सामने आ रहा है ? इस लिए कि वह डीएम मेधा रूपम के पिता है ?

बीती 18 जनवरी को हादसे के बाद सोशल मीडिया पर गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम को अमर्यादित तरीके से केवल इस लिए निशाना बनाया जा रहा है कि वह देश के चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार की बेटी है। निजी एवं अमर्यादित टिप्‍पणियां की जा रही हैं। कुछ लोगों की राजनी‍तिक कुण्‍ठा भी बाहर आती हुई दिख रही है। सवाल उठता है एक आईएएस अधिकारी का बेटा अथवा बेटी का आईएएस अधिकारी बनना कोई अपराध है ?

दरअसल, उन्‍हें भी एक नियत प्रक्रिया में स्‍वयं को सिद्ध करने के बाद यह मुकाम हासिल होता है। इस लिए पूरे प्रकरण में बतौर डीएम मेधा रूपम की आलोचना लापरवाही, उदासीनता, कर्तव्‍यहीतना तथा असंवेदनशीलता आदि आधार पर जरूर की जानी चाहिए। किन्‍तु पिता-पुत्री संबंधों के आधार पर स्‍तरहीन और अमर्यादितआलोचना तथा टीका टिप्‍पणी करना कतई उचित नहीं है। यह विषय की गंभीरता को कम करने के साथ निजी और राजनीतिक द्वेष को ही प्रदर्शित करता है।

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