नोएडा सेक्टर-150 हादसा : तेज रफ्तार बन गई मौत की वजह ? फिर भी बच सकती थी युवराज की जान
Noida Sector-150 accident: Was speeding the cause of death? Yet, Yuvraj's life could have been saved.

Panchayat 24 (नोएडा) : किसी घटना के घटित होने के दो बिन्दुओं पर विचार किया जाता है। पहला, यह घटना क्यों और किन परिस्थितियों में घटी ? दूसरा, यदि घटना घटी तो इससे होने वाली हानि को कम से कम करने के लिए क्या प्रयास किए गए ? नोएडा के सेक्टर-150 में एक बिल्डर साइट पर बने बेसमेंट में भरे हुए पानी में कार सहित डूबने से एक 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की घटना ने लगभग सात महीने पूर्व ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चारमूर्ति चौराहे पर हुए दर्दनाक हादसे की यादें ताजा कर दी है।
बीते 17 जून देर रात पंचशील-दो हाऊसिंग सोसायटी में रहने वाला अंकुर (28) रात को अपनी स्पोर्टस बाइक (डुकाटी बाइक) पर अपनी महिला मित्र कशिश के साथ सवार होकर गौर सिटी स्थित चार मूर्ति की ओर आ रहे थे। यहां अण्डरपास निर्माण का काम चल रहा था। बाइक निर्माधीन अण्डरपास पर लगी लोहे की सेफ्टी रेलिंग को तोड़ते हुए नीचे जा गिरी। दर्दनाक हादसे में बाइक सवार युवक एवं युवती की मौत हो गई थी। इस घटना में प्राधिकरण की लापरवाही की खूब चर्चा हुई थी जोकि इस घटना का एक अनिवार्य पहलू भी था। हालांकि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से यह भी तय हो गया था कि बाइक इतनी तेज थी कि युवक ने बाइक से पूरी तरह नियंत्रण खो दिया।
सेक्टर-150 में घटी घटना के समय बहुत अधिक कोहरा था जिसके कारण पानी में फंसे युवराज की सही-सही स्थिति का अनुमान लगा पाना मुश्किल हो रहा था। इस घटना को भी यदि उपरोक्त दोनों बिन्दुओं की कसौटी पर कसा जाए तो महसूस होता है कि इस घटना के दूसरे पहलू पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण की पहले चर्चा हो रही है। हालांकि यह चर्चा अपने आप में बहुत प्रासंगिक है। यदि तीनों संस्थाओं ने इस मामले में अपने कर्तव्य का सजगता से पालन किया होता तो युवराज मेहता अपने परिवार के साथ जिंदा होता। इसके बावजूद घटना का पहला पहलू अभी अनछुआ ही रह रहा है।
हादसे वाले स्थान पर एक मोड है जिसको हादसे की वजह माना जा रहा है। फिर भी वाहनों के मुडने के लिए पर्याप्त जगह है। बिल्डर साइट पर खोदा गया बेसमेंट सड़क से काफी दूरी पर है। बेसमेंट और सड़क के बीच नाला है। यह नाला एक स्थान पर क्षतिग्रस्त है। कुछ दिन पूर्व एक ट्रक भी यहां फंस गया था।घटनास्थल को देखने पर महसूस होता है कि केवल कोई वाहन अनियंत्रित होकर ही सड़क को छोड़कर नाले तक पहुंच सकता है। यह ट्रक भी अनियंत्रित होकर ही नाले तक पहुंचा होगा। यदि ऐसा है तो फिर यह बातें युवराज की कार पर भी लागू होती हैं। युवराज की कार को मंगलवार को सड़क से लगभग सौ मीटर अंदर बेसमेंट में भरे पानी से निकाला गया। यहां तक तेज रफ्तार के कारण ही कोई कार पहुंच सकती है। अन्यथा कार नाले में फंसकर रूक जाती अथवा पास में ही पलट कर रूक जाती। वैसे आपको क्या लगता है ?



