उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, शिक्षा, राजस्व और चिकित्सा विभाग फिसड्डी, जानिए क्या है पूरा मामला ?
Industrial Development, Education, Revenue and Medical departments are lagging behind in Uttar Pradesh, know what is the whole matter?

Panchayat 24 : उत्तर प्रदेश सरकार के एक आदेश का पालन करने में औद्योकि विकास, शिक्षा, चिकित्सा और राजस्व विभाग फिसड्डी साबित हुए है। हालंकि गृह विभाग भी इस पैमाने पर पिछड़ गया है लेकिन आला अधिकारियों ने कुछ मजबूरियों का हवाला देते हुए जल्द ही अपने प्रदर्शन में सुधार की बात कही है। गृह विभाग ने इसके लिए कुछ समय मांगा है। वहीं, सरकार अपने आदेश का पालन कराने के लिए पूरी तरह से दृढ दिखाई दे रही है। सरकार के इस आदेश के बाद कई विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के होश उड़ गए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को देश में अपनी संपत्तियों का ब्यौरा पेश करने के लिए कहा था। मुख्य सचिव ने 17 अगस्त को एक शासनादेश जारी करते हुए सभी कर्मचारियों को 31 अगस्त तक अपनी सम्पत्तियों का ब्यौरा मानव संपदा पोर्टल पर पेश करने के आदेश दिए थे। शासनादेश में कहा गया था कि ऐसा नहीं करने वाले कर्मचारियों का वेतन रोकने की बात कही गई थी। इस शासनादेश के बाद अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने वालों की संख्या 17 प्रतिशत से बढ़कर 71 प्रतिशत हो गई है। शासनादेश का पालन करते हुए राज्य के कुल 846640 कर्मचारियों में से लगभग 71 प्रतिशत अर्थात 602075 राज्य कर्मचारियों ने अपनी चल अचल संपत्तियों का ब्यौरा राज्य सरकार को पेश कर दिया है। वहीं, अभी तक लगभग 2.44 लाख कर्मचारियों ने अपनी सम्पत्ति को सार्वजनिक नहीं किया है। वहीं, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अपनी चल अचल संपत्तियों का खुलासा नहीं करने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों का वेतन नहीं दिया जाएगा।
संपत्ति का खुलासा करने में यह विभाग रहे आगे
राज्य सरकार के शासनादेश का पालन करते हुए अपनी सम्पत्ति का खुलासा करने में सैनिक कल्याण, टैक्सटाइल, ऊर्जा, खेल, कृषि और महिला कल्याण विभाग सबसे आगे हैं। इन विभागों के कर्मचारियों ने अपनी चल अचल संपत्तियों का खुलासा कर दिया है।
इन विभागों के कर्मचारी नहीं कर रहे हैं सम्पत्तियों का खुलासा
वहीं, अपनी चल अचल संपत्तियों का ब्यौरा मानव संपदा पोर्टल पर पेश करने में पेश करने में औद्योगिक विकास, बेसिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा और राज्यव विभाग सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं। इन विभागों के कर्मचारी अपनी चल अचल संपत्ति को छिपा रहे हैं। वहीं, डीजीपी मुख्यालय ने नियुक्ति विभाग को पत्र भेजकर अपने कर्मयारियों के लिए संपत्तिा का ब्यौरा देने के लिए समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि पुलिसकर्मी इस समय सीमा के दौरान त्यौहारों और पुलिस भर्ती के आयोजन के कारण अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा पेश नहीं कर सके।