ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण किसानों को देगा 6 प्रतिशत विकसित भूखंड, मुआवजा बढ़ाने पर भी विचार

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : ग्रेटर नोएडा के किसानों के लिए जल्द ही राहत भरी खबर आ सकती है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण एक बार फिर किसानों को भूमि अधिग्रहण के बदले 6 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की योजना पर गंभीरता से काम कर रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत किसानों को दिए जाने वाले ये भूखंड अलग से विकसित किए जाने वाले आवासीय सेक्टरों में आवंटित किए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, प्राधिकरण भूमि अधिग्रहण के लिए दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। वर्तमान में किसान प्राधिकरण को सीधे जमीन बेचने को घाटे का सौदा मान रहे हैं, क्योंकि खुले बाजार में उनकी भूमि की कीमत 70 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच रही है। इसी कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी जमीन प्राधिकरण को न देकर कॉलोनाइजरों और प्रॉपर्टी डीलरों को बेच रहे हैं। बता दे कि साल 2023 में अंतिम बार किसानों की जमीन की मुब्ज़ा राशि बढ़ाई गई थी।
इस स्थिति के चलते प्राधिकरण को विकास परियोजनाओं के लिए भूमि जुटाने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि भविष्य की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए बड़े लैंड बैंक की आवश्यकता है।
सूत्र बताते हैं कि इस समस्या के समाधान के लिए प्राधिकरण ने शासन को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें मुआवजा राशि में वृद्धि और किसानों को पुनः 6 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की सिफारिश की गई है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव को जल्द ही शासन स्तर से स्वीकृति मिल सकती है।
पूर्व अनुभवों को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण इस बार 6 प्रतिशत विकसित भूखंडों के आवंटन को सुनियोजित नीति के तहत लागू करेगा। इसके लिए किसानों के लिए एक अलग विकसित सेक्टर बसाया जाएगा, जिसमें आवासीय सेक्टर जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिस किसान की जितनी भूमि अधिग्रहित की जाएगी, उसी अनुपात में या प्राधिकरण की नीति के अनुसार न्यूनतम और अधिकतम सीमा तय कर भूखंड दिए जाएंगे।
किसानों के लिए विकसित किए जाने वाले इन सेक्टरों में भवन निर्माण पर वही भवन नियमावली और नियोजन कानून लागू होंगे, जो प्राधिकरण के अन्य आवासीय सेक्टरों में लागू हैं। भवन निर्माण से पूर्व प्राधिकरण से नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा।
इस नीति के माध्यम से प्राधिकरण एक साथ कई उद्देश्यों को साधने का प्रयास कर रहा है। इससे जहां किसानों के भूखंडों के अनियोजित विकास की समस्या समाप्त होगी, वहीं स्मार्ट विलेज की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही किसानों द्वारा लम्बे समय से मुआवजा राशि बढ़ाई जाने की मांग भी पूरी हो जाएगी


