बदला जाएगा नाम : इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएगा जिला गाजियाबाद, जानिए अटल बिहारी वाजपेयी गाजियाबाद के स्थान पर जिले का कौनसा नाम रखना चाहते थे ?
Name will be changed: Ghaziabad district will remain recorded in the pages of history, know which name of the district did Atal Bihari Vajpayee want to keep in place of Ghaziabad?

Panchayat 24 : उत्तर प्रदेश में लगातार जिलों के नाम बदलने का सिलसिला जारी है। कुछ जिलों के नाम बदलकर उनके एतिहासिक नामों पर रखे जा चुके हैं। वहीं, कुछ जिलों के नाम बदले जाने की संभावना प्रबल है। गाजियाबाद जिले का नाम भी इन जिलों की सूची में शामिल हो गया है। मंगलवार को नगर निगम की बैठक में गाजियाबाद का नाम बदलने से संबंधित प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। गाजियाबाद के स्थान पर नया नाम क्या होगा, इसको लेकर मंथन चल रहा है। कुछ नामों पर चर्चा भी शुरू हो गई है। इनमें गजनगर, हरनंदीनगर, दूधेश्वर नगर, दुर्गाभाभी नगर आदि नाम शामिल हैं। हालांकि अंतिम नाम पर निर्णय प्रदेश सरकार को लेना है। प्रस्ताव पास होने पर बैठक में भारत माता की जय के नारे भी लगाए गए।
अटल बिहारी वाजपेयी भी चाहते थे गाजियाबाद का नाम बदलना
दरअसल, गाजियाबाद का नाम बदलने को लेकर कई बार मांग उठ चुकी है। इसको लेकर सबसे अधिक संभावनाएं उस समय व्यक्त होने लगी थी जब साल 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहरी वाजपेयी ने भी गाजियाबाद का नाम बदले जाने की इच्छा प्रकट की थी। बता दें कि देश की महान महिला क्रांतिकारी दुर्गा भाभी का अंतिम जीवन गाजियाबाद में ही व्यतीत हुआ था। यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली थी। दुर्गा भाभी को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गाजियाबाद आए थे। उस समय उन्होंने इच्छा जताई थी कि गाजियाबाद के स्थान पर देश की महान महिला क्रांतिकारी दुर्गाभाभी के नाम से यह जिला जाना जाए।
कौन थी दुर्गा भाभी ?
दुर्गा भाभी एक महान महिला क्रांतिकारी थी। उनका जन्म 7 अक्टूबर 1902 को कौशाम्बी के शहजादपुर ग्राम में पंडित बांके बिहारी के घर हुआ था। इनकी शादी लाहौर के रहने वाले क्रांतिकारी भगवती चरण बोहरा के साथ हुई थी। वह एक महान क्रांतिकारी थे। सुखदेव और भगतसिंह उनकी मंडली के अहम सदस्य थे। भगवती चरण वोहरा से शादी होने के बाद दुर्गा भाभी ने भी क्रांतिकारी कामों में सहयोग करना शुरू कर दिया था। दुर्गाभाभी भारत के स्वतंत्रा संग्राम में क्रांतिकारियों की प्रमुख सहयोगी थी। उन्होंने कई बार क्रांतिकारियों की बड़ी मदद की। चोरी छिपे उन्हें क्रांतिकारियों को हथियार भी मुहैया कराए थे। भगत सिंह के साथ दुर्गा भाभी ने18 दिसंबर 1928 को वेश बदलकर कलकत्ता मेल से यात्रा की थी। ऐसा करके उन्होंने भगत सिंह कोअंग्रेजों की नजरों से बचकर निकलने में मदद की थी। साल 1927 में लाला लाजपतराय की मौत का बदला लेने के लिये लाहौर में बुलायी गई बैठक की अध्यक्षता दुर्गा भाभी ने की थी। तत्कालीन बम्बई के गर्वनर हेली को मारने की योजना में टेलर नामक एक अंग्रेज अधिकारी दुर्गा भाभी ने ही गोली चलाई थी। चंद्रशेखर आजाद के शहीद होने के बाद दुर्गा भाभी ने लखनऊ में 1937 से 1982 तक शिक्षण केंद्र चलाया। इसके बाद में वह अपने बेटे शचींद्र बोहरा के साथ गाजियाबाद में आकर रहने लगीं और 15 अक्टूबर 1999 में यहीं पर उनका निधन हुआ था। उनके निधन के दौरान ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गाजियाबाद का नाम दुर्गा भाभी नगर रखने की बात कहीं थी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व में भी बदले हैं नाम
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के कई जिलों के नाम बदल दिए हैं। इनमें लाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया। फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया गया। अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ रखने की भी चर्चा भी जोर पकड़ रही है। इसके अतिरिक्त मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन किया गया। साथ ही झांसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन रखा गया।
जानिए गाजियाबाद के बारे में
शुरूआत में 4 नवंबर 1976 से पूर्व गाजियाबाद जिला मेरठ की तहसील थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने 14 नवंबर 1976 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर गाजियाबाद को जिला के रूप में घोषित किया। गाजियाबाद की भौगोलिक स्थिति के चलते इसको उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार अथवा गेटवे ऑफ यूपी भी कहा जाता है। माना जाता है कि शुरूआती दौर में दिल्ली से सटे इस शहर की स्थापना 1740 ई में वजीर गाजी उद दीन ने की थी। बाद में इस नगर को गाजीउद्दीननगर कहा जाने लगा। इसी नाम को छोटा करके गाजियाबाद नाम दिया गया। मई 1976 में गाजियाबाद से गौतम बुद्ध नगर जिले के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दादरी क्षेत्र ( सम्पूर्ण दादरी तहसील) अलग हो गए। 27 सितंबर, 2011 को हापुड़ को नया जिला बनाया गया। हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर तहसीलों को गाजियाबाद से अलग करके हापुड़ जिले का हिस्सा बनाया गया। वर्तमान में गाजियाबाद में गाजियाबाद, मोदीनगर और लोनी तहसील शामिल हैं।