जिला प्रशासन

युद्ध की छाया में ईंधन बाजार, कालाबाजारी रोकने को प्रशासन का अभियान तेज

Panchayat 24 (गौतम बुद्ध नगर) : जब वैश्विक विश्व में एक देश की उपलब्धयों का लाभ एक देश लेता है तब युद्ध की विभीषिका के प्रभाव से कोई देश कैसे अछूता रह सकता है? भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता को लेकर अमेरिका, इजराइल और ईरान युद्ध का असर पड़ना लाजमी है। युद्ध जितना लम्बा चलेगा चिंता उतनी बढ़ेगी। हालांकि सरकार लगतात आश्वासत कर रही है कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भण्डार है, लेकिन विपक्ष को भरोसा नहीं है.

वर्तमान परिस्थितियों में गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल (एलपीजी) विपणन/आपूर्ति शाखा के क्षेत्रीय बिक्री अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की। बैठक में उन्होंने कहा कि जिले के लिए पर्याप्त मात्रा में एलपीजी, पेट्रोल एवं डीजल का स्टॉक उपलब्ध है। किसी भी हालत में गैस उपभोक्ताओं के बीच संसनी की स्थिति उत्पन्न न हो । सिलेंडर जारी करने को लेकर भी दिशा निर्देश जारी किए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 लागू है। ऐसी स्थिति में यदि किसी के द्वारा गैर कानूनी रूप से एलपीजी सिलेण्डरों की खरीद फरोख्त एवं भण्डारण किया जाता है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तेल और गैस की कालाबाजारी और अवैध भण्डारण की सम्भावनाओं के चलते जिला प्रशासन ने पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसियों पर छापमारी अभियान भी चला रहा है। यह भी सच है कि गैस की कालाबाजारी और अवैध भण्डारण एक अवैध लेकिन बड़ा कारोबार है। ऐसे लोग आपदा में अवसर भी तलाशते है। युद्ध की विभीषिका का प्रभाव दुनिया पर पड़ना लाजमी है तो फिर भारत में सबकुछ सामान्य कैसे हो सकता है।

हर जिम्मेवार सरकार का दायित्व होता है कि अपने नागरिकों की जरूरतों का ध्यान रखे और उनकी हिम्मत बनाए रखे। भारत सरकार यह सब कर रही है फिर सवाल उठता है कि गैस किसको मुहैया नहीं हो रही है? कौन गैस की किल्ल्त की खबर फैला रहा है? किसको इससे लकभ लोग? दरअसल, देश में एक वर्ग मजदूर और अस्थाई रूप से किराए पर रहने वालों का है। इनका घर का चूल्हा और अथवा रहड़ी पटरी लगाकर खाद्य सामान बनाने का कारोबार करने वाले भी इन्हीं गैस सिलेंडर पर निर्भर होता है। कारण है कि इनके पास स्थाई गैस सिलेंडर नहीं होते है। वहीं रेस्टोरेंट और होटल भी चोरी छिपे कमर्शियाल सिलेंडर के स्थान पर सामान्य सिलेंडर का उपयोग करते है। यह ब्लैक में कालाबाजारी एवं भण्डारण करने वालों से अधिक क़ीमतों में सिलेंडर खरीदते है।

जब देश गैस और तेल संकट की ओर बढ़ रहा है, कालाबाजारी और भण्डारण करने वालों पर लगातार छापे पड़ रहे है। भारी मात्र में बरामद गैस सिलेंडर की बरामदगी इसका प्रमाण है कि गैस की किल्ल्त के साथ कालाबाजारी और भण्डारण का गपरख धंधा भी चल पड़ा है। विपक्ष की आशंकाओं को कोरी राजनीति से जोड़कर ख़ारिज करना भी कतई उचित नहीं है। देश के नागरिकों का राष्ट्रव्यापी समस्या को समझने के लिए सार्वजनिक दृष्टिकोण अभी विकसित नहीं हो सका है । परिणामस्वरूप लोग ऐसी स्थिति में आज को छोड़कर कल की चिंता करने लगते हैं और भण्डारण तथा कालाबाजारी में लिप्त हो जाते है। ऐसा ही कुछ दृश्य उस वक़्त देशवासियों ने देखा था जब कुछ साल पहले सोशल मीडिया और वाट्सअप ग्रुपों पर एक फर्जी खबर प्रसारित हुई और कुछ ही घंटों में बाजार से नमक को लोगों ने खरीदकर अपने घरों में भण्डारण कर लिया था।

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