ग्रेटर नोएडा जोन

किसानों में जागरूकता का अभाव : किसानों की नासमझी से 15 प्रतिशत घट गया देश का बासमती निर्यात

Lack of awareness among farmers: country's basmati export decreased by 15 percent due to farmers' ignorance

Panchayat24 : देश में किसानों में कीटनाशकों के प्रयोग को लेकर जागरूकता का अभाव देश के निर्यात पर भारी पड़ रहा है। दरअसल, किसान धान की फसल में प्रयोग होने वाले रसायन ट्राईसाइक्लाजोल एवं बुप्रोफेजिन का निर्धारित मात्रा से अधिक प्रयोग कर रहे हैं। यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं खाड़ी देशों को बासमती चावल के निर्यात में कटिनाशकों के अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) के कारण कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। परिणामस्‍वरूप वर्ष 2020-21 की तुलना में वर्ष 2021-22 में 15 प्रतिशत तक निर्यात घटा है।

क्‍या है पूरा मामला ?

जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि किसान धान की फसल को कीट रोगों से बचाने के लिए कई तरह के कीटनशक रसायनों का प्रयोग तय मात्रा से अधिक कर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि देश में कीटनाशकों की औसत खपत 0.381 किग्रा (a.i) प्रति हेक्टेयर है, जबकि विश्व में औसत 0.5 किग्रा० (a.i) प्रति हेक्टेयर है। कीटनाशकों का असुरक्षित एवं अन्धाधुन्ध प्रयोग खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष के रूप में मानव स्वास्थ्य, जीव-जन्तुओं व पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं और कृषि के निर्यात को भी प्रभावित करता है। उन्‍होंने किसानों का अहवान करते हुए कहा है कि फसल में कीटनाशकों का सुरक्षित एवं संस्तुत प्रयोग बहुत जरूरी है।

ट्राइसाइक्‍लाजोल रसायन बड़ी समस्‍या

जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि यूरोपीय संघ के देशों को निर्यात किये जा रहे बासमती चावल में ट्राईसाइक्लाजोल रसायन का अवशेष स्‍वीकृत सीमा 0.01 ppm से अधिक पाया जा रहा हैं। ट्राईसाइक्लाजोल का प्रयोग मुख्यतः झोका रोग के नियंत्रण के लिए किया जाता है। बालियों में दाने बनने के बाद इसका प्रयोग करने से चावल में अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) बढ़ जाती है। परिणामस्‍वरूप  यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं खाड़ी देशों को बासमती चावल के निर्यात में कटिनाशकों के अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) के कारण कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

मानव समाज की भलाई के लिए फसल में कीटनाशकों का न्‍यायोचित प्रयोग करें

भारत सरकार द्वारा मानव स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ने वाले दुष्‍प्रभाव के कारण ट्राईसाइक्लाजोल एवं बुप्रोफेजिन को प्रतिबंधित किए जाने के लिए सभी संबन्धित संस्थाओं से आपत्तियाँ एवं सुझाव मांगे गये थे। भारत सरकार द्वारा गठित उप समिति द्वारा बताया गया कि बुप्रोफेजिन को चीन, जापान, अमेरिका, आस्ट्रेलिया एवं यूरोपीय संघ जैसे अन्य विकसित देशों सहित विभिन्न एशियाई देशों में प्रयोग की अनुमति है। इसी प्रकार ट्राईसाइक्लाजोल 14 एशियाई देशों में पंजीकृत है, लेकिन यूरोपीय संघ वर्तमान समय में पर्याप्त वैज्ञानिक डाटा के अभाव में इसे मान्‍यता नहीं देता। ट्राईसाइक्लाजोल एवं बुप्रोफेजिन को मानव स्वास्थ्य पर दुष्‍प्रभाव को देखते हुए जिला कृषि विभाग ने मानव समाज और पर्यावरण को बचाने के लिए किसानों को पर्याप्‍त मात्रा में प्रयोग करने अथवा हो सके तो कतई उपयोग नहीं करने की सलाह दी है। इनके स्थान पर बायोपेस्टीसाइड को विकल्‍प के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है।

 

 

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