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कैलेंडर कांड : नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में कैलेंडर से मचा बवंडर, एनएमआरसी कैलेंडर का केन्‍द्र बन गए महेन्‍द्र

Calendar controversy: A storm erupted at the Noida Industrial Development Authority over a calendar; Mahendra became the central figure in the NMRC calendar controversy.

डॉ देवेन्‍द्र कुमार शर्मा

Panchayat 24 (स्‍टोरी) : पुराना साल गया और नया साल शुरू हो गया। क्‍या नए साल के साथ लोगों के जीवन में कुछ खास बदलाव आया है ? अधिकांश लोगों का यही कहना होगा कि जैसे हालात 31 दिसंबर को थे, लगभग वैसी ही परिस्थितयां 1 जनवरी को भी थी। फिर नए साल में बदलाव क्‍या हुआ ? हां बदलाव के नाम पर दीवार पर लटकने और टेबल पर रखा जाने वाला कैलेंडर जरूर बदल गया है। कैलेंडर से याद आया कि नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में कलैंडर छपने के बाद हालात बदल गए, जज्‍बात बदल गए चुके हैं। जो अधिकारी कभी बॉस के दिल के करीब थे, वह नजरों से भी दूर हो गए।

यह सारा मामला कैलेंडर और महेन्‍द्र से जुड़ा हुआ है। दरअसल, नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में ओएसडी और नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) के कार्यकारी निदेशक महेन्‍द्र प्रसाद पर एनएमआरसी का साल 2026 का गलत कैलेंडर जारी करने का आरोप है। जिस दौर में किसी भी परियोजना के प्रचार एवं प्रसार के पोस्‍टर, बैनर पर संबंधित सरकार के मुखिया, मंत्री, परियोजना का मॉडल, परियोजन से जुड़ी जानकारियां और महापुरूषों की तस्‍वीरें छपी होती है, वहीं एनएमआरसी के साल 2026 के कैलेंडर में कार्यकारी निदेशक और प्रबंधक निदेशक (नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ डॉ लेकेश एम) की तस्‍वीरें छपी हैं।

बताया जा रहा है कि कैलेंडरके अप्रैल महीने पर लोकेश एम और जुलाई महीने पर महेन्‍द्र प्रसाद की तस्‍वीरें छपी हुई हैं। चर्चा है कि इन महीनों में दोनों अधिकारियों का जन्‍म दिवस होता है। मामले ने तूल पकड़ा तो पहले महेन्‍द्र प्रसाद को एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक पद से हटाकर यह जिम्‍मेदारी प्राधिकरण के एसीईओ कृष्‍णा करूणेश को सौंप दी गई। बाद में शासन स्‍तर से हुई कार्रवाई के बाद महेन्‍द्र प्रसाद को ओएसडी पद से हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया। बताया जाता है कि कैलेंडर प्रकरण से डॉ लोकेश एम काफी नाराज थे। सवाल उठता है क्‍या यह कलैंडर बतौर एनएमआरसी एमडी लोकेश एम के संज्ञान में लाए बिना ही जारी कर दिया गया था ?

यदि ऐसा है तो यह लोकेश एम की नेतृत्‍व क्षमता पर भी सवालिया निशान है। वैसे सोशल मीडिया पर एक वायरल तस्‍वीर के साथ चर्चा है कि कलैंडर को लोकेश एम द्वारा ही एक कार्यक्रम में जारी किया गया था। कार्यक्रम में अन्‍य अधिकारी भी उपस्थित थे। खैर, जिस कार्य संस्‍कृति में बॉस हमेशा सही होता है, वहां किसी भी अधिनस्‍थ अधिकारी से जुड़ा कोई भी सवाल कितना सही है ? यह मायने नहीं रखत है। कलैंडर जारी होने के पीछे कौन जिम्‍मेवार है और किसकी गलती है ? यह जानना मेरा उद्देश कतई नहीं है। पूरे प्रकरण में हुई त्‍वरित कार्रवाई ने मुझे जरूर चौंकाया है।

नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की जितनी चर्चा विकास के लिए होती है, उतना ही प्राधिकरण का नाम भ्रष्‍टाचार एवं घोटालों से जुड़ा रहा है। वर्तमान में माफिया प्राधिकरण पर लगातार हावी हैं। पिछले कुछ सालों में हजारों एकड़ अधिसूचित जमीन पर अवैध कब्‍जा हो चुका है। इन मामलों में कलैंडर प्रकरण की तरह त्‍वरित कार्रवाई का अभाव ही रहा है। हर प्रकरण में लगभग शांत मुद्रा में दिखाई देने वाले नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में कैलेंडर प्रकरण से अचानक तेज हलचल कैसे पैदा हो गई ? क्‍या वाकई मामला कैलेंडर प्रकरण से जुड़ा है अथवा पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल हुआ है ? महेन्‍द्र प्रसाद को अति आत्‍मविश्‍वास भारी पड़ गया या फिर प्राधिकरण के अंदर चलने वाले शह मात के खेल में गच्‍चा खा गए ? पुरानी कहावत है किसी की विदाई होती है, किसी के लिए संभावनाओं के द्वार खुल जाते हैं।

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