अंसल हाऊसिंग गोल्फ लिंक-2 रेजिडेंटस की बड़ी जीत, लगभग 12 करोड़ खर्च कर सोसायटी के अधूरे विकास कार्य होंगे पूरे
Big victory for Ansal Housing Golf Link-2 residents, community development work of the society will be completed by spending about 12 crores,

Panchayat 24 : ग्रेटर नोएडा स्थित अंसल गोल्फ लिंक हाऊसिंग सोसायटी के रेजिडेंट्स की अंसल बिल्डर और यूपीसीडा से सोसायटी के आधे अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने के लिए पिछले 28 सालों से लड़ी जा रही लंबी लड़ाई अंजाम तक पहुंचती हुई नजर आ रही है। सोसायटी के रूके हुए विकास कार्यों पर लगभग 12 करोड खर्च किए जाएंगे।

यूपीसीडा ने कोर्ट के निर्देश के बाद अंसल बिल्डर के खिलाफ कड़ा रूख अपना लिया है। यूपीसीडा की ओर से अंसल बिल्डर को दो टूक कहा दिया गया है कि या तो सोसायटी का सम्पूर्ण विकास कार्य पूरा करके यूपीसीडा को सौंप दिया जाए। अथवा अंसल बिल्डर 11.64 करोड़ रूपया यूपीसीडा के पक्ष में जारी करे जिससे सोसायटी के अधूरे विकास कार्यों को जल्द से जल्द पूरा कराया जा सके। विकास कराया जा सके। बता दें कि हाई कोर्ट के निर्देश पर अंसल बिल्डर के प्रतिनिधि, यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक, वरिष्ठ प्रबंधक और प्रबंधक और अंसल गोल्फ लिंक हाऊसिंग सोसायटी के रेजिडेंट्स के बीच इस संबंध में काफी लंबी चर्चा हुई। यूपीसीडा के अधिकारियों ने अंसल बिल्डर के प्रतिनिधियों के साथ रेजिडेंट्स की उपस्थिति में सोसायटी का निरीक्षण भी किया।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, अंसल बिल्डर ने साल 1996 में तिलपता चौक के पास डेंसो कंपनी के पास स्थित जमीन को यूपीसीडा(तत्कालीन यूपीएसआइडीसी) ने अंसल बिल्डर को हाऊसिंग सोसायटी विकसित करने के लिए दिया था। यूपीसीडा और अंसल बिल्डर के बीच एक एमओयू साइन हुआ था। एमओयू के अनुसार अंसल बिल्डर आगामी पांच सालों में सोसायटी को पूरी तरह से विकसित करके यूपीसीडा को सौंपेकर सीसी और ओसी प्राप्त करेगा। लेकिन यूपीसीडा से हाऊसिंग सोसायटी विकसित करने के लिए जमीन आवंटित किए जाने के बाद एमओयू को भूल गया। बिल्डर द्वारा यहां अंसल गोल्फ लिंक-2 के नाम से हाऊसिंग सोसायटी बसाई। लोगों को सुन्दर सपने दिखाकर आधे अधूरे मूलभूत काम करके लोगों को यहां बसाया। मोटा मुनाफा कमाया लेकिन लोगों की मूलभूत सुविधाओं को पूरी तरह से भूल गया। पिछले 28 सालों में अंसल बिल्डर ने एक बार भी एमओयू को आगे बढ़ाए जाने की स्वीकृति यूपीसीडा से प्राप्त नहीं की। वहीं, सोसायटी में रह रहे लगभग 150 परिवार बदहाल सड़कों, पार्क, खस्ता हाल बिजली व्यवस्था, सीवर लाइन, पानी की सप्लाई और साफ सफाई जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सोसायटी के लोग 28 सालों से यूपीसीडा और अंसल बिल्डर के दरवाजे पर सोसायटी के आधे अधूरे विकास कार्यों को कराने के लिए दस्तक दे रहे हैं। लेकिन यूपीसीडा और अंसल बिल्डर एक दूसरे पर दोष मढ़कर अपनी जिम्मेवारियों से बचते रहे।
जिला प्रशासन ने अंसल बिल्डर के खिलाफ जार 11.64 करोड़ की आरसी
अंसल गोल्फ लिंक हाऊसिंग सोसायटी के एओए अध्यक्ष रहीस भाटी ने बताया कि रेजिडेंट्स ने इस संबंध में यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल शर्मा से इस बारे में बातचीत की। क्षेत्रीय प्रबंधक ने सोसायटी के संबंध में अंसल बिल्डर और यूपीसीडा के बीच हुए एमओयू के प्रावधानों का अध्यन किया। उन्होंने पाया कि अंसल बिल्डर ने यूपीसीडा और अंसल गोल्फ लिंक-2 हाऊसिंग सोसायटी के लोगों के साथ धोखा किया है। बिल्डर ने मनमाने तरीके से एमओयू के समझौते का उल्लंघन किया है। वहीं, गैर कानूनी तरीके से मेंटेनेंस चार्ज भी वसूला गया है। जबकि मेंटेनेंस चार्ज का एमओयू में प्रावधान है कि जब बिल्डर पूरी तरह से सोसायटी को पांच साल के अंदर विकसित करके यूपीसीडा को सौंप देगा, उसके बाद ही रेजिडेंट्स से मेंटेनेंस वसूला जाएगा। इसके बाद यूपीसीडा की रिपोर्ट पर जिला प्रशासन ने अंसल बिल्डर के खिलाफ 11.64 करोड़ की आरसी जारी कर दी। इसके बाद अंसल बिल्डर आरसी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गया।
यूपीसीडा ने अंसल हाऊसिंग को जमीन का बड़ा हिस्सा दिया था। अंसल सोसायटी को पांच सालों में सोसायटी को पूरी तरह से विकसित करके यूपीसीडा को सौंपना था। सोसायटी लोगों को भूखंड आवंटित करता रहा लेकिन तय शर्तों का पालन नहीं किया। विकास कार्यों के नाम पर आधा अधूरा काम किया। सेंक्शन स्टीमेट के अनुसार काम नहीं किया गया। अंसल गोल्फ लिंक-2 सोसायटी के लोगों की विकास कार्यों को लेकर यूपीसीडा से शिकायत की गई। यूपीसीडा ने पाया कि रेजिडेंट्स की शिकायत सही है। यूपीसीडा ने इसका मूल्यांकन कराया और पाया कि आधे सोसायटी के आधे अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए 11.64 करोड़ का खर्च आएगा। यह डिमांड असंल हाऊसिंग को दी गई। उससे कहा गया कि या तो आप यह विकास कार्य पूरा करें अथवा यूपीसीडा के पक्ष में यह रकम जारी करें जिससे रूके हुए विकास कार्य कराए जा सके। लेकिन अंसल हाऊसिंग के द्वारा न तो सोसायटी में विकास कार्य किया गया और न ही यह धनराशि यूपीसीडा के पक्ष में जारी की गई। इस क्रम में संबंधित अधिकारी को आरसी के माध्यम से अंसल हाऊसिंग से धनराशि वसूल के लिए पत्र लिखा गया। इस वसूली पत्र के विरोध में अंसल हाऊसिंग हाईकोर्ट चला गया। इस प्रकरण में हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि अंसल और यूपीसीडा की एक संयुक्त कमेटी पुन: 11.64 करोड़ की धनराशि के बजट का मूल्यांकन करे। इसी संबंध में अंसल गोल्फ लिंक-2 में यूपीसीडा के अधिकारियों और अंसल के प्रतिनिधियों के बीच विचार विमर्श किया गया है। सोसायटी के विकास पर होने वाले खर्च को मूल्यांकन किया जा रहा है।
—- अनिल शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीसीडा
अंसल बिल्डर ने हाईकोर्ट में बोला झूठ, अपने ही जाल में फंस गया बिल्डर
अंसल बिल्डर ने हाईकोर्ट में 11.64 करोड़ की आरसी के खिलाफ अपना पक्ष रखते हुए झूठा बोला। बिल्डर ने कहा कि सोसायटी में सभी विकास कार्य करा गए हैं। वहीं, बिल्डर ने कहा उल्टे रेजिडेंट्स पर मेंटेनेंस चार्ज जमा न करने की आरोप मढ दिया। हाईकोर्ट ने अंसल बिल्डर की बात बात सुनने के बाद यूपीसीडा को निर्देश दिया कि अंसल बिल्डर के साथ मिलकर अंसल गोल्फ लिंक हाऊसिंग सोसायटी का संयुक्त मौका मुआयना और निरीक्षण करें। इस संबंध में यूपीसीडा जल्द से जल्द कोर्ट को वास्तविक स्थिति से अवगत करा। विकास कार्यों की गुणवत्ता परखने का अधिकार यूपीसीडा को दिया गया। यूपीसीडा के अधिकारियों ने सोसायटी का सर्वे किया और पाया कि अंसल बिल्डर द्वारा कोर्ट में कही गई सभी बातें झूठ का पुलिंदा है। सोसायटी में सड़क, बिजली, सीवर लाइन, पार्क और पानी की सप्लाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोग नरकीय जीवन जी रहे हैं। यूपीसीडा ने सोसायटी में आधे अधूरे विकास कार्यों को सम्पन्न कराने के लिए अपने मानकों के अनुसार बजट तैयार किया। यह बजट 11.64 करोड़ है। मंगलवार को असंल बिल्डर प्रतिनिधि, यूपीसीडा के अधिकारियों और सोसायटी के लोगों के बीच एक बैठक हुई। इस बार बिल्डर अपने ही जाल में फंस गया।
अंसल बिल्डर प्रतिनिधियों ने एक बार फिर उठाया मेंटेनेंस चार्ज का मुद्दा, यूपीसीडा ने कहा यह एमओयू के खिलाफ
बैठक में सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अंसल बिल्डर प्रतिनिधियों ने एक बार फिर मेंटेनेंस चार्ज का मुद्दा उठाकर पूरे प्रकरण के लिए अंसल गोल्फ लिंक-2 के रेजिडेंट को दोषी ठहराने का प्रयास किय। बिल्डर प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले कई सालों से सोसायटी का मेंटेनेंस चार्ज हाऊसिंग सोसायटी के लोगों ने जमा नहीं किया है। यह लगभग 40 करोड़ है। यदि सोसायटी के लोग यह रकम चुका दें तो बिल्डर सोसायटी के रूके हुए विकास कार्यों को पूर्ण करा देगा। इस पर यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल शर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब अंसल बिल्डर ने एमओयू के किसी भी क्लॉज का पालन नहीं किया। सोसायटी को विकसित करके यूपीसीडा को सौंपकर अभी तक सीसी और ओसी प्राप्त नहीं किया। ऐसे में रेजिडेंटस से मेंटेनेंस वसूलने का उसको अधिकार नहीं है। यदि बिल्डर ने मेंटेनेंस वसूला है तो यह पूरी तरह से गैरकानूनी है। अनिल शर्मा ने कहा कि बिल्डर कोर्ट को लिखित में बताए कि सोसायटी के विकास वह स्वयं कराएगा अथवा विकास कार्यों पर खर्च होने वाला 11.64 करोड़ रूपया यूपीसीडा को सौंपेगा। उन्होंने अंसल बिल्डर को विकास कार्यों पर होने वाले खर्च का मद वार ब्योरा उपलब्ध करा दिया। बैठक में बिल्डर प्रतिनिधियों ने बार बार मेंटेनेंस चार्ज का राग अलावा। इसके जवाब में सोसायटी के महासचिव राजेश बैरागी ने स्पष्ट कह दिया कि अब किसी भी गैरकानूनी बात पर चर्चा नहीं होगी। केवल बिल्डर यह तय करें कि सोसायटी के विकास कार्यों को वह स्वयं पूरा करेगा अथवा यूपीसीडा को इसके लिए आवश्यक बजट उपलब्ध कराएगा। बाद में अंसल बिल्डर के प्रतिनिधियों ने माना कि उनसे एमओयू के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। वह सोसायटी के विकास कार्यों को कराने के लिए तैयार हो गए।