अखिलेश यादव ने दिया ऐसा राजनीतिक जख्म, लंबे समय तक भुला नहीं सकेगी भाजपा, जानिए क्या है पूरा मामला ?
Akhilesh Yadav gave such a political wound that BJP will not be able to forget it for a long time, know what is the whole matter?

Panchayat 24 : लोकसभा चुनाव परिणाम का अनुभव भाजपा के लिए सुखद नहीं रहा है। हालांकि हार और जीत राजनीति का हिस्सा है। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों से मीडिया के एग्जिट पोल को झूठा साबित कर दिया। वहीं, उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम ने भाजपा को जमीन पर पटक दिया है। अखिलेश यादव की सूझबूझ के से समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में लंबे समय बाद शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने एक सीट पर भाजपा को हराकर गहरा जख्म दिया है। यह हार भारतीय जनता पार्टी को लंबे समय तक कसकती रहेगी।
दरअसल, लोकसभा चुनाव में जाने से पूर्व भाजपा के पास कई दमदार मुद्दे थे। भाजपा को विश्वास था कि इन मुद्दों के सहारे वह आसानी से लोकसभा चुनाव में विपक्ष को पटखनी देकर तीसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार में वापसी करेगी। इन मुद्दों में धारा 370 और राम मंदिर सबसे बड़े मुद्दे थे। दिल्ली की सत्ता के लिए उत्तर प्रदेश की अहम भूमिका होती है। यहां पर कुल 80 लोकसभा सीटें हैं। साल 2019 में भाजपा ने इनमें से 62 सीटों पर कब्जा किया था। इस बार भी भाजपा को भरोसा था कि राम मंदिर और विकास कार्यों के भरोसे पार्टी साल 2019 के प्रदर्शन को असानी से दोहरा सकती है। चुनाव परिणाम के बाद भाजपा का यह दावा अतिविश्वास से भरा हुआ साबित हुआ। जहां पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा महज 33 सीटों पर सिमटकर रह गई। इससे न केवल भाजपा की सीटें कम हो गई हैं, बल्कि पिछले एक दशम में केन्द्र में सहयोगी दलों के दबाव में सरकार चलाने की स्थिति में आ गई है।
भाजपा द्वारा हारी गई सभी सीटों में अयोध्या वह सीट है जहां समाजवादी पार्टी ने भाजपा को हराकर गहरा जख्म दिया है। चुनाव पूर्व एवं चुनाव परिणाम आने से पूर्व राजनीतिक के पंडित इस बात को मानकर चल रहे थे कि अयोध्या में हुए राम मंदिर निर्माण के बाद लंबे समय तक न केवल अयोध्या में, बल्कि असापस की दर्जन भर सीटों पर भाजपा निकट भविष्य में अजेय बन गई है। इन सीटों पर विरोधी दलों के लिए बहुत अच्छी संभावनाएं रहीं बची है। लेकिन चुनाव परिणाम से सारे दावों को धूल में मिला दिया। अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने न केवल अध्योध्या के आसपास की कई अहम सीटों को भाजपा से झटक लिया है, वहीं, अयोध्या में भी भाजपा को करारी शिकस्त दी है।
अयोध्या में मिली भाजपा की हार इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है। जब जब राम मंदिर को याद किया जाएगा, राजनीतिक चर्चा में इस तथ्य पर भी अवश्य चर्चा होगी कि जिस राम मंदिर के नाम पर भाजपा ने 2 से 303 सीटों तक का सफर पूरा किया था। उसी राम मंदिर के निर्माण के बाद भाजपा न केवल उत्तर प्रदेश में बुरी तरह हारी। अयोध्या में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।