बिहार के लिए रोल मॉडल बने ग्रेटर नोएडा औद्ययोगिक विकास प्राधिकरण के सामने कई समस्याएं बनी चुनौती, समाधान पर सरकार क्यों है मौन ?

Panchayat 24 (ग्रेटर नोएडा) : ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण को बिहार राज्य अपने लिए रोल मॉडल मान रहे हैं, वही प्राधिकरण आज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्राधिकरण पर बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और नागरिक अपेक्षाओं का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा औद्ययोगिक विकास प्राधिकरण की वर्तमान समस्याओं से अनजान है ? क्या सरकार ने प्राधिकरण को उसकी दशा पर छोड़ दिया है ?
दरअसल, बिहार सरकार के शहरी विकास एवं आवास विभाग का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दौरे पर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य बिहार में प्रस्तावित औद्योगिक टाउनशिप के विकास के लिए ग्रेटर नोएडा औद्ययोगिक विकास प्राधिकरण मॉडल का गहन अध्ययन करना था। जमीन अधिग्रहण से लेकर आवंटन, नियोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की व्यावहारिक प्रक्रियाओं को समझना था।
प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रतिनिधिमंडल की विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक भूलेख विभाग, नियोजन विभाग, परियोजना विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह प्राधिकरण अपने संसाधनों के जरिए विकास कार्यों को गति देता है। प्रतिनिधिमंडल ने आईआईटीजीएनएल की इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप और ग्रेटर नोएडा का भ्रमण कर नियोजन व इंफ्रास्ट्रक्चर को बारीकी से अनुभव किया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ग्रेटर नोएडा औद्ययोगिक विकास प्राधिकरण के जिस मॉडल का बिहार सरकार के शहरी विकास एवं आवास विभाग ने अनुभव साझा किया वहाँ दशकों से किसानों की समस्याएं लंबित हैँ, अधिसूचित क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, जिनका फायदा भू-माफिया खुलेआम उठा रहे हैं। सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ रहा है, हाउसिंग सोसाइटियों और सेक्टरों में पानी, सीवर, सड़क और साफ-सफाई जैसी मूलभूत समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। प्राधिकरण एक समस्या का समाधान करता है तो दूसरी समस्याएं मुँह फाड़े खड़ी हो जाती हैँ। गंभीर एवं पेशेवर अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़े आभाव में शीर्ष अधिकारी भी लाचार दिखाई देते हैं।
स्थिति यह है कि अकेले भूलेख विभाग में ही बड़ी संख्या में एडीएम, एसडीएम और लेखपालों की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि जमीन से जुड़े विवादों, अतिक्रमण और अवैध प्लॉटिंग पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। कुछ इसी प्रकार की मानव संसाधनों की कमी सभी विभागों में व्याप्त है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि उत्तर प्रदेश सरकार ग्रेटर नोएडा औद्ययोगिक विकास प्राधिकरण की क्षमताओं के बेहतर उपयोग और उसे मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है? क्या ग्रेटर नोएडा सहित औद्ययोगिक विकास प्राधिकरण सरकारों के लिए महज राजस्व उगाही का जरिया मात्र बनकर रह वाई हैं ? यदि समय रहते मानव संसाधन और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत नहीं किया गया, तो जिस मॉडल को देश के अन्य राज्य अपनाने की तैयारी कर रहे हैं, वही मॉडल अपने ही क्षेत्र में समस्याओं, नई चुनौतियों तथा विकल्पहीनता के दबाव में होगा।
ग्रेटर नोएडा औद्ययोगिक विकास प्राधिकरण की प्रसंगिकता को बनाए रखने के लिए सरकार का गंभीर ध्यान और ठोस समर्थन अब अनिवार्य हो गया तो, अन्यथा काफी देर हो चुकी होगी।



