वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई से दुनिया पर छाए संकट के बादल, दुनिया विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रही है ?

Panchayat 24 (अंतर्राष्ट्रीय/स्पेशल स्टोरी) : संकट अमेरिका – वेनेजुएला संकट पर दो धडों में बंटी दुनिया को अमेरिका का कोई भी एक और कदम तीसरे विश्वयुद्ध की और बढ़ाएगी ? दूसरे ताकतवर देश भी पड़ोस के छोटे और कमजोर देशों पर कार्रवाई के लिए प्रेरित करेगा ? क्या छोटे और कमजोर देशों पर शक्तिशाली देशों की जरूरतों की पूर्ति करने वाली कॉलोनियां बन जाएंगी ?
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करके राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार करके न्यूयार्क पकड़कर न्यूयार्क लाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के अनुसार मादुरो पर ड्रैग्स तस्करी के आरोप में मुकदमा चलाया जाएगा। ट्रम्प ने घोषणा कर दी है कि जब तक वेनेजुएला में स्थिर और अमेरिकी समर्थक सरकार का गठन नहीं होता, अमेरिका ही देश चलाएगा। अमेरिका के वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई ने विश्व में उथल पुथल मचा दी है।
भले ही अमेरिका लोकतंत्र बहाली, मदुरों की तानाशाही से वेनेजुएला मानवाधिकारों की रक्षा या फिर ड्रैग्स तस्करी का तर्क पेश करे लेकिन सच्चाई सारी दुनिया भली भांति जानती है कि ट्रम्प ने यह कार्रवाई वेनेजुएला के अकूत तेल भंडार, रूस का समर्थन और वहाँ कम्युनिस्ट चीन की बढ़ती सक्रियता का परिणाम है। पूरी दुनिया में युद्ध रुकवाने का ढिंढोरा पीटने वाले ट्रम्प की नियत साफ कर दी कि कि अमेरिका किसी भी कीमत पर पड़ोस में विरोधी सरकार को सहन नहीं करेगा।
ट्रम्प की इस कार्रवाई ने दुनिया के कई देशों के सामने चिंता की लकीरें खींच दी है। रूस भी यूक्र्रेन पर हमले को तर्क संगत ठहराएगा। सबसे बड़ी चिंता ताइवान को लेकर है। वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई से गुस्साया चीन ताइवान पर कार्रवाई करके जहां अमेरिका से वेनेजुएला का बदला लेना चाहेगा और ताइवान पर कब्जे की अपनी इच्छा भी पूरी करना चाहेगा। अमेरिका ने जिस आधार पर वेनेजुएला पर कार्रवाई की है फिर वह किस आधार पर चीन की कार्रवाई का विरोध करेगा। यदि अमेरिका विरोध करेगा तो उसको दुनिया के सामने दो मोर्चों पर विरोध झेलना पड़ेगा। वहीं, अमेरिका का यह कदम विश्वयुद्ध की वजह भी बन सकता है।
द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व जिस प्रकार राष्ट्र संघ पंगु हो गया था, उसी प्रकार वर्तमान में दुनिया भर में मची उथल पुथल मची है, वह संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लगाती है। ऐसे में दक्षिण अमेरिका के उत्तर में कैरेबियन सागर तट पर स्थित वेनेजुएला में शुरु हुई नवउपनिवेशवाद कब्जाने की यह होड़ दुनिया को विश्वयुद्ध की आग में ही झोकेगी। प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष भारत भी इससे प्रभावित अवश्य होगा।



