श्रद्धांजलि : बॉलीवुड के एक युग का हुआ अंत, हर किसी के लिए धर्मेन्द्र बनना आसान नहीं होता
Tribute: An era in Bollywood has ended; it's not easy for everyone to be Dharmendra.

Panchayat 24 : बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता धर्मेन्द्र का 89 साल की उम्र मे निधन हो गया. वह हिन्दी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित, लोकप्रिय और बहुमुखी कलाकारों में से एक हैं। उनके जीवन में फ़िल्मी सफ़र, निजी संघर्ष, पारिवारिक जीवन, राजनीतिक करियर और सामाजिक पहलुओं के कई महत्वपूर्ण अध्याय शामिल हैं। उनका जाना हिंदी सिनेमा जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। शायद ही अब बॉलीवुड को कोई ही में मिले।
उन्होंने एक से बढ़कर एक शानदार फ़िल्म दी। कई रोमेंटिक, कॉमेडी, देशभक्ति तथा पारिवारिक फिल्मे दर्शकों के जहां मे हैं लेकिन एक्शन फिल्मों की उन्होंने परिभाषा ही बदल दी। शोले के बाद कई ऐसी फ़िल्में बनी जो पहाड़ी, डाकू, चम्बल और रेगिस्तानी पृष्ठभूमि पर आधारित थी। धर्मेंद्र अभिनीत फिल्मों की बात ही कुछ और थी। मेरा गांव मेरा देश, समाधि और बंटवारा कुछ ऐसी ही फ़िल्में हैं। उनकी कई फिल्मों के गाने सदाबहार है। उन्हें सुनना न केवल मन को ताजगी देता है, बल्कि बार बार सुनने को मन करता है।
लाखों करोड़ों प्रशांसकों की तरह मैं भी बचपन से धर्मेन्द्र का प्रसंशक रहा। बाल दर्शक के तौर पर वह मेरे सुपर हीरो थे। खूंखार विलन को जिस तरह वह चारों खाने चित करते थे, वाकई में यह बड़ा ही आनंद देने वाला क्षण होता था। छात्र जीवन से ही उनकी फ़िल्म लोफर मुझे पसंद है। पंजाब के एक किसान परिवार से निकलकर माया नगरी मे खुद को स्थापित करना उनके जीवन संघर्ष को बताता है। जब नृत्य फिल्मों का एक अहम हिस्सा बन चूका था ऐसे मे धर्मेंद्र का फ़िल्मी दुनिया का संघर्ष अधिक बड़ा था।
धर्मेंद्र बचपन से ही सिनेमा के दीवाने थे और दिलीप कुमार को अपना आदर्श मानते थे। 1958 मे फ़िल्म फेयर टेलेंट हंट पुरस्कार जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। 1960 में उनकी पहली फ़िल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे पर्दे पर आई। अपने जीवन मे उन्होंने लगभग 300 फिल्मों मे काम किया। उन्होंने कई नायिकाओं के साथ काम किया लेकिन हेमा मालिनी के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
हेमा मालिनी के साथ उनकी केमिस्ट्री इतनी हिट हुई कि बाद में उनसे धर्मेंद्र ने दूसरी शादी कर ली। निजी जीवन और पारिवारिक संबंधों में उन्होंने भली भांति संतुलन बनाकर रखा। उनका परिवार बॉलीवुड के उन परिवारों में से एक है जिन्होंने फ़िल्म जगत को बुलंदी पर पहुँचा। उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर के बेटे सनी देओल और बॉबी देओल तथा दूसरी पत्नी हेमा मालिनी की बेटी ईशा देओल ने भी अभिनय कि दुनिया में कदम रखा।
साल 2004 में वह भाजपा से जुड़े और बीकानेर से सांसद बने। सरकार ने उनके योगदान के लिए साल 2012 में पद्म भूषण सम्मान से नवाजा। जीवन के अंतिम पड़ाव में खेती और किसानी के प्रति उनका लगाव काफ़ी बढ़ गया था। एक किसान का बेटा होने के कारण कृषि और खेतीबाडी से उनके लगाव को समझा जा सकता है।



