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औद्योगिक भूमि लीज होल्‍ड के स्‍थान पर इज ऑफ डूइंग मैन्‍यूफैक्‍चरिंग के लिए फ्री होल्‍ड लागू करें सरकार : आईआईए

Government should implement free hold instead of lease hold for industrial land for ease of doing manufacturing: IIA

Panchayat 24 : औद्योगिक भूमि की लीज होल्‍ड नीति देश में अंग्रेजी शासन के दौरान गुलामी की निशानी है। यह जमींदारी का आधुनिक रूप है। लीज होल्‍ड के कारण उद्यमियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता हे। इससे औद्योगिक इकाइयों में न केवल उत्‍पादन प्रभावित होता है, बल्कि इनमें काम करने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं। यह बात इंडियन इंडस्‍ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) की ओर से ग्रेटर नोएडा चैप्‍टर के सभागार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कही गई। इस मौके पर संगठन से जुड़े सर्वजीत सिंह, विपिन महाना, बाबूराम भाटी, विशारद गौतम, जगदीश सिंह, विजय गोयल, जितेन्‍द्र सिंह राणा, जगदीश सिंह, गौरव मिंडा, नवीन गुप्‍ता, अशोक जैन एवं प्रदीप जैन आदि लोग उपस्थित थे।

आईआईए के ग्रेटर नोएडा अध्‍यक्ष राकेश बंसल ने कहा कि औद्योगिक लीज होल्‍ड में भूखंड उद्यमियों को 99 साल के पट्टे पर दी जाती है। इस नीति के  कारण उद्यमियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि यूपीसीडा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यीडा अथवा उद्योग निदेशालय द्वारा उद्यमियों को प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के आधार पर भूखंड आवंटित किया जाता है। वर्तमान में तकनीकी बदलावों और प्रतिस्‍पर्धा के कारण आवंटित औद्योगिक भूखंड पर कोई अन्‍य उत्‍पादन शुरू नहीं किया जा सकता है। बैंकों से आर्थिक सहायता प्राप्‍त करने के लिए भी भारी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है। बैंक लिमिट में कोई बदलाव करना हो या फिर बैंक बदलना हो, यह प्रक्रिया लीज होल्‍ड के कारण बहुत ही जटिल है। इतना ही नहीं यदि औद्योगिक भूखंड को अपने किसी परिवारजन को हस्‍तांतरण करना भी आसान नहीं है। इसके अतिरिक्‍त यदि औद्योगिक भूमि अथवा भवन को किसी को किराए पर देना हो, भूमि का अतिरिक्‍त हिस्‍सा जोड़कर औद्योगिक भूखंड का विस्‍तार करना हो या फिा कुछ हिस्‍सा औद्योगिक भूखंंड से अलग करना हो, यह प्रक्रिया आसान नहीं है।

आईआईए अध्‍यक्ष ने कहा कि औद्योगिक भूमि लीज होल्‍ड ने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा दिया है। उद्यमियों की फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल पर पहुंचने में काफी समय लगता है। लालफीताशाही हावी है। ऐसे में उद्यमियों को जिस कीमती समय का सदउपयोग करके औद्योगिक इकाइयों में गुणवत्‍तपूर्ण उत्‍पादन में लगाना चाहिए, वह समय सरकारी कार्यालयों के चक्‍कर लगाने में ही गुजारना पड़ता है। औद्योगिक इकाइयों में उत्‍पादन प्रभावित हो रहा है। नए रोजगारों का सृजन नहीं हो पा रहा है। राकेश बंसल ने कहा कि यह गुलामी के दौर का कानून है। प्रधानमंत्री गुलामी की हर निशानी को मिटा रहे हैं। ऐसे में देश में बेहतर कारोबारी माहौल के लिए औद्योगिक लीज होल्‍ड के स्‍थान पर फ्री होल्‍ड नीति को पूरे देश में लागू करें। उन्‍होंने यह भी कहा कि उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री के वन ट्रिलियन की अर्थव्‍यवस्‍था के सपने को पूरा करने में भी औद्योगिक भूमि फ्री होल्‍ड की नीति कारगर साबित होगी। उन्‍होंने कहा कि फ्री होल्‍ड नीति के लागू करने से उत्‍तर प्रदेश इज ऑफ डूइंग के साथ इज ऑफ डूइंग मैन्‍यूफैक्‍चरिंग के रूप में नई पहचान मिलेगी। राकेश बंसल ने कहा कि लीज होल्‍ड कानून के बदलाव को लेकर कुछ आशंकाएं सरकार के मन में हो सकती हैं। ऐसे में सशर्त फ्री होल्‍ड कानून बनाया जा सकता है।

बता दें कि अभी तक देश में औद्योगिक भूमि लीज होल्‍ड के स्‍थान पर  फ्री होल्‍ड नीति को कर्नाटका, पश्चिम बंगाल, दिल्‍ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और तमिलनाडू में लागू किया जा चुका है। वहीं, उत्‍तर प्रदेश में भी साल 2016 में इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन आज तक कोई परिणाम नहीं निकला। उत्‍तर प्रदेश के उद्यमियों ने इसके लिए एक मुहिम शुरू की है। आईआईए ने दूसरे संगठनों के साथ मिलकर जनप्रतिनिधियों और शासन स्‍तर पर वरिष्ठ अधिकारियों एवं मंत्रियों से मिलकर लीज होल्‍ड औद्योगिक भूमि को फ्री होल्‍ड किए जाने के लिए अपना पक्ष रखा है तथा ज्ञापन भी सौंपे हैं।

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