संपादकीय : हरियाणा में सत्ता जाने का भय कहे या फिर से सत्ता पाने की रणनीति, सच्चाई से मुंह मोड रही है भाजपा
Editorial: Call it fear of losing power in Haryana or a strategy to regain power, BJP is turning away from the truth

Panchayat 24 : हरियाणा विधानसभा चुनाव इस बार विशेष होने जा रहा है। विशेष इस लिए कह रहा हूं कि इस चुनाव में मुख्य प्रतिद्वंदी राजनीतिक दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुए किसान आन्दोलन के कुछ अहम तथ्य और सत्य को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। इस विषय पर कांग्रेस का स्टैण्ड समझ में आता है। लेकिन भाजपा भी इस विषय पर चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में सवाल उठता है कि सत्य और तथ्य की हरियाणा चुनाव में कोई अहमियत नहीं है ? क्या हरियाणा में भाजपा सत्य को मजबूती से प्रस्तुत करने में खुद को असहाय महसूस कर रही है ?
दरअसल, तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुए किसान आन्दोलन का कांग्रेस और अन्य भाजपा विरोधी दलों द्वारा लगातार विरोध किया गया था। आन्दोलन के दौरान किसानों की आड़ में ऐसी घटनाएं घटी जिनका किसान और किसान आन्दोलन से दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं था। देश की सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों ने किसान आन्दोलन की आड़ में देश विरोधी ताकतों के सक्रिय होने की भी रिपोर्ट दी थी। सरकार को इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था।
किसान का मुद्दा देश की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। किसान आन्दोलन को लेकर विपक्ष पूरे देश में भाजपा के खिलाफ किसान विरोधी माहौल बनाने में कामयाब रहा है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ा है। लाख प्रयासों के बावजूद विपक्ष द्वारा बनाए गए नेरेटिव को तोड़ने में भाजपा नाकाम ही साबित हुई है। यही कारण है कि भाजपा मुद्दे से बचना चाहती है। सांसद कंगना रनौत द्वारा किसान आन्दोलन के दौरान हुई घटनाओं का पर दिए गए बयान से पार्टी दोनों से पल्ला झाड रही है। यहां तक कि महिला सांसद को इस मामले पर चुप रहने की सलाह दी गई है। बता दें कि कंगना रनौत ने किसान आन्दोलन को लेकर एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि किसान आन्दोलन के दौरान हत्या हुई और बलात्कार हुआ था।
हरियाणा चुनाव में कांग्रेस किसानों के मुद्दे को लेकर भजपा के खिलाफ लोकसभा चुनाव में बने माहौल को किसी भी कीमत पर हरियाणा विधानसभा चुनाव में कमजोर नहीं पड़ने देना चाहती है। भजपा भी समझ चुकी है कि चुनाव में यह मुद्दा नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाजपा स्वीकार कर चुकी है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में किसानों का मुद्दा उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है ? इसी लिए कंगना रनौत द्वारा कही गई सच्चाई के बावजूद पार्टी ने उन्हें चुप करा दिया है? इसको भाजपा का हरियाणा में सत्ता खोने का भय कहे या फिर से सत्ता हासिल करने की रणनीति कि किसानों के मुद्दे पर पार्टी अपनी ही महिला सांसद का साथ छोड़ दिया है।
कंगना रनौत के बयान को लेकर राजनीतिक दलों का अपने राजनीतिक लाभ हानि के हिसाब से नजरिया हो सकता है। लेकिन यह सत्य है कि कंगना रनौत के बयान में सच्चाई है। पूरे देश ने देखा था कि किस तरह से दिल्ली के शंभु बार्डर पर किसान आन्दोलन के दौरान एक युवक को तलवारों से काटकर लटकाया गया था। किसान आन्दोलन में शामिल होने आई एक महिला का बलात्कार किया गया था। 26 जनवरी के दिन किसान आन्दोलन के नाम पर दिल्ली की सड़कों पर किस तरह से अराजकता का नंगा नाच नाचा गया था ? लाल किले पर तिरंगे का अपमान किया गया था ? हाल ही में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के बयान ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि भले ही राजनीतिक दल कंगना रनौत के बयान को राजनीतिक लाभ हानि के लिए प्रयोग कर रहे हो, लेकिन उसके बयान में सच्चाई है।
इस पूरे प्रकरण में कांग्रेस का स्टैण्ड एकदम साफ है कि वह बिना किसी लाग लपेड़ के किसान आन्दोलन में घटी हर घटना का समर्थन करती है। ऐसे में सवाल तो भाजपा से ही पूछा जाएगा कि कंगना रानौत ने किसान आन्दोलन में घटी घटना के बारे में वही सच्चाई तो कही है जिसका जिक्र भाजपा लोगों के सामने करती रही है। जिसको पूरे देख ने अपनी खुली आंखों से देखा है। हरियाणा चुनाव करीब आते ही किसान आन्दोलन के दौरान हुई हिंसा, हत्या और बलात्कार की घटना पर भाजपा डर गई है ? किसान आन्दोन की इन घटनाओं को विपक्ष का राजनीतिक एजेंडा या फिर भाजपा की चुप्पी महत्वपूर्ण नहींं है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि राजनीतिक दल कंगना रनौत के बयान के बारे में क्या सोचते है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हरियाणा की जनता इस बारे में क्या सोचती है ?