सेक्टर-150 हादसा : नोएडा प्राधिकरण में सर्दी में गर्मी का अहसास और हंसते हुए पसीना पौंछ रहे हैं लोग
Sector-150 accident: The Noida Authority is feeling the heat in the middle of winter, and people are wiping away sweat while laughing

डॉ. देवेन्द्र कुमार शर्मा
Panchayat 24 (नोएडा) : नोएडा सेक्टर-150 में युवा इंजीनियर युवराज की असमय मौत ने वक्त, हालात और माहौल को तेजी से बदल दिया है। इस हादसे के बाद बदला हुआ माहौल नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में साफ़ तौर पर महसूस किया जा सकता है। एसआईटी जांच पूरी होने तक मौन साधे बैठे प्राधिकरण में गणतंत्र दिवस के बाद धीरे-धीरे सामान्यता लौटती दिखाई दे रही है।हालांकि यह “सामान्यता” कितनी वास्तविक है, यह अब भी एक खुला प्रश्न है।
इस बीच हालात को संभालने के लिए प्राधिकरण के नए सीईओ कृष्णा करूणेश ने कमान स्वयं संभाली है। शहर और गांवों की साफ-सफाई, जल निकासी, सीवर व्यवस्था तथा संवेदनशील स्थलों पर तेज़ी से काम कराने के लिए उन्होंने संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह पहल जनता के बीच भरोसा बहाल करने की एक स्पष्ट कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
दूसरी ओर, पूरे प्राधिकरण की निगाहें एसआईटी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। सेक्टर-150 की दर्दनाक घटना के दोषियों को लेकर जनता जवाब चाहती है, जबकि प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एक अघोषित बेचैनी पसरी हुई है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष होगा, यह भले किसी को न पता हो, लेकिन जांच का फंदा आखिर किसके गले में पड़ेगा—यह सवाल ठंड के मौसम में भी माहौल में गर्मी पैदा कर रहा है और लोग इसको सामान्य बताकर माथे से पसीना पौंछ रहे हैं।
बंद कमरों में गुप्त एवं लंबी चर्चाएं चल रही हैं। हादसे की जिम्मेदारी किस पर तय होगी ? किसकी चूक कितनी भारी पड़ेगी ? और एसआईटी की गाज आखिर किसके सिर गिरेगी? इन सवालों ने हर चेहरे पर अनकहा तनाव उकेर दिया है। कहीं जंगल में लगी इस आग की लपटें अपने आंगन तक न पहुंचें, इसके लिए लखनऊ तक परिक्रमा शुरू हो चुकी है। विचारधाराओं में दूरी रखने वाले लोग भी इस समय एक-दूसरे के साथ विचार विमर्श कर भावनात्मक संबल देते दिखाई दे रहे हैं।
इसी बदले हुए माहौल में श्रेष्ठताबोध से ग्रस्त कुछ चेहरे भी चौंकाते हैं। जो कल तक लोगों से दूरी बनाए रखते थे, वे आज दूर से ही मुस्कराकर हालचाल पूछते हैं और अपने अंदाज़ में “ऑल इज़ वेल” का संकेत देने की कोशिश करते हैं। लेकिन जैसे कोई वस्त्र आग और पानी की प्रकृति को नहीं ढक सकता, वैसे ही बनावटी आचरण से मन के भीतर चल रहे द्वंद्व को छिपाना आसान नहीं होता। चेहरे बहुत कुछ कह जाते हैं।
एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक भले ही प्राधिकरण का हर अधिकारी अपने मन में कार्रवाई का ठीकरा किसी और के सिर फूटता हुआ देख रहा हो, लेकिन दिल के किसी कोने में यह आशंका भी जरूर पल रही है कि कहीं कार्रवाई की बिजली उसके ही आंगन में न गिर पड़े। यही भय और यही अनिश्चितता आज नोएडा प्राधिकरण के तथाकथित सामान्य होते माहौल की असल कहानी बयान कर रही है।



