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यूपी के हाईटेक शहर नोएडा और ग्रेटर नोएडा का काला सच यह भी है, जानकर रह जाएंग हैरान, जानिए क्‍या है पूरा मामला ?

This is also the dark truth of UP's high-tech cities Noida and Greater Noida, you will be shocked to know, know what is the whole matter?

Panchayat 24 : एक कहावत बहुत ही मशहूर है कि एक सिक्‍के के दो पहलू होते हैं। दोनों पहलू सिक्‍के की अलग अलग कहानी बयां करते हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति उत्‍तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बना चुके गौतम बुद्ध नगर जिले की है। इस इन शहरों ने विश्‍व पटल पर अपने औद्योगिक विकास, तेजी से होते नगरीकरण और विश्‍व स्‍तरीय इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यही कारण है कि देश भर के लोग नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अपने सपनों का एक आशियाना बनाना चाहते हैं। उत्‍तर प्रदेश सरकार इन शहरों के विकास मॉडल को देश और दुनिया में उत्‍तर प्रदेश के विकास मॉडल के रूप में पेश कर रही है। लेकिन इन शहरों का भी एक पहलू हैं जो इनकी स्‍याह सच्‍चाई को बयां करती है। हालांकि दोनों शहरों में यह पहलू काफी लंबे समय से चला आ रहा है। लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने इसकी गंभीरता को उजागर कर दिया है।

क्‍या है पूरा मामला ?

दरअसल,  रियल एस्‍टेट के क्षेत्र में काम करने वाली रियल एस्‍टेट डाटा विश्‍लेषण फर्म प्रॉपइक्विटी ने उत्‍तर प्रदेश के प्रॉपर्टी बाजार को लेकर एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में उत्‍तर प्रदेश के पांच शहरों के रियल एस्‍टेट बाजार की प्रॉपर्टी बाजार का विश्‍लेषण डाटा पेश किया है। इसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा को लेकर चौकानें वाली बातें सामने आई है। यह बातें नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आम आदमी और फ्लैट खरीददारों की समस्‍या को बयां करती है।

रियल एस्‍टेट डाटा विश्‍लेषण फर्म प्रॉपइक्विटी ने अपनी रिपोर्ट में लखनऊ, आगरा, गाजियाबाद और नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा के रियल एस्‍टेट बाजार का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन शहरों में 378 आवासीय परियोजनाएं अटकी हुई हैं। इन 378 परियोजनाओं में 145880 इकाइयां शामिल हें। इनमें 1.16 लाख से अधिक घर नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में शामिल हैं। ग्रेटर नोएडा में 167 परियोजनाएं रूकी हुई हैं जिनमें 74645 इकाइयां हैं। नोएडा में 103 आवासीय परियोजनाएं रूकी हुई हैं जिनमें 41438 इकायां हैं। वहीं, गाजियाबाद में 15278 इकायों के साथ 50 परियोजनाएं रूकी हुई हैं। इसके अतिरिक्‍त लखनऊ में 48 परियोजनाओं में 1304 इकाइयां अटक गई हैं।  जबकि आगरा में 10 परियोजनाओं में कुल 1495 इकाइयां रूकी हुई हैं।

इस रिपोर्ट ने पिछले लगभग 15 सालों से नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अपने सपनों के घर की लड़ाई लड़ने वाले फ्लैट खरीददारों की समस्‍या पर भी प्रकाश डाला है। रिपोर्ट से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में अपने सपनों के घर के लिए संघर्ष करने वाले फ्लैट खरीददारों को फिलहाल कामयाबी मिलती हुइ नहीं दिख रही है।

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