आखिर कब समाप्त होगा किसानों का इंतजार? कलेक्ट्रेट के घेराव के बाद वार्ता के बाद जिलाधिकारी ने मांगा 10 जुलाई तक का समय
When will the wait of the farmers end? After the talks following the siege of the Collectorate, the District Magistrate asked for time till July 10

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर के किसान अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर आन्दोलन की राह पर बढ़ रहे हैं। बीते बुधवार को 40 गांवों के किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इस दौरान किसानों और उपस्थित पुलिसकर्मियों के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई। किसान बेरिकेटिंग तोड़कर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंंच गई। किसान जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गए। शाम को किसानों के 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल और जिलाधिककारी के बीच वार्ता शुरू हुई। वार्ता के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा आगामी 10 जुलाई का समय मांगा है। किसानों ने चेतावनी दी है यदि उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो वह आन्दोलन का रास्ता अपनाएंगे। इस पूरे प्रकरण से एक बात फिर स्पष्ट हो गई है कि किसानों की समस्याओं के अन्तहीन सफर का अंत अभी दिखाई नहीं दे रहा है। देखना है कि 10 जुलाई के बाद किसानों की मांगों को लेकर कितने गंभीर प्रयास किए जाते हैं।
क्या है पूरा मामला ?
अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष रूपेश वर्मा ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर गजराज सिंह नागर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर विचार करते हुए कोर्ट ने किसान के पक्ष में 10 प्रतिशत विकसित भूखण्ड और 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद गजराज सिंह नागर की याचिका से संबंधित किसानों को इस आदेश का लाभ जरूर मिला। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे किसान इस लाभ से वंचित रह गए। हाईकोर्ट ने इन किसानों का मामला ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के विवेक पर छोड़ दिया था। हालांकि प्राधिकरण ने अतिरिक्त मुआवजे का लाभ गैर याची किसानों को जरूर दिया लेकिन विकसित भूखंड का लाभ इन किसानों को आज तक नहीं मिल सका है। किसानों ने भूखण्ड का लाभ पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले राजस्व विभाग के चैयरमेन की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी का गठन किया था। मण्डलायुक्त और जिलाधिकारी इस कमेटी के सदस्य हैं। इस कमेटी को निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण तीरके से मामले पर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी हैं। लेकिन हाई पावर कमेटी ने अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है।
क्या है किसानों की मांगें ?
रूपेश वर्मा के अनुसार भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को लंबे समय से न्यायपूर्ण तीरके से विकसित भूखण्ड एवं अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने की मांग की जा रही है। सरकार ने विषय पर विचार करने के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया है। लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी हाई पावर कमेटी ने सरकार के पास अपनी सिफारिशें नहीं भेजी है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग है कि गैर याची किसानों को अतिरिक्त 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और 10 प्रतिशत विकसित भूखण्ड़ सभी किसानों को दिया जाए। लगभग ढाई लाख किसान इस लाभ से वंचित हैं। इसके अतिरिक्त साल 2013 में लागू किए गए नए भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर किसानों की जमीन का चार गुना मुआवजा, 20 प्रतिशत विकसित भूखण्ड और परिवार के एक बालिक सदस्य को रोजगार अथवा इसकी एवज में 5.5 लाख रूपये प्रति परिवार दिए जाएं।
किसानों ने दी आर पार की लड़ाई की चेतावनी
सुखबीर खलीफा ने एनटीपीसी के किसानों के बारे में बोलते हुए कहा कि एनटीपीसी के किसानों से किए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं जिन्हें तुरंत पूरा किया जाए। सुनील फौजी ने कहा आज का धरना प्रदर्शन इस तौर पर ऐतिहासिक है कि सभी अधिग्रहण करने वाली एजेंसीयों के बाबत एक कमेटी मुख्यमंत्री ने गठित की है जिसे किसानों की सभी समस्याओं के संबंध में अपनी सिफारिशें देनी हैंं। किसान आगाह करना चाहते हैं कि यदि किसानों के पक्ष में सिफारिशें नहीं दी गई तो तीनों प्राधिकरणों के गेट बंद कर दिए जाएंगे। किसान आन्दोलन को लखनऊ एवं दिल्ली की सीमाओं में ले जाया जाएगा।