डीसीएम-देवू मोटर्स मामले में यूपीसीडा की जीत : नियमों के उल्लंघन के कारण बंद पड़ी कंपनी का 204 एकड़ का भूखंड पुन: किया हासिल
UPSIDA's big victory: 204 acre plot of DCM company which was closed due to violation of rules was reclaimed

Panchayat 24 : यूपीसीडा के खाते में बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। डेवू मोटर्स के बंद होने के बाद कंपनी को आईसीआईसीआईसीआई बैंक ने अपना बैंक ऋण चुकाने के लिए निजी संस्थान को बेच दिया। कंपनी पर यूपीसीडा का सात अरब रूपये का बकाया था। ऐसे में आईसीआईसीआई द्वारा यूपीसीडा से बिना अनुमति लिए ही कंपनी को निजी संस्थान को बेचा गया था। मामला ऋण वसूली न्याधिकरण (डीआरटी) में पहुंचा। यहां यूपीसीडा और आईसीआईसीआई ने अपना अपना पक्ष रखा। यूपीसीडा को मामले में उम्मीद के अनुरूप राहत नहीं मिली। यूपीसीडा बोर्ड ने डेवू के 204 एकड़ भूखंड का आवंटन निरस्त कर लीज डीज निरस्त कर भूखंड पर कब्जा कर लिया है। वर्तमान में इसकी बाजार कीमत लगभग 12 अरब रूपये बताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, साल 1982 में यूपीसीडा (यूपीएसआईडीसी) ने डीसीएम टोयटा को 204 एकड़ जमीन का आवंटन किया था। कंपनी ने जापाान की टोयोटा कंपनी के साथ मिलकर यहां छोटे मिनी ट्रकों का उत्पादन शुरू किया था। दिल्ली क्लाथ मिल (डीसीए) और टोयटा के इस संयुक्त उपक्रम ने ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री के क्षेत्र में बड़ी क्रांति ला दी। कंपनी से साल 1989 में यूपीसीडा की अनुमति से निजी बैंक आईसीआईसीआई से ऋण लिया था। कंपनी की शानदार शुरूआत के बावजूद आगामी एक दशक में ही कंपनी के दोनों हिस्सेदारों के बीच कुछ विषयों पर मतभेद उभरकर सामने आ चुके थे। कंपनी के दोनों हिस्सेदारों डीसीएम और टोयोटा के बीच के इन मतभेदों का कंपनी की नीतियों पर पड़ा। परिणामस्वरूप कंपनी का दक्षिण कोरिया की बड़ी ऑटो मोबाइल कंपनी डेवू मोटर्स द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया। डेवू मोर्टस ने यहां लग्जरी कार सीएलो और आम आदमी की पहुंच की छोटी कार मतिज का निर्माण शुरू किया। बाजार में कंपनी की दोनों कारों का प्रदर्शन खराब रहा। दूसरी ओर 1 नवंबर 1999 को दक्षिण कोरिया में डेवू मोटर्स दिवलिया घोषित कर दिया गया। परिणामस्वरूप कंपनी बंद हो गई।
पान इंडिया मोटर्स कंपनी द्वारा साल 2008 में डेवू मोटर्स का अधिग्रहण कर लिया था। हालांकि भारत में इस कंपनी ने साल 2003-04 में ही अपने कारोबार को बंद कर दिया था। कंपनी पर बैंकों का ऋण बकाया था। इसको चुकाने के लिए डेवू मोटर्स इंडिया लिमिटेड की सम्पत्ति को नीलाम करके डीआरटी मुम्बई ने 2,250 करोड़ रूपये की वसूली का लक्ष्य रखा था। ई-नीलामी के पहले चरण में कंपनी की ग्रेटर नोएडा घंटा चौक स्थित 204 एकड़ जमीन की नीलामी में कंपनी की इमरातों और अन्य चीजों को शामिल करके न्यूनतम आरक्षित कीमत 528.61 करोड़ की वसूली निर्धारित की गई। इसके अतिरिक्त सबसे बोली लगाने वाले को यूपीसीडा का बकाया भी चुकाना था।
सात अरब रूपये के बकाए के चलते हुई यूपीसीडा की एंट्री
डेवू मोटर्स पर यूपीसीडा का स्वामित्व परिवर्तन तथा लीज रेंट सहित कई मदों का कुल सात अरब रूपयों का बकाया था। प्रमोर्टस द्वारा यूपीसीडा के बकाए को चुकाए बिना ही कंपनी की नीलामी की तैयारी शुरू कर दी थी। इस बीच निजी बैंक आईसीआईसीआई ने बिना अनुमति लिए ही अपने यहां बंधक डेवू मोटर्स को बिना अनुमति लिए ही निजी वित्तीय संस्थान आरसिल को बेच दिया। मामला मुम्बई स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) पहुंच गया। यूपीसीडा ने कंपनी पर अपने बकाए के लिए मजबूती से अपना पक्ष रखा और आईसीआईसीआई बैंक द्वारा कंपीन को आरसिल को बेचे जाने का न्यायाधिकरण में विरोध किया।
गौतम बुद्ध नगर के वरिष्ठ पत्रकार राजेश बैरागी के अनुसार मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर माहेश्वरी के निर्देश पर क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुमार शर्मा ने मामले में यूपीसीडा का पक्ष रखा। परंतु डीआरटी से अपेक्षित राहत मिलती न देख यूपीसीडा द्वारा लीज डीड में वर्णित शर्तों का मंथन किया गया। डीसीएम टोयोटा को की गई लीज डीड और स्वामित्व परिवर्तन के बाद बनी डीसीएम देवू की शर्तों तथा आईसीआईसीआई बैंक को बंधक रखने के लिए तय की गई शर्तों के गहन अध्ययन के बाद यूपीसीडा बोर्ड ने अपनी 46वीं बैठक में 23 जुलाई 2024 को इस इकाई को आवंटित 204 एकड़ के भूखंड का आवंटन निरस्त करने का निर्णय लिया। बोर्ड के निर्णय के अनुपालन में क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा उक्त भूखंड संख्या ए-1, औद्योगिक क्षेत्र सूरजपुर साइट-ए का आवंटन निरस्त करने,लीज डीड भंग करने के साथ ही भूखंड का भौतिक कब्जा भी प्राप्त कर लिया गया।
निजी वित्तीय संस्थान आरसिल इस भूखंड को गलत तथ्यों के आधार पर मात्र तीन चार अरब में हासिल करने की कोशिश कर रहा था। स्वयं यूपीसीडा ने उसके ऋण के भुगतान के लिए अपने ही भूखंड को ऊंची बोली देकर नीलामी में खरीदने का प्रस्ताव दिया था परंतु खराब नीयत के चलते यूपीसीडा के प्रस्ताव की अनदेखी की गई।
—— क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीसीडा अनिल कुमार शर्मा