ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

ग्रेटर नोएडा में पेट रजिस्‍ट्रशन शुल्‍क समाप्‍त, रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य, शिकायत मिलने पर लगेगा जुर्माना

Pet registration fee abolished in Greater Noida, registration will be mandatory, fine will be imposed on receiving complaint

Panchayat 24 : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपनी 135वीं बोर्ड बैठक में संशोधित पेट रजिस्‍ट्रेशन पॉलिसी को मंदूरी दे दी है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पेट रजिस्ट्रेशन जल्द शुरू करने जा रहा है। पूर्व में अनुमोदित पॉलिसी में नागरिकों, आरडब्ल्यूए अथवा एओए और एनजीओ आदि से प्राप्त सुझावों को सम्मिलित करते हुए बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखा गया था। शुक्रवार को बोर्ड ने इसको स्वीकार कर लिया है। संशोधित पॉलिसी के अनुसार अब पेट रजिस्ट्रेशन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तीन माह के बजाय साल भर चलती रहेगी, लेकिन अगर किसी ने पेट रजिस्टर्ड होने की शिकायत की तो उसकी जांच कर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

ग्रेटर नोएडा में क्‍यों पड़ी पेट रजिस्‍ट्रेशन पॉलिसी की आवश्‍यकता ?

बता दें कि पिछले कुछ सालों में ग्रेटर नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा वेस्‍ट की हाऊसिंग सोसायटियों में कुत्‍तों को लेकर काफी विवाद रहा है। कई सोसायटियों में कुत्‍तों ने सोसाय‍टी के लोगों पर गंभीर रूप से हमला कर घायल कर दिया था। कई ऐसे भी मामले सामने आए जब पालतू कुत्‍तों को लिफ्ट से लाने और ले जाते समय कुत्‍तों ने लोगों को अपना शिकार बनाया था। इसको लेकर ग्रेटर नोएडा की हर सोसायटी दो भागों में बंटी हुई दिखाई दी। लोगों का एक वर्ग सोसायटी में कुत्‍तों के प्रवेश को लेकर नाराज था अथवा कुत्‍ता पालन के लिए प्रतिबंध लगाए जाने का समर्थन करता रहा है। वहीं, एक वर्ग कुत्‍ता पालने का समर्थक रहा है। इन विवादों के चलते कई बार पुलिस को भी हस्‍तक्षेप करना पड़ा था। कई मामलों में मुकदमें भी दर्ज किए गए हैं।

प्राधिकरण ने पेट रजिस्‍ट्रेशन पॉलिसी को स्‍वीकृत करते हुए कहा है कि पेट को सर्विस लिफ्ट से ही ले जाया जाएगा। यदि लिफ्ट मेें कोई व्यक्ति पहले से है तो पेट के साथ दूसरा व्यक्ति नहीं जाएगा। इसके अतिरिक्‍त यदि लिफ्ट मेंं कोई व्यक्ति पहले से अपने पेट के साथ है तो दूसरा व्यक्ति नहीं जाएगा। हालांकि अगर आपस में सहमति है तो दोनों साथ में लिफ्ट से जा सकते हैं। इसके अलावा एओए अथवा आरडब्ल्यूए और वहां के निवासी मिलकर पेट फीडिंग प्वाइंट चिंहित करेंगे। एनजीओ की मदद से पीपीपी मॉडल के आधार पर एक शेल्टर होम बनाया जाएगा। इसके लिए जमीन प्राधिकरण देगा और इसका संचालन संबंधित एनजीओ के जिम्मे होगा।

Related Articles

Back to top button