दादरी विधानसभा

अखिलेश यादव के जन्‍मदिवस पर विशेष : समाजवादी पार्टी की जीत पर गौतम बुद्ध नगर के सपाईयों का जश्‍न कब तक ?

Special on Akhilesh Yadav's birthday: How long will Gautam Buddha Nagar's Samajwadi Party workers continue celebrating the party's victory?

Panchayat 24 : समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव के बाद देश और प्रदेश की राजनीति की ध्रुरी बनकर उभरे हैं। उनके नेतृत्‍व में पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। उनके नेतृत्‍व ने पूरे प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरा है। सोमवार को देश भर के अखिलेश यादव के समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनका जन्‍मदिन मनाया। गौतम बुद्ध नगर में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला पार्टी कार्यालय पर अखिलेश यादव का जन्‍मदिन मनाया। कार्यकर्ताओं ने लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्‍व में समाजवादी पार्टी की ऐतिहासिक जीत का जश्‍न भी मनाया। ऐसे में यहां, सवाल पैदा होते हैं कि उत्‍तर प्रदेश में कन्‍नौज और अयोध्‍या सहित भाजपा की मजबूत माने जाने वाली सीटों पर समाजवादी पार्टी की दमदार जीत पर गौतम बुद्ध नगर समाजवादी पार्टी कब तक जश्‍न मनाती रहेगी ? गौतम बुद्ध नगर में प्रदेश की सबसे बुरी पराजय से समाजवादी पार्टी की जिला इकाई कब तक नजर चुराती रहेगी ? गौतम बुद्ध नगर में हर चुनाव में पार्टी की पराजय के बाद जिले के वरिष्‍ठ समाजवादी पार्टी नेता हार के कारणों की समीक्षा की बात कहते जरूर हैं, लेकिन अगले चुनाव में परिणाम ढाक के तीन पात अर्थात एक और हार परिणाम के रूप में सामने आकर खड़ी हो जाती है।

अखिलेश यादव से भी सीख नहीं लेते गौतम बुद्ध नगर के समाजवादी पार्टी के नेता

अखिलेश यादव साल 2012 में देश के सबसे बड़े सूबे उत्‍तर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने थे। हालांकि पूर्व की मायावती सरकार के दौरान प्रदेश भर में साईकिल यात्रा करके उन्‍होंने समाजवादी पार्टी और प्रदेश में अपनी जगह बना ली थी। शायद यही कारण था कि मुलायम सिंह ने बेटे को अपनी राजनीतिक विरासत सौंप दी। इसके बाद साल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव और साल 2019 के लोकसभा चुनाव सहित स्‍थानीय चुनावों में हार के बावजूद अखिलेश यादव ने साल 2024 में उत्‍तर प्रदेश में 80 में से 80 लोकसभा सीटें जीतने का दावा कर रही भाजपा के विजय रथ को न केवल उत्‍तर प्रदेश में रोक दिया। बल्कि केन्‍द्र में अपने दम पर भजपा के सत्‍ता पर आसीन होने के सपने को भी तोड़ दिया। अखिलेश यादव के संघर्ष से प्रदेश के लगभग हर जिले के समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता ने सीख लेते हुए भाजपा को कड़ी टक्‍कर दी। परिणामस्‍वरूप समाजवादी पार्टी को 37 सीटें मिली है। लेकिन गौतम बुद्ध नगर में पार्टी ने सबसे बुरा प्रदर्शन किया है। इस सीट पर भाजपा उम्‍मीदवार डॉ महेश शर्मा ने समाजवादी पार्टी उम्‍मीदवार डॉ महेन्‍द्र सिंह नागर को लगभग 5.60 लाख वोटों से हराया है।

गौतम बुद्ध नगर के समाजवादी नेता पार्टी के लिए खुद की उपयोगिता कब साबित करेंगे ?

गौतम बुद्ध नगर जिले के राजनीतिक इतिहास में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन लगातार खराब रहा है। एक समय गौतम बुद्ध नगर जिले में बहुजन समाज पार्टी का परचम लहराया था। इस दौर में बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे का मुकाबला होता रहा है। मायावती का जादू लोगों के सिर से उतरते ही भाजपा ने जिले की राजनीति को पूरी तरह से नियंत्रण में कर लिया है। स्‍थानीय निकाय से लेकर विधानसभा और लोकसभा सीटा पर भाजपा का कब्‍जा है। समाजवादी पार्टी नेतृत्‍व को हमेशा यह बात चुभती रही है कि गौतम बुद्ध नगर जिले में पार्टी संघर्ष करते हुए भी दिखाई नहीं देती है। इसके बावजूद गौतम बुद्ध नगर जिले के वरिष्‍ठ समाजवादी पार्टी नेताओं को पार्टी नेतृत्‍व में अच्‍छी खासी तवज्‍जो दी है। लोकसभा चुनाव 2024 में उत्‍तर प्रदेश की ऐसी सीटों पर भी समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है जिन्‍हें भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन गौतम बुद्ध नगर में पार्टी के अधिकांश कद्दावर नेता  अपने गांव और बूथों पर चुनाव हार गए। ऐसे में समय आ गया है जब गौतम बुद्ध नगर जिले के वरिष्‍ठ समाजवादी पार्टी नेताओं को पार्टी के लिए अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी। ऐसे नेता पार्टी के लिए केवल सफेद बनकर रह जाएंगे। सफेद हाथी को पालना समझदारी का प्रतीक नहीं है। अर्थात पार्टी का शीर्ष नेतृत्‍व जिले में नेतृत्‍व बदलाव पर विचार करें, पार्टी के शीर्ष नेताओं को परिणाम देने होंगे।

आम लोगों के बीच समाजवादी पार्टी की पकड़ कमजोर

गौतम बुद्ध नगर जिले में समाजवादी पार्टी की पकड़ बेहद कमजोर है। समाजवादी पार्टी कार्यक्रमों में पूर्व की अखिलेश यादव सरकार की उपलब्धियों समाजवादी पेंशन, कन्या विद्याधन, लैपटॉप वितरण, मुफ्त दवाई, मुफ्त सिंचाई, कामधेनु योजना, लोहिया आवास, कृषक दुर्घटना बीमा और डायल 100 आदि कल्‍याणकारी योजनाओं की चर्चा जरूर की जाती है। लेकिन आम जनता के बीच इन योजनाओं का संदेश देने में गौतम बुद्ध नगर जिला समाजवादी पार्टी पूरी तरह असफल रही है। हर हार के बाद समीक्षा में कुछ बातें निकलकर सामने आती है जैसे- शहरी वर्ग के बीच पार्टी की कमजोर उपस्थिति, अधिकांश पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का जमीनी हकीकत से अलगाव, जनता के मुद्दों को सही तरह से न उठाना और चुनाव के दौरान अतिसक्रियता दिखाना। इसके बावजूद इनका जवाब तलाशने में पार्टी नाकम ही रही है।

गौतम बुद्ध नगर में जीत के सूखे को समाप्‍त करना पार्टी के लिए चुनौती

समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्‍व लगातार हार के बावजूद गौतम बुद्ध नगर जिले के समाजवादी नेताओं को खूब तवज्‍जो दे रहा है। ऐसे में पार्टी नेताओं की नैतिक जिम्‍मेवारी बन जाती है कि वह जिले में पार्टी संगठन की बुनियाद को मजबूत करें। जिले में चल रहे पार्टी की जीत के सूखे को समाप्‍त करे। यदि समाजवादी पार्टी गौतम बुद्ध नगर में पार्टी के सामने आ रही राजनीतिक चुनौतियों को अनदेखा करके लोकसभा चुनाव में उत्‍तर प्रदेश में मिली पार्टी की जीत को लेकर जश्‍न में डूबी रहेगी तो आगामी चुनाव में यह अधिक कष्‍टदायी होगा। गौतम बुद्ध नगर जिले के पार्टी नेताओं को कल्‍पनालोक से निकलकर गौतम बुद्ध नगर के कठोर और पथरीले राजनीतिक धरातल का सामना करना ही होगा अन्‍यथा उनके लिए उत्‍तर प्रदेश में मिली समाजवादी पार्टी की बड़ी जीत ऐसे ही है जैसे बेगानी शादी में अब्‍दुल्‍ला दीवाना।

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