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पीलीभीत मुठभेड़ : तीन खालिस्‍तानी आतंकवादी ढेर, गौतम बुद्ध नगर में हुए खून खराबे से तराई क्षेत्र के अपराध का रहा है नाता !

Pilibhit encounter: Three Khalistani terrorists killed, crime in Terai region has been linked to the bloodshed in Gautam Buddha Nagar!

Panchayat 24 : उत्‍तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित पीलीभीत में पंजाब और उत्‍तर प्रदेश पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में खालिस्‍तानी फोर्स के तीन आतंकवादी ढेर हो गए हैं। इनके कब्‍जे से दो एके-47 सहित कई हथियार बरामद हुए हैं। मुठभेड़ में मारे गए तीनों आरोपियों गुरविंदर सिंह, वीरेन्‍द्र सिंह और जसन प्रीत सिंह पर गुरदासपुर पुलिस चौकी पर ग्रेनेड से हमला करने का आरोप है। तराई का यह क्षेत्र लंबे समय तक खालिस्‍तानी आतंकवाद का गढ़ रहा है। गौतम बुद्ध नगर में अपराध का एक ऐसा भी दौर रहा है जिसका तराई के क्षेत्र के अपराध से नाता जुड़ गया था। इस दौर में तराई के क्षेत्र के अपराधियों के सहयोग से गौतम बुद्ध नगर में खूब खून खराबा हुआ था।

क्‍या है तराई के क्षेत्र का खालिस्‍तानी आतंकवादी कनेक्‍शन ?

दरअसल, तराई क्षेत्र, हिमालय के आधार के दक्षिण में स्थित क्षेत्र है। उत्‍तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत लखीमपुर, बहराइच और श्रवस्‍ती जिले इस क्षेत्र में स्थित हैं। जब पंजाब में 1980-90 के दशक में पंजाब में खालिस्‍तानी आतंकवादी अपने चरम पर था तो उस दौरान तराई के क्षेत्र में भी खालिस्‍तानी आतंकवाद तेजी से पनपा। इस दौरान खालिस्‍तानी कट्टरपंथियों ने यहां कई जघन्‍य वारदातों को अंजाम दिया। इनमें पीलीभीत में जुलाई 1992 में जंगल में 29 लोगों की हत्‍या सबसे चर्चित घटना रही है।

क्‍या था खालिस्‍तानी अपराध का गौतम बुद्ध नगर कनेक्‍शन ?

गौतम बुद्ध नगर में साल 2012 से 17 का दौर अपराधिक दृष्टि से सबसे बुरा दौर रहा है। शायद ही कोई ऐसा जघन्‍य अपराध रहा होगा जिसको यहां अंजाम नहीं दिया गया था। इसी दौरान साल 2016 में गाजियाबाद के एक वरिष्‍ठ भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया पर घात लगाकर हथियारबंद बदमाशों द्वारा हमला किया गया था। इससे पूर्व पश्चिम उत्‍तर प्रदेश में कुछ अन्‍य स्‍थानों पर भी एके-47 से अपराधिक वारदातों को अंजाम दिया गया था। सवाल उठ रहा था कि आखिकर पश्चिम उत्‍तर प्रदेश के अपराधियों के पास एके-47 जैसे संहारक हथियार कहां से आए हैं।

इस संबंध में जिले में तैनात तत्‍कालीन वरिष्‍ठ अधिकारी ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि वैसे तो इस तरह के हथियार विदेशों से भारत के पड़ोसी देशों के रास्‍ते आतंकवादियों और नक्‍सलियों तक पहुंचते हैं। इनमें पंजाब, कश्‍मीर और उत्‍तर प्रदेश प्रमुख हैं। उत्‍तर प्रदेश में प्रमुख रूप से नेपाल के रास्‍ते हथियारों की तस्‍करी होती है। वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि पश्चिम उत्‍तर प्रदेश के अपराधिक गिरोह अपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए जिस एके-47 रायफल का प्रयोग करते हैं दरअसल वह तराई के क्षेत्र से इनके पास पहुंची हैं। 1990 के दशक में जब खालिस्‍तानी आतंकवाद के खातमे के लिए सख्‍ती से कार्रवाई की गई थी। इस दौरान यह एके-47 पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के अपराधिक गिरोहों के हाथ लग गई थी। बाद में पुलिस कार्रवाई में यह हथियार अपराधिक गिरोहों से बरामद भी हुए थे। तराई के क्षेत्र से पश्चिम उत्‍तर प्रदेश के अपराधियों के हाथ लगी एके-47 का गौतम बुद्ध नगर के अपराधिक गिरोहों ने भी कई अपराधिक वारदातों में इस्‍तेमाल किया था।

गौतम बुद्ध नगर में कब हुआ तराई क्षेत्र के खालिस्‍तानी कट्टरपंथियों की एके-47 का प्रयोग ?

दरअसल, साल 2004 में तत्‍कालीन जिला पंचायत अध्‍यक्ष नरेश भाटी की सुन्‍दर भाटी गिरोह द्वारा हत्‍या कर दी गई थी। नरेश भाटी की हत्‍या के बाद छोटे भाई रणपाल ने गिरोह की कमान अपने हाथ में ली थी। साल 2006 में बुलन्‍दशहर के सिकन्‍द्राबाद में एनकाउंटर में मार गिराया था। उस दौरान इस बात के काफी चर्चे थे कि रणपाल के एनकाउंटर के पीछे भी सुन्‍दर भाटी और उसके करीबी लोगों की ही साजिश है। रणपाल भाटी की मौत के बाद नरेश गिरोह की कमान छोटे भाई रणदीप ने संभाल ली थी। रणदीप सुन्‍दर भाटी से नरेश भाटी और रणपाल भाटी की मौत का बदला लेना चाहता था। साल 2006 में रणदीप भाटी गिरोह को यह मौका उस समय मिला जब पुलिस सुन्‍दर भाटी को पुलिस अभिरक्षा में गौतम बुद्ध नगर जिला कोर्ट में पेशी पर ले जाया जा रहा था। दादरी रेलवे फाटक को पर करने के साथ ही रणदीप भाटी गिरोह ने सुन्‍दर भाटी पर आधुनिक हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हमले में सुन्‍दर भाटी बाल-बाल बच गया था।

इसके बाद साल 2011 में साहिबाबाद स्थित एक फार्म हाऊस में सुन्‍दर भाटी के एक रिश्‍तेदार के यहां शादी थी। इस शादी में सुन्‍दर भाटी भी पहुंचा था। इस बात की भनक रणदीप भाटी और अमित कसाना गिरोह को लग गई थी। यहां भी रणदीप भाटी और अमित कासना गिरोह ने एके-47 से सुन्‍दर भाटी पर जानलेवा हमला किया था। हमले में सुन्‍दर भाटी इस बार भी बाल-बाल बच गया था। लेकिन तीन लोगों की मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार सुन्‍दर भाटी पर हुए इन हमले में एके-47 का प्रयोग हुआ था। गौतम बुद्ध नगर के अनिल दुजाना गिरोह के रणदीप भाटी और मुजफ्फरनगर के अपराधिक गिरोह से संबंध थे। इन तीनों गिरोह द्वारा ही एके-47 का अपराधिक वारदातों में प्रयोग किया गया था। उस समय पुलिस विभाग में इस बात की चर्चा थी कि सुन्‍दर भाटी के पास भी एके-47 है।

हालांकि तत्‍कालीन पुलिस का मानना था कि एके-47 एक संहारक हथियार है। हर अपराधिक गिरोह के पास इसकी उपलब्‍धता संभव नहीं है। पुलिस सूत्र बताते थे कि कई बार अपराधिक गिरोह आवश्‍यकता के अनुसार आपसी संबंधों के आधार पर एक दूसरे से घटनाओं को अंजाम देने के लिए एके-47 को हायर भी करते थे। उस समय गौतम बुद्ध नगर के दो अपराधिक गिरोहों के बीच एके-47 के साझा प्रयोग की बातें भी सामने आई थी। हालांकि उस समय पुलिस यह भी मानती थी कि एके-47 का नया वर्जन अपराधिक गिरोहों के पास नहीं है। तराई के क्षेत्र से पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश तक पहुंची पुरानी एके-47 का रख रख रखाव एवं मेंटेनेंस के कारण अपराधिक गिरोहों का इससे मोह भंग हो चला था। कभी कभार ही बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए तराई के खालिस्‍तानी कट्टरपंथियों से मिली एके-47 का प्रयोग किया गया था।

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