दादरी विधानसभा

वैश्विक मंदी में भी भारतीय हस्‍तशिल्‍प की दुनिया में भारी मांग, 58वें आईएचजीएफ दिल्‍ली मेले का शानदार आगाज है इसका प्रमाण

Even in the global recession, there is a huge demand for Indian handicrafts in the world; the grand opening of the 58th IHGF Delhi Fair is proof of this

Panchayat 24 : दुनिया वैश्विक मंदी के दौर से गुजर रही है। दुनिया भर के देशों के उत्‍पादक अपने उत्‍पादों की घरेलू एवं वैश्विक बिक्री पर मंदी के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। वहीं, भारत का हस्‍तशिल्‍प कारोबार तेजी से वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूती से बनाए हुए हैं। ग्रेटर नोएडा इंडिया एक्‍सपो सेंटर एण्‍ड मार्ट में 16 अक्‍टूबर से आयोजन होने वाले पांच दिवसीय 58वें आईएचजीएफ दिल्‍ली मेले का शानदार आगाज इस द्वबात की पुष्टि करता है। इस मेले का आयोजन हस्‍तशिल्‍प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार इस बार आईएचजीएफ मेला कई मायनों में यादगार होने जा रहा है। मंगलवार को इंडिया एक्‍सपो सेंटर एण्‍ड मार्ट के बोर्ड रूप में ईपीसीएच की ओर से आयोजित एक प्रेस वार्ता में इस संबंध में जानकारी दी गई।

आईएचजीएफ ने हस्‍तशिल्‍प से जुड़े हर वर्ग के लिए संभावनाओं के द्वार खोले 

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के अध्यक्ष श्री दिलीप बैद ने इस मौके पर कहा कि यह आयोजन भारतीय हस्‍तशिल्‍प कारोबार की गहराई से दुनिया को पचिचित कराता है। यह खरीददार और उत्‍पादक को अपार संभावनाएं मुहैया कराता है। इस मंच पर कारोबारी की व्‍यवसायिक संभावनाओं का पता चलता है। यह मंच भारतीय हस्‍तशिल्‍प की भविष्‍य की अपार संभावनाओं को परि‍लक्षित करता है। मेले में प्रदर्शित होने वाले उत्‍पाद कारीगरों की कलात्‍मक दक्षता को नई दिशा प्रदान करते हैं। आईएचजीएफ ने हस्‍तशिल्‍प से जुड़े हर वर्ग के लिए संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

यूएसए और यूरोप में मंदी के बावजूद भारतीय हस्‍तशिल्‍प दुनिया में भारतीय हस्‍तशिल्‍प के मांग बढ़ रही है

ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में चीफ मेंटर और आईईएमएल के अध्‍यक्ष डॉ राकेश कुमार ने कहा कि पूरी दुनिया एक तरफ मंदी के दौर से गुजर रही है। चाहे यूएसए हो या फिर यूरोप हो, सभी जगह कारोबार मंदी की चपेट में आ रहा है इसके पीछे बड़ी वजह रूस और यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्‍ट में इस्राइल और अरब देशों के दूसरे देशों के बीच चल रहा संघर्ष है। इसके बावजूद भारत का हस्‍तशिल्‍प कारोबार वैश्विक स्‍तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहा है। यह भारतीय उत्‍पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को इस बात का परिचायक है कि दुनिया के घरों में भारतीय उत्‍पादों की मांग अभी भी कम नहीं हुई है। दुनिया भर के देशों में लोग भारतीय हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों से अपने घरों को सुसज्जित करना चाहते हैं। ईपीसीएच हर उस उत्‍पाद को बेहतर मंच देगा और अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में स्‍थान दिलाएगा जिसमें कुछ विशेष होगा। इससे ग्रामीण एवं दूर दराज के कारीगरों की कला का भी अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों पर प्रदर्शन होगा और उन्‍हें बेहतर अवसर मिलेंगे। इसके माध्‍यम से देश की विविधता पूर्ण हस्‍तशिल्‍प कला को बढ़ावा मिलेगा।

 सौ से अधिक देशों के तीन हजार से अधिक प्रदर्शक होंगे शामिल

58वें आईएचजीएफ दिल्ली मेले में 16 बड़े हॉल में सौ से अधिक देशों के तीन हजार से अधिक प्रदर्शकों की बारीकी से व्यवस्थित लेआउट का दावा किया जा रहा ह।, इनमें से 14, अहम डिस्प्ले सेगमेंट को शामिल किया गया हैं, जिसमें हाउसवेयर, होम फर्नीशिंग, फर्नीचर, गिफ्ट एवं डेकोर, लैंप एवं लाइटिंग, क्रिसमस एवं फेस्टिव डेकोर, फैशन जूलरी एवं एक्सेसरीज, स्पा एवं वेलनेस प्रॉडक्ट, कारपेट एवं रग्स, बाथरूम एक्सेसरीज, गार्डेन एक्सेसरीज, एजुकेशनल टॉयज और गेम्स, हस्तनिर्मित कागज उत्पाद और स्टेशनरी, तथा चमड़े के बैग शामिल हैं। यहां आने वालों आगंतुक, हॉल में प्रदर्शक बूथों के अलावा इंडिया एक्सपो सेंटर की विभिन्न मंजिलों पर स्थित प्रमुख निर्यातकों के 900 मार्ट अथवा स्थायी शो रूम में भी जा सकेंगे। इस बार इस्राइल से कुछ प्रदर्शक कम हुए हैं, लेकिन लेबनान से प्रदर्शकों की संख्‍या बढ़ी है। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आर. के. वर्मा ने बताया कि साल 2023-24 के दौरान भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 32,758 करोड़ रुपये (3,956 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का हुआ था। 

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