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गौतम बुद्ध नगर में राजस्‍व रिकार्ड में सेंध, क्षेत्रफल घटाने-बढ़ाने का खेल आया सामने, कोर्ट के आदेश पर हुआ मामला दर्ज

Revenue records breached in Gautam Budh Nagar, game of increasing and decreasing area came to light, case registered on court's order

Panchayat 24 : गौतम बद्ध नगर में भूमाफियाओं और दबंगों का राजस्‍व विभाग में दखल का मामला प्रकाश में आया है। राजस्‍व विभाग के दस्‍तावेजों में भूमि का रकबा घटा बढ़ाने का खेल चल रहा है। ऐसे ही एक मामला दादरी तहसील के अन्‍तर्गत सामने आया है। आरोपियों ने जमीन का रकबा बढ़ाकर बेच दिया। पीडित ने पुलिस से मामले की शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बाद में पीडित ने न्‍याय के लिए न्‍ यायालय का दरवाजा खटखटाया। प्रथम दृष्‍टया मामले का संज्ञान लेते हुए न्‍यायालय ने पुलिस को मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। पुलिस ने दादरी कोतवाली पुलिस ने मामले में एक महिला सहित कुल 6 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्‍या है पूरा मामला ?

दरअसल, दादरी तहसील के छलेरा गांव निवासी योगेन्‍द्र सिंह ने साल 2002 में जारचा कोतवाली क्षेत्र के नूरपुर गांव निवासी फैमिदा, इमरान, महताब, फरजन्‍द, वकार और कमल से कुछ जमीन खरीदी थी। उन्‍होंने जमीन दादरी तहसील में इस जमीन के क्रय का बैनामा एवं रजिस्‍ट्री निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कराई थी जिसके बाद भूमि खतौनी में योगेन्‍द्र सिंह के नाम पर दर्ज हो गई। योगेन्‍द्र कुमार ने इस जमीन को रूपबास गांव निवासी अंजू कलसन को बेच दिया।

योगेन्‍द्र कुमार के अनुसार उन्‍हें अपने साथ हुए इस धोखाधड़ी की जानकारी बीते साल 19 अक्‍टूबर को हुई। जमीन खरीददार पक्ष ने उन्‍हें बताया कि जिस खसरा संख्‍या 491 में 1509 वर्ग गज जमीन उन्‍हें बेची गई है, वास्‍तव में चकबंदी दस्‍तावेजों में उस खसरा संख्‍या में उतनी जमीन दर्ज ही नहीं है। दस्‍तावेजों में खसरा संख्‍या 491 में महज 301 वर्ग गज जमीन ही है। ऐसे में उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। योगेन्‍द्र कुमार के अनुसार यह बात सुनकर उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। उन्‍होंने इस बारे में जानकारी की तो पता चला कि जिन लोगों से उन्‍होंने लगभग दो दशक पूर्व यह जमीन खरीदी थी, उन्‍होंने दादरी तहसील के अधिकारिों एवं कर्मचारियों के संग मिलकर राजस्‍व दस्‍तावेजों में जमीन का रकबा बढ़ाकर उन्‍हें धोखे से बेच दिया दी थी।

पीडत का कहना है कि उसने आरोपियों से इस बारे में बात की। अपने साथ हुई धोखाधडी के बारे में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। आरोपियों पर इस का कोई असर नहीं पड़ा, उल्‍टे आरोपियों ने पीडित को जान से मारने की धमकी दे डाली। भयभीत होकर पीडित ने पुलिस से मामले की शिकायत की। पुलिस ने पीडित की गुहार नहीं सुनी। अंत में पीडित ने न्‍यायालय में न्‍याय पाने के लिए शरण ली। न्‍यायालय के आदेश पर पुलिस ने नूरपुर गांव निवासी फैमिदा, इमरान, महताब, फरजन्‍द, वकार और कमल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।

पूर्व में भी दादरी तहसील में दस्‍तावेजों में हेरफेर के मामले आए हैं सामने

बता दें कि दादरी उत्‍तर प्रदेश की सबसे अधिक राजस्‍व देने वाली तहसीलों में से एक है। सम्‍पूर्ण नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्‍ट,  ग्रेटर नोएडा वेस्‍ट का कुछ हिस्‍सा और सम्‍पूर्ण दादरी क्षेत्र इसी तहसील के अन्‍तर्गत आता है। ऐसे में यहां आने वाले अधिकांश अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी तैनाती को एक मौके के रूप में देखते हैं और जमकर मलाई काटते हैं। तहसील में फलफूल रहे भ्रष्‍टाचार में यहां तैनात संविदाकर्मचारियों के शामिल होने की खबरें आती रहती है। इस मामले में भी जानकारी हुई है कि आरोपियों के जानकार एवं रिश्‍तेदार दादरी तहसील में बतौर संविदाकर्मचारी तैनात हैं। हालांकि यह जांच का विषय है कि इस बात में कितनी सत्‍यता है।

मोती गोयल और यशपाल तोमर जैसे भूमाफियाओं ने भी दादरी तहसील में अपना साम्राज्‍य बनाया

बता दें कि उत्‍तर प्रदेश की अहम तहसील माने जाने वाली दादरी तहसील पर लंबे समय से भूमाफियाओं का साया रहा है। यहां उत्‍तर प्रदेश के सबसे बड़े घोटालों के सरगना मोती गोयल और यशपाल तोमर ने भी अपना साम्राज्‍य बनाया है। इस दौरान इस तरह की भी खबरें आई थी कि इन्‍होंने तहसील के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मदद से दस्‍तावेजों में हेरफेर करके सरकारी एवं किसानों की जमीनों को हड़प लिया था।

निष्‍पक्ष जांच कर आरोपियों पर हो कार्रवाई

तहसीलों में रखे भूमि संबंधी दस्‍तावेज बहुत अहम है। इन दस्‍तावेजों के आधार पर ही जमीनों के मालिकाना हक तय होते हैं। यदि इन दस्‍तावेजों में सेंध लगाकर भूमाफिया सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मदद से धोखाधड़ी करके निजी हित के लिए हेरफेर करेंगे तो इसका शिकार किसान एवं आम आदमी होंगे। जिले में लगातार बढ़ रहे जमीन संबंधित विवादों का एक मुख्‍य कारण यह भी है। इससे प्रशासन की निष्‍पक्षता पर सवालिया निशान भी लगता है। लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था के लिए यह शुभ संकेत नहीं है। ऐसे में जिला प्रशासन एवं शासन को इस तरह के मामलों की निष्‍पक्ष जांच कराकर आवश्‍यक कार्रवाई करनी चाहिए। अन्‍यथा किसान और आम आदमी तहसीलों में मचे भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ते रहेंगे।

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