स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट का मामला : घटना के राजनीतिक आंकलन में हुई देरी के बाद डैमेज कंट्रो में जुटी आप
Swati Maliwal assault case : AAP engaged in damage control after delay in political assessment of the incident

Panchayat 24 : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के आवास पर पार्टी की वरिष्ठ नेता और महिला राज्य सभा सांसद स्वाति मालीवाल से हुए दुर्व्यवहार और अभद्रता का मामला राजनीतिक लाभ हानि का विषय बन गया है। जिस तरह से पिछले 30 घंटों में यह प्रकरण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, उससे प्रतीत हो रहा है कि घटना का राजनीतिकरण हो चुका है। दिल्ली और पंजाब में होने वाले लोकसभा चुनावों के चरण में आम आदमी पार्टी को लाभ हानि की कसौटी से गुजरना होगा।
दरअसल, स्वाति मालीवाल सोमवार सुबह लगभग 9 बजे दिल्ली पुलिस को पीसीआर कॉल करके बताया था कि उनके साथ मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पीए विभव कुमार ने मारपीट एवं अभद्रता की गई है। वह सिविल लाइन थाने भी पहुंची थी और मौखिक शिकायत करके वापस लौट गई थी। घटना के बाद पूरे दिन मीडिया और सोशल मीडिया पर लोग आम आदमी पार्टी का पक्ष जानना चाहते थे। लेकिन आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी तरह चुप्पी साध ली। पार्टी के नीति निर्माता चुनावी दौर में इस घटना के प्रभाव को समझ चुके थे। घटना पर मंगलवार को जिस प्रकार से पार्टी का बयान आया है उससे प्रतीत हो रह है कि पहले पार्टी के अंदर परिस्थितयों को काबू किया गया। फिर घटना के राजनीतिक नफा नुकसान के आंकलन के बाद सधे अंदाज में डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया गया है।
संजय सिंह का कहना है कि यह एक निंदनीय घटना है। अरविन्द केजरीवाल ने पूरी घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने इस प्रकरण में सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। स्वाति मालीवाल ने देश और समाज के लिए बड़े काम किए हैं। वह पार्टी की वरिष्ठ नेता है। हम सब उनके साथ हैं। आम आदमी पार्टी ऐसे लोगों का समर्थन नहीं करती है। हालांकि स्वाति मालीवाल पूरे प्रकरण पर चुप हैं। कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। ऐसे में संजय सिंह का बयान पार्टी की ओर से राजनीतिक औपचारिकता अधिक प्रतीत होता है। पूरे घटनाक्रम पर लोगों द्वारा उठाए जा रहे सवाल और आरोप अपने स्थान पर बने हुए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा चल रही है कि आम आदमी पार्टी की ओर से स्वाति मालीवाल से राज्य सभा से त्याग पत्र देने के लिए कहा गया था। पार्टी अरविन्द केजरीवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले वकील अभिषेक मनु सिंघवी को उनके स्थान पर राज्य सभा भेजना चाहती है। इस विषय पर बातचीत करने के लिए स्वाति मालीवाल को मुख्यमंत्री आवास पर बुलाया गया था। स्वाति मालीवाल इसके लिए तैयार नहीं हुई जिसके चलते उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई। हालांकि जब तक स्वाति मालीवाल स्वयं इस बारे में आगे आकर स्थिति स्पष्ट नहीं करती, इस तरह की चर्चांए राजनीतिक आरोपों से अधिक कुछ नहीं है। लेकिन जिस तरह से पार्टी नेतृत्व ने घटना पर चुप्पी साधे रखी उससे इन आरोपों को सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता। पुरानी कहावत है कि धुआं है तो आग जरूर लगी है।
संजय सिंह ने जरूर पार्टी की ओर से बयान देकर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि स्वाति मालीवाल की बात में सत्यता है तभी वह विभव कुमार पर कार्रवाई की बात कह रहे है। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि स्वाति मालीवाल के साथ अभद्रता और मारपीट क्यों हुई ? पूरे प्रकरण पर अरविन्द केजरीवाल की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। दूसरे दलों में होने वाली छोटी छोटी घटनाओं पर बारीकी से नजर रखने और राजनीतिक हमला बोलने वाले अरविन्द केजरीवाल चुप्प क्यों हैं ? क्या अरविन्द केजरीवाल इस प्रकरण में स्वाति मालीवाल से नाराज है ? यदि ऐसा नहीं है तो फिर घटना के तुरन्त बाद पार्टी की ओर से सख्त संदेश देने में इतनी देरी क्यों की गई ? अरविन्द केजरीवाल की ओर से इस घटना पर कोई बयान क्यों नहीं दिया गया ?
वहीं, घटना के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी के नेता स्वाति मालीवाल के पक्ष में खड़े हो गए हैं। उन्हें न्याय दिलाने की बात कह रहे हैं। चुनावी सभाओं और भाषणों में स्वाति मालीवाल का मुद्दा दूसरे चुनावी मुद्दों पर भारी दिखाई दे रहा है। स्वाति मालीवाल की आड़ में भारतीय जनता पार्टी लगातार आम आदमी पार्टी पर हमलावर है। भाजपा जिस तरह से इस मुद्दे को धार दे रही है, उससे लगता है मानो हाथ आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनाव में बड़ा हथियार हाथ लग गया है। दोनों ही दल चुनावी दौर में इस प्रकरण की राजनीतिक महत्ता जानते हैं। यही कारण है कि भाजपा इससे आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनाव में अधिक से अधिक लाभ लेना चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी इस प्रकरण से होने वाले राजनीतिक नुकसान को कम से कम करने में जुटी है।