राकेश टिकैत तलाश रहे गौतम बुद्ध नगर में अपनी जमीन, जेवर क्षेत्र बनेगा किसान आन्दोलनों का नया केन्द्र ? जेवर की राजनीतिक स्थिति में होगा बदलाव ?
Rakesh Tikait is looking for his land in Gautam Buddha Nagar, will Jewar area become the new center of farmers' movements? Will there be a change in the political status of jewellery?

Panchayat 24 : पिछले कुछ समय में भारतीय किसान यूनियन के नेता एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत और प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कई बार गौतम बुद्ध नगर का दौरा किया है। उनके अधिकांश कार्यक्रम जेवर और जेवर के आसपास के क्षेत्र में ही आयोजित किए गए हैं। वीरवार को भी राकेश टिकैत जेवर के मेहंदीपुर गांव में पहुंचे और लोगों को संबोधित किया। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि टिकैत बंधु गौतम बुद्ध नगर में अपने संगठन भारतीय किसान यूनियन को स्थापित करना चाहते हैं। भविष्य में जेवर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की गतिविधियों का केन्द्र बनेगा। इससे जिले में किसान आन्दोलनों में तेजी आएगी। भारतीय किसान यूनियन की सक्रियता बढ़ने से क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति में भी बदलाव होगा और राकेश टिकैत का प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप बढ़ेगा।
जेवर में क्यों सक्रियता दिखा रहे हैं टिकैत बंधु ?
दरअसल, गौतम बुद्ध नगर दिल्ली से सटा हुआ जिला है। वहीं, इसको उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। निकट भविष्य में नोएडा और ग्रेटर नोएडा को पीछे छोड़कर जेवर क्षेत्र जिले की आर्थिक गतिविधियों का केन्द्र बनने जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट सहित कई बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं यहां जमीन पर उतरने वाली है। इस विकास का एक पहलू यह भी है कि यहां किसानों की समस्याओं में तेजी से इजाफा हो रहा है। जिले में किसान समस्याओं को लेकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई किसान संगठन मजबूती से सक्रिय है। इसके बावजूद जेवर क्षेत्र में पिछले एक दशक में कोई मजबूत स्थानीय किसान संगठन खड़ा नहीं हो सका है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की जिला इकाई यहां सक्रिय दिखाई देती है।
जानकार मानते हैं कि जेवर में किसी स्थानीय किसान संगठन के नहीं पनपने की स्थिति में राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन को यहां मजबूत करना चाहते हैं। भारतीय किसान यूनियन की मजबूत होती जिला इकाई और समर्पित कार्यकर्ताओं के कारण राकेश टिकैत के लिए यह संभव भी है। पिछले कुछ समय में राकेश टिकैत और नरेश टिकैत का गौतम बुद्ध नगर दौरा इसी ओर इशारा करता है।
जेवर से राकेश टिकैत के आकर्षण की है बड़ी वजह
पिछले कुछ सालों में किसान आन्दोलनों की प्रकृति में बड़ा बदलाव देखने में आया है। भारतीय किसान यूनियन इससे अछूती नहीं है। किसान यूनियन के आन्दोलनों का केन्द्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर तथा आसपास का क्षेत्र होता था। यहां के किसानों पर किसान यूनियन की अच्छी पकड़ी रही है। वहीं, टिकैत बंधुओं को किसान आन्दोलनों में जातीय समर्थन भी अच्छा खासा मिलता रहा है। पिछले कुछ सालों में किसान संगठनों की रणनीति में बदलाव आया है। किसान आन्दोलन के केन्द्र में दिल्ली आ गई है। लगभग दो साल पूर्व पूरे देश ने देखा कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे राज्यों में सक्रिय किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर किस तरह से दिल्ली की सीमाओं को एक साल से भी अधिक समय के लिए बंधक बना लिया था। उनकी यह रणनीति कामयाब भी रही थी।
सरकार को किसान आन्दोलन के चलते तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय किसान यूनियन और राकेश टिकैत की भूमिका अहम रही थी। ऐसे में दिल्ली के करीब देश में तेजी से उभरते आर्थिक क्षेत्र को अपनी नई कर्म भूमि बनाकर राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन की सक्रियता का नया केन्द्र जेवर को बनाना चाहते हैं। जानकार मानते हैं कि जेवर से राकेश टिकैत दिल्ली में मजूती से दस्तक देने की स्थिति में रहेंगे।
जेवर से भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) को मिलेगी मजबूती
एक समय भारतीय किसान यूनियन उत्तर प्रदेश सहित भारत के किसानों की मजबूत आवाज थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वह किसानों की लगभग एकमात्र प्रतिनिधि थी। महेन्द्र सिंह टिकैत के हाथों से भारतीय किसान यूनियन की बागड़ोर नरेश टिकैत और राकेश टिकैत के हाथों में आने के बाद भारतीय किसान यूनियन में तेजी से मतभेद उभरे। यूनियन के कई बड़े चेहरों ने संगठन को छोड़ दिया। कई बड़े चेहरों ने भारतीय किसान यूनियन के नाम से नया संगठन बना लिया। इससे भारतीय किसान यूनियन की स्थिति कमजोर हुई है।
वर्तमान में देखने में आ रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए पुराने सैकड़ों किसान संगठन सक्रिय है। इनमें से अधिकांश का कभी न कभी भारतीय किसान संगठन से प्रत्यरूक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि भारतीय किसान यूनियन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, मेरठ, शामली, कैराना, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर और अमरोहा आदि जिलों में तक सिमट गई है। बड़े हिस्से में किसान यूनियन का वह प्रभाव दिखाई नहीं देता है। इसमें गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलन्दशहर, मथुरा, आगरा और अलीगढ आदि जिलों का नाम प्रमुख है। यहां भारतीय किसान यूनियन से अलग हुए भारतीय किसान यूनियन (भानु) अथवा दूसरे किसान संगठनों का दबदबा है। जेवर से राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) को इन जिलों में फिर से मजबूती से खडा करना चाहते हैं।
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू किए गए किसान आन्दोलन में राकेश टिकैत के नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का एक धड़ा गाजीपुर बॉर्डर पर डटा हुआ था तो दूसरा धड़ा भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप के नेतृत्व में चिल्ला बाडॅर पर डटा हुआ था। बाद में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) और भारतीय किसान यूनियन ( भानु गुट) के बीच मतभेद पैदा हुआ था। भानु गुट ने सरकार के आश्वासन पर अपना आन्दोलन वापस ले लिया था। ठाकुर भानु प्रताप ने राकेश टिकैत पर आरोप लगाते हुए कई बयान भी दिए थे। जेवर के नया ठिकाना बनाकर राकेश टिकैत किसान यूनियन को इस क्षेत्र में हुई क्षति की भरपाई करना चाहते हैं।
किसान आन्दोलन के लिए संसाधन और समर्थन जुटाना होगा आसान ?
तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ किसान आन्दोलन एक साल से भी अधिक समय तक चला। इस दौरान किसान आन्दोलन को लगातार जारी रखने के लिए बड़ी मात्रा में संसाधन और समर्थन की आवश्यकता पड़ी। यदि निकट भविष्य में भारतीय किसान यूनियन को दिल्ली में या प्रदेश के दूसरे स्थान पर बड़ा आन्दोलन चलाना है तो उसके लिए फिर से संसाधन और समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी। इसकी जल्द से जल्द पर्याप्त मात्रा में भारतीय किसान यूनियन के प्रभावशील क्षेत्रों से व्यवस्था करना आसान नहीं है।
ऐसे में गौतम बुद्ध नगर बेहतर विकल्प बन सकता है। यहां से किसान आन्दोलन के लिए आर्थिक और मानवीय संसाधन जुटाए जा सकते हैं। दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन में टूट के बाद देखने में आ रहा है कि अधिकांश किसान संगठनों में जाति विशेष का प्रभाव है। भारतीय किसान यूनियन को भी जाट बिरादरी के किसानों का संगठन कहा जाने लगा है। ऐसे में जेवर को भारतीय किसान यूनियन की गतिविधियों का नया केन्द्र बनाकर राकेश टिकैत जेवर तथा आसपास के जिलों विशेषकर बुलन्दशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा के जाट किसानों को भी आसानी से साध सकते है।
राकेश टिकैत की सक्रियता से जेवर की राजनीति पर पड़ेगा असर
भारतीय किसान यूनियन एक दबाव गुट है। राकेश टिकैत और नरेश टिकैत भली भांति जानते हैं कि किस प्रकार से उन्हें सरकारों से अपनी बातें मनवाने के लिए किसान यूनियन का इस्तेमाल करना है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जहां पर भी भारतीय किसान यूनियन मजबूत होती है, वहां के राजनीतिक दलों और नेताओं को भारतीय किसान यूनियन की अनदेखी करना आसान नहीं होता है। विरोध की स्थिति में सरकारों के विधायकों और सांसदों के लिए भारतीय किसान यूनियन चुनौती पेश करती है। जेवर के विधायक ठाकुर धीरेन्द्र सिंह अभी तक जेवर में सरकार के खिलाफ किसी बड़े किसान आन्दोलन को खड़ा होने से बचाने में कामयाब रहे हैं। जब भी जेवर तथा आसपास के क्षेत्र में कोई किसान आन्दोलन शुरू होता है, धीरेन्द्र सिंह किसानों की संबंधित मंत्रियों और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर आश्वस्त कर देते है। भारतीय किसान यूनियन जिस तरह के मुद्दों को लेकर किसान आन्दोलन चलाते हैं, उन्हें एक साथ हल करना आसान नहीं है। ऐसे में जेवर क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन, राकेश टिकैत और नरेश टिकैत की सक्रियता वर्तमान में जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह के सामने चुनौती पेश करेगी। यह बात धीरेन्द्र सिंह के लिए चिंता का विषय बन सकती है। वीरवार को अपने जेवर दौरे पर मेहंदीपुर पहुंचे राकेश टिकैत ने इस बात के संकेत भी दिए हैं। राकेश टिकैत ने यहां जेवर के किसानों के जमीन अधिग्रहण के मुद्दों को हवा दी। उन्होंने आगामी 16 फरवरी को जेवर की धरती से पूरे देश में चक्का जाम और 14 मार्च को दिल्ली कूच का भी आहवान किया।
राकैश टिकैत टटोल रहे हैं जेवर की नब्ज
राकेश टिकैत जानते हैं कि विकास के लिए जेवर तथा आसपास के क्षेत्र के लिए बड़े पैमाने पर किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया है। गांवों को भी जेवर एयरपोर्ट के लिए विस्थापित किया गया है। प्रभावित किसान लंबे समय से अपनी मांगों को उठा रहे हैं। मेहंदीपुर गांव में राकेश टिकैत ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं पर किसानों से धोखा देने आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों की फसल दिन में नहीं बिक सकती है, लेकिन किसानों की जमीन रात को भी बिक रही है। जेवर में हुए जमीन अधिग्रहण का जिक्र करके उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सत्ताधरी नेताओं पर निशाना साधा।
राकेश टिकैत ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में वह गौतम बुद्ध नगर और जेवर के किसानों की जमीन अधिग्रहण से संबंधत समस्याओं की लड़ाई लड़ेंगे। जेवर विधायक भी अच्छी तरह जानते हैं यदि राकेश टिकैत ने जेवर को अपनी गतिविधियों का नया ठिकाना बना लिया तो उनसे पार पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। ऐसे में वह चहते हैं कि जब तक जेवर में वह अपनी राजनीतिक पारी खेल रहे हैं, राकेश टिकैत जेवर से किसी तरह दूर ही रहे। वीरवार को विधानसभा में किसान आन्दोलन का मुद्दा उठाकर उन्होंने क्षेत्र की जनता और किसानें को एक संदेश भी देने का प्रयास किया है। अब देखना यह होगा कि यदि राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन का झंडा जेवर में गाड़ते है तो किसान राकेश टिकैत पर विश्वस करते हैं या फिर विधायक धीरेन्द्र सिंह पर भरोसा जताते हैं ?