देश को ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के लिए जमीन देने वाले गांवों के अपने रास्ते जलमग्न, गांवों से टूटा सम्पर्क, उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
The villages giving land for the Eastern Peripheral Expressway to the country have submerged their paths, lost contact with the villages, submitted a memorandum to the sub-divisional magistrate
Panchayat 24 : ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर बने अण्डरपास में बारिश के मौसम में कई फीट पानी भर जाता है। ऐसे में इससे होकर गुजरने वाले लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। सोमवार को कई फूलपुर, आनन्दपुर, नई बस्ती, चिटेहरा, शाहपुर, बम्बावड़ तथा केमराला भोगपुर आदि गांवों के लोगों ने भारतीय किसान यूनियन अम्बावत के नेतृत्व में दादरी उपजिलाधिकारी आलोक गुप्ता को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा। भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है यदि एनएचएआई और जिला प्रशासन ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान नहीं करते हैं, तो बड़ा आन्दोलन किया जाएगा। इस मौके पर मनोज भाटी नगर, कृष्णा बंसल, कर्मवीर भाटी, विपिन भाटी, उफारुख, अमित पायला, बबलू खटाना, राहुल बीडीस हरिंदर गुर्जर, ब्रज भाटी,केसराम, संदीप, नीतू, मनोज कुमार, सत्येंद्र, जग्गा सिंह, विपिन और सतवीर नागरट आदि लोग मौजूद थे।
क्या है पूरा मामला ?
दिल्ली एनसीआर की लाइफ लाइन बन चुकी ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए जिले के कई गांवों की जमीन का अधिग्रहण किय गया था। ईस्टर्न पेरीफेरल बनने के बाद इन गांवों के लिए अंडरपास बनाकर सम्पर्क मार्ग बनाए गए थे। अण्डरपासों के बनने से ग्रामीणों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा रहा है, लेकिन देश के विकास की कीमत पर ग्रामीणों ने कोई शिकायत नहीं की। वर्तमान में जिले में बने लगभग एक दर्जन अण्डरपासों की हालत यह है कि बारिश होते ही इनमें कई फीट पानी भर जाता है। गांवों के लोगों को इस पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं कई बार गांवों का सम्पर्क आपस में कट जाता है। लोगों को कई बार 30 से 50 किमी का सफर तय करके अपने मंजिल पर पहुंचने को मजबूर होना पड़ता है।
बच्चे नहीं जा पाते हैं स्कूल, जान जोखिम में डालकर पानी से गुजरते हैं बच्चे
भारतीय किसान यूनियन के दादरी तहसील अध्यक्ष राजकुमार का कहना है कि बारिश के मौसम में इन अण्डरपास के नीचे पानी भरने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। अधिकांशत: छोटे बच्चे स्कूल वेन से स्कूल आते जाते हैं। लेकिन अण्डरपास के नीचे पानी भरने के कारण वेन का आवागमन प्रभावित होता है। वहीं कई बार छोटे बच्चे और ग्रामीण मजबूरी में जान जोखिम में डालकर पानी से होकर गुजरते हैं।
ग्रामीणों को साथ किया गया धोखा
राजकुमार का कहना है कि ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण के समय स्थानीय लोगों से आसपास के गांवों के विकास का वायदा किया गया था। लेकिन ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद यह सफेद झूठ ही साबित हुआ है। आज फर्राटा भरते ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे से नीचे झांककर देखने वाला कोई नहीं है। पूर्व में जो गांव चंद फसालों की दूरी पर स्थित थे, आज उनके बीच कई किलोमीटर की दूरियां बन गई है। सभी गांवों के लिए एक अण्डरपास बना दिया गया है। अण्डरपास के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। रात के समय यहां अंधेरा छा जाता है। सूरक्षा के लिहाज से बड़ी समस्या है। गांवों में विकास की बात भी बेईमानी बनकर रह गई है। ग्रामीणों से एक्सप्रेस-वे के साथ में सर्विस रोड़ बनाने का वायदा भी झूठा ही साबित हुआ है।