गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर जातीय समीकरणों पर भारी ‘ शहरी और बाहरी’
'Urban and outsider' heavy on caste equations in Gautam Buddha Nagar Lok Sabha seat

Panchayat 24 : पश्चिम उत्तर प्रदेश में आने वाली गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की अन्य सीटों से कई मायनों में अलग मानी जाती है। यह जिला देश के सबसे तेजी से विकसित होते औद्योगिक नगरों में से एक है। यही कारण है कि यहां पर बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश और देश के अन्य क्षेत्रों से यहां आकर बसे हैं। वर्तमान में इन बाहरी लोगों की यहां की चुनावी राजनीति की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका बन चुकी है। बाहरी मतदाताओं की बड़ी संख्या नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों और कालोनियों में निवास करती है। इता ही नहीं, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी क्षेत्र के आसपास बसी कॉलोनियों में भी अच्छी खासी संख्या में यह लोग रहते हैं। दिल्ली एनसीआर की हॉट सीट माने जाने वाली गौतम बद्ध नगर लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं रहे हैं। हार और जीत की चाबी इन शहरी और बाहरी मतदाताओं के हाथों में आ चुकी है। दरअसल, गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट के अन्तर्गत गौतम बुद्ध नगर जिले की तीन विधानसभाएं, नोएडा, दादरी और जेवर, आती हैं। वहीं, बुलन्दशहर जिले की दो विधानसभाएं, सिकन्द्राबाद और खुर्जा, भी इसके अन्तर्गत आती हैं।
क्या है नोएडा विधानसभा सीट की डेमोग्राफी ?
नोएडा विधानसभा पूरी तरह से शहरी और बाहरी मतदाताओं वाली विधानसभा है। यहां के गांवों में भी स्थानीय मतदाताओं की अपेक्षा बाहरी मतदाताओं का ही बोलबाला है। सेक्टरों और हाऊसिंग सोसायटियों पर इनका पूरी तरह से कब्जा है। हिन्डन नदी के डूब क्षेत्र में तथा कुछ अन्य स्थानों पर बसी कालोनियों में भी नोएडा विभिन्न उद्देश्यों से आई बाहरी लोगों का पूरी तरह से कब्जा है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि नोएडा में अब गांव केवल नाम के लिए ही बचे हैं। इनका पूरी तरह से नगरीकरण हो चुका है। किराए पर रहने वाले लोगों के कारण यहां की डेमोग्राफी पूरी शत प्रतिशत रूप से पूरी तरह से बदल चुकी है। यहीं कारण है यहां पर चुनावी राजनीति में जातीय समीकरण पूरी तरह से बेईमानी हो चुके हैं।
क्या है दादरी विधानसभा सीट की डेमोग्राफी ?
दादरी विधानसभा सीट के अन्तर्गत सम्पूर्ण ग्रेटर नोएडा वेस्ट, बहुत बड़ा हिस्सा ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के लालकुंआ से सटा हुआ ऐसा क्षेत्र है जहां पर बहुत बड़ी संख्या में बाहरी लोग रहते हैं। वहीं, दादरी नगर में भी वर्तमान में स्थानीय लोगों के बराबर ही बाहरी लोग निवास करते हैं। ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी क्षेत्र के गाजियाबाद के लालकुंआ की सीमा से सटे हुए गांवों में भी बहुत अधिक संख्या में किराए पर लोग रहते हैं। सेक्टरों, हाऊसिंग सोसायटियों और कॉलोनियों में बाहरी मतदाताओं का ही कब्जा है। यहां पर भी चुनावी राजनीति में जातीय समीकरण बेईमानी हो चुके हैं। हालांकि दादरी से एनटीपीसी और सिकन्द्राबाद की ओर के गांवों का स्वरूप अभी बाहरी लोगों के कारण अप्रभावित है अथवा मामूली तौर पर ही प्रभावित हो सका है। यहां पर ग्रामीण और शहरी तथा बाहरी मतदाताओं का अनुपात लगभग 15 : 85 है। ऐसे में इन गांवों में स्थानीय एवं ग्रामीण अभी चुनावी राजनीति पर पकड़ मजबूत है। दादरी विधानसभा के इन गांवों में चुनावी राजनीति में जाति को एक फेक्टर के तौर पर आंका जाता है।
क्या है जेवर विधानसभा सीट की डेमोग्राफी ?
जेवर विधानसभा सीट के अन्तर्गत ग्रेटर नोएडा वेस्ट का लगभग आधा हिस्सा आता है। यहां बड़ी संख्या में सेक्टरों और हाऊसिंग सोसायटियों में बाहरी लोगों का प्रभुत्व है। इसके अतिरिक्त यमुना प्राधिकरण द्वारा विकसित किए गए सेक्टरों में भी बड़ी संख्या में बाहरी लोग आकर बस रहे हैं। ग्रेटर नोएडा के गांवों में बड़ी संख्या में यहां के उद्योगों में काम करने वाले लोग रहते हैं। हालांकि जेवर विधानसभा के अन्तर्गत बड़ी संख्या में दनकौर, रबूपुरा जेवर और जहांगीरपुर के आसपास का क्षेत्र आता है। यह पूरी तरह से विशुद्ध तौर पर ग्रामीण क्षेत्र है। जेवर विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण तथा शहरी मतदाताओं और बाहरी मतदाताओं का अनुपात लगभग 25 : 75 है। यही कारण है कि जेवर विधानसभा सीट पर अभी भी मतदान में जाति एक मुख्य फेक्टर बनती रही है।
क्या है सिकन्द्रबाद विधानसभा सीट की डेमोग्राफी ?
सिकन्द्राबाद विधानसभा पूरी तरह से एक ग्रामीण बाहुल्य विधानसभा सीट है। हालांकि सिकन्द्राबाद कस्बा और गुलावठी कस्बे में शहरी आबादी रहती है। लेकिन इस आबादी पर भी बहुत अधिक ग्रामीण परिवेश का ही असर दिखता है। यहां पर ग्रामीण और शहरी आबादी का अनुपात लगभग 85 : 15 है। ऐसे में यहां पर भी जाति को चुनावी राजनीति का आंकलन करते समय अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
क्या है खुर्जा विधानसभा सीट की डेमोग्राफी ?
खुर्जा विधानसभा सीट भी ग्रामीण क्षेत्र बाहुल्य विधानसभा है। यहां पर खुर्जा एक नगरपालिका है जहां पर शहरी आबादी निवास करती है। खुर्जा की शहरी आबादी पर भी ग्रामीण परिवेश का असर दिखता है। यहां पर भी ग्रामीण और शहरी आबादी का अनुपात लगभग 15 : 85 ही है। इस विधानसभा पर भी जाति चुनावी राजनीति में बड़ा फेक्टर है।
भाजपा की हिन्दूत्ववादी रणनीति ने जाति के कार्ड को किया निष्क्रिय
साल 2009 में गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर हुए लोकसभा चुनाव में जाति का कार्ड काम करता दिखा। इसके बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हिन्दूत्व की रणनीति को धार दी। इसका असर यह हुआ कि गांवों में भी लोगों ने जाति में बंधकर मतदान कर ने के स्थान पर हिन्दू बनकर मतदान करने को प्राथतिकता दी। इसके बाद से चुनावी रणनीति में हिन्दूत्ववादी रणनीति का ट्रेंड लगातार बढ़ा है। हालांकि मोदी के चेहरे को भी शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी खूब पसंद किया जा रहा है।
गौतमबुद्ध नगर सीट पर मतदाताओं की स्थिति
विधानसभा पुरूष महिला अन्य कुल
नोएडा 437796 345064 12 782872
दादरी 397644 331773 64 729481
जेवर 200073 169742 09 369824
सिकंदराबाद 208906 190169 16 399091
खुर्जा 206376 187486 18 393880
योग 1450795 1224234 119 2575148
नोएडा और दादरी विधानसभाओं की बढ़त जीत में निभाती है निर्णायक भूमिका
ऊपर दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि नोएडा और दादरी विधानसभाओं में कुल विधानसभा के आधे से भी अधिक मतदाता हैं। इनमें भी लगभग 80 फीसदी शहरी और बाहरी मतदाता शामिल हैं। ऐसे में गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर नोएडा और दादरी विधानसभाओं की बढ़त जीत में निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसा कहना भी गलत नहीं होगा कि लोकसभा सीट पर वहीं जीत दर्ज करता है जिसको दादरी और नोएडा विधानसभाओं में जीत मिलती है।
शहरी और बाहरी मतदाताओं ने भाजपा में दिखाया है विश्वास ?
गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर हुए साल 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के परिणामों से पता चलता है कि शहरी एवं बाहरी मतदाताओं ने भाजपा में विश्वास जताया है। हालांकि 2009 के बाद हुए दोनों चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी भाजपा ने जबरदस्त सेंध लगाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत मानी जाने वाली बहुजन समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी अब अपने कोर वोटर माने जाने वाले ग्रामीण मतदाताओं में अपना आधार खोती हुई दिख रही हैं। दरअसल, शहरी एवं बाहरी मतदाताओं की प्राथमिकता स्थानीय एवं क्षेत्रीय पार्टियों अथवा किसी अन्य पार्टी की अपेक्षा राष्ट्रीय पार्टियों अर्थात कांग्रेस और भाजपा रहती है। कांग्रेस का गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर वजूद लगभग समाप्त हो चुका है। ऐसे में यहां के शहरी एवं बाहरी मतदाताओं के सामने भाजपा ही राजनीतिक दल के रूप में एक विकल्प बचती है। पिछले चुनाव परिणामों से यह भी पता चलता है कि शहरी एवं बाहरी मतदाता स्थानीय की अपेक्षा राष्ट्रीय मुद्दों को अधिक प्राथमिकता देते हैं। जानकारों का मानना है कि भाजपा के राम मंदिर, धारा 370 की समाप्ति, तीन तलाक, भारत का पांचवी अर्थव्यवस्था बनना और देश की विदेश नीति में आए बदलाव जैसे मुद्दें इनके बीच काफी असरदार माने जा रहेे हैं।
स्थानीय और शहरी तथा बाहरी मतदाताओं के मुद्ददों में भी है अन्तर :
शहरी और बाहरी मतदाताओं के मुद्दे : सुलभ शिक्षा एवं चिकित्सा, फ्लेट-बायर्स समस्या का समाधान, रजिस्ट्री, सार्वजनिक यातायात व्यवस्था, मेट्रो, ट्रेफिक, गंगाजल आपूर्ति, हाऊसिंग सोसायटियों में आने वाली समस्याओं के समाधान, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में खेल का मैदान, शमशान घाट, कच्ची कालोनियों में नाली और सड़कों का निर्माण ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेंअर्बन थाना और स्मार्ट पुलिसिंग।
ग्रामीण एवं स्थानीय मतदाताओं के मुद्दे : उचित मुआवजा, आबादी के मामलों का निस्तारण, किसान और किसानों की खेती स संबंधित समस्याएं, सड़के, रोजगार, आवारा पशु, गांवों में खेल के मैदान, स्कूलों में किसानो और स्थानीय लोगों के बच्चों का आसान प्रवेश, उद्योगों में स्थानीय युवकों के लिए रोजगार के अवसर, ग्राम पंचायत चुनावों की बहाली अथवा नगर निगमों का निर्माण और प्राधिकरणों के विकास कार्यों के विमार्श के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों की समिति का निर्माण।