मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ग्रेटर नोएडा दौरा और समाजवादी पार्टी की विरोध के नाम पर रस्म अदायगी

Panchayat 24 : योगी आदित्यनाथ ने गौतम बुद्ध नगर के साथ जुड़े राजनीतिजक मिथक को मिटा दिया है। वह मुख्यमंत्री बनने के बाद कई बार नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा आते रहे हैं। इससे पूर्व सभी मुख्यमंत्री कुर्सी जाने के डर से अपने शासनकाल में ग्रेटर नोएडा एवं नोएडा आने से बचते रहे थे। 25 सितमंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एण्ड मार्ट में यूपीआईटीएस 2024 के दूसरे संस्करण के उदघाटन समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे। निर्धारित कार्यक्रम में हिस्सा लिया और वापस लौट गए।
समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री के दौरे का विरोध करने का फैसला किया। बाकायदा पार्टी की जिला इकाई की ओर से एक प्रेस वार्ता करके इसकी पूर्व घोषणा भी कर दी। मुख्यमंत्री के ग्रेटर नोएडा पहुंचने से पूर्व पुलिस ने समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी एवं प्रवक्ता राजकुमार भाटी को सहित कई पार्टी नेताओं को पुलिस ने सुबह में ही हाऊस अरेस्ट कर लिया। समाजवादी पार्टी के नेताओं को मालूम था कि पूर्व में घोषणा करके वह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध नहीं कर सकेंगे। पुलिस उन्हें हाऊस अरेस्ट जरूर करेगी। फिर भी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज करानी थी, भले ही औपचारिक ही सही। यदि विपक्षी दल होने के नाते इतना भी नहीं कर सके तो फिर नेतागिरी का मतलब ही क्या है ? बुधवार सुबह एक ओर मुख्यमंत्री के ग्रेटर नोएडा आगमन की तैयारियां जोरशोर से चल रही थी। वहीं, दूसरी ओर गौतम बुद्ध नगर समाजवादी पार्टी के नेताओं की हाऊस अरेस्टिंग की राजनीतिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही थी।
हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से जिन मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री के दौरे के विरोध की बात कही गई थी उनमें से कई बातें बहुत गंभीर हैं। जिले में भूमि अधिग्रहण के बाद किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं हो सका है। इसके बावजूद किसानों की जमीनों का विकास के नाम पर अधिग्रहण किया जा रहा है। फ्लैट-बायर्स समस्या का आंशिक समाधान ही हो सका है। बड़े मुद्दे अभी तक खड़े हैं। पूरे प्रदेश में मैट्रो का जाल बिछाया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा और नोएडा में नए नए रूट बनाने की तैयारी हो रही है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट को सबसे अधिक मैट्रो की आवश्यकता है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीचों बीच स्थित यह शहर ट्रेफिक जाम की विकराल समस्या से ग्रस्त है। यहां के निवासियों को मैट्रो का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन यह इंतजार लगातार लंबा ही होता जा रहा है। सड़कों में बड़े बड़े गड्डे 1990 के दशक की जर्जर सड़कों की याद ताजा करा रहे हैं। प्राधिकरणों की मनमानी और भ्रष्टाचार लोगों को ग्राम पंचायत चुनावों की याद दिलाती है। वास्तव में गौतम बुद्ध नगर में ग्राम पंचायत चुनावों को समाप्त करके लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। चुनाव समाप्त होने पर स्थानीय प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है। वहीं, प्राधिकरणों में ग्रामीणों की बातों की सुनवाई की सच्चाई हवा हवाई अधिक, जमीनी हकीकत कम है।
चुनाव परिणाम बताते हैं कि गौतम बुद्ध नगर की जनता सरकार से शिकायत के बावजूद विपक्ष के साथ कतई नहीं खड़ी है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि प्रदेश सरकार ने अपराध को लेकर काफी काम किया है। यह कहना बईमानी ही होगी कि जिले में अपराध पूर्णत: समाप्त हो गया है। लेकिन अपराध की तीव्रता को जरूर कम किया है। जिले में संगठित अपराध की कमर टूटी है। जिले ने एक वह भी दौर देखा है जब भरी दोपहरी में दिनदहाड़े जिले में लूट की वारदातें होती थी। शाम होते ही हत्या और लूट की खबरें सामान्य थी। संगठित अपराधिक गिरोह की संख्या तेजी से बढ़ी थी। व्यापारी वर्ग अपराधियों के निशाने पर था। अवैध उगाही, रंगदारी और वसूली जिले में एक उद्योग बन गया था। व्यापारियों की हत्याएं की गई। जिले के परंपरागत कस्बों एवं शहरों से व्यापारी वर्ग दूसरे राज्यों और जिलों में पलायन कर गया था। यहां तक कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में निवेशक बिगड़ती कानूनी व्यवस्था के चलते हरियाणा, उत्तराखंड और गुजरात का रूख करने लगे थे। जिले को पुलिस कमिश्नरेट बनाए जाना और पश्चिम उत्तर प्रदेश में एसटीएफ की शाखा स्थापित होना इस बात का प्रमाण हैं कि एक दौर था जब गौतम बुद्ध नगर में अपराध बेलगाम था। संयोग से इस दौर का अधिकांश समय अखिलेश यादव के शासनकाल से ही जुड़ा है।