नए माफिया गठजोड़ की चर्चा कर प्रजातंत्र के तीन स्तंभों को आईना दिखा गए डीजीपी प्रशांत कुमार
DGP Prashant Kumar showed the mirror to the three pillars of democracy by talking about the new mafia alliance

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर में पिछले कई महीनों से कुछ ऐसा घट रहा है कि घटना चर्चा का विषय बन जाती है। बीते एक अप्रैल को भी कुछ ऐसा ही हुआ जब उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी प्रशांत कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान एक नए प्रकार के माफिया गठजोड़ का जिक्र करते हुए प्रजातंत्र के तीन स्तंभों को आईना दिखा दिया। विधायिका, कार्यपालिका और मीडिया के प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद थे। डीजीपी ने अपने लगभग 12 मिनट के भाषण में नए माफिया गठजोड़ का जिक्र करते हुए उत्तर प्रदेश की शो विंडो कहे जाने वाले गौतम बुद्ध नगर को विशेषरूप से इंगित किया। उनकी बातें राजनीति, सामाजिक, मीडिया और के गलियारों में चर्चा का केन्द्र बनी हुई हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार बीते 1 अप्रैल को नोएडा सेक्टर-108 स्थित पुलिस कमिश्नरेट में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। स्थानीय सांसद डॉ महेश शर्मा, दादरी विधायक तेजपाल सिंह नागर, जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह, नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ लोकेश एम और एनजी रवि कुमार, डीएम गौतम बुद्ध नगर मनीष कुमार वर्मा तथा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह सहित मीडिया के लोग भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में डीजीपी प्रशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश में पुलिस और पुलिसिंग के बदलते स्वरूप और वर्तमान चुनौतियों की चर्चा की गई। ड्रग्स को लेकर उन्होंने मिलकर लड़ाई लड़ने की बात कहते हुए गौतम बुद्ध नगर में पुलिस के प्रयासों को सराहा।
प्रशांत कुमार ने कहा, ”पुलिससिंग में हमेशा सुधार की गुंजाईश हमेशा बनी रहती है। आप सभी जानते हैं कि पूरा प्रदेश दस्यु-माफिया मुक्त हो चुका है। लेकिन एक नए प्रकार के माफिया आए हैं जो अच्छी पोजिशन पर रहते हुए गठजोड़ बनाते हैं। यह दुर्भाग्य की बात है कि जो प्रजातंत्र के मूल स्तंभ है, यह उनसे जुड़े हुए लोग हैं। यह एक नेक्स बनाकर पुलिस पर प्रेशर बनाते हैं। यह कई तरह से हो रहा है। यह हर महानगर में हो रहा है। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा है कि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।” उन्होंने आगे कहा कि यहां (गौतम बुद्ध नगर) तो कार्रवाई की भी गई है। अभी इसमें आगे ओर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पुलिस विभाग की अंदर की कमियों का जिक्र करते हुए पुलिस को भी आईना दिखाया। उन्होंने पुलिस को लिए आत्मावलोकन की जरूरत पर जोर दिया।
बता दें कि डीजीपी प्रशांत कुमार ने जिस समय यह बातें कहीं है, गौतम बुद्ध नगर में कुछ पत्रकारों पर अपराधिक गतिविधियों में शामिल होने तथा अपराधिक गिरोहों से साठगांठ रखकर अपराधिक गतिविधियों को संचालित करने के आरोप में पुलिस कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। कई पत्रकारों और उनसे जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों की माने तो मामले में अभी जांच चल रही है। मामले की शुरूआती जांच में पुलिस की ओर से इस नेक्सेस से सफेदपोशों के जुड़े होने की बातें भी सामने आई थी। ऐसे में डीजीपी के बयान ने जिले में हलचल मचा दी है। लोग डीजीपी के बयान को तरह तरह से परिभाषित कर रहे हैं।
डीजीपी के कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा भी हुआ जो जिले में पहले कभी नहीं हुआ था। डीजीपी के कार्यक्रम के लिए मीडिया को आमंत्रित किया गया। इसके लिए पत्रकारों का वर्गीकरण किया गया। यह काम कार्यक्रम से एक दिन पूर्व बहुत ही गोपनीय तरीके से किया गया था। हालांकि शाम होते होते खबर लीक हो गई। गलती सुधार के लिए कुछ अन्य पत्रकारों को सूची में शामिल किया गया। सुबह तक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पत्रकारों के वर्गीकरण की खबर चारों ओर फैल गई। आनन फानन में कार्यक्रम के आमंत्रण को अधिक से अधिक पत्रकारों तक प्रेषित करने की कोशिश की गई, लेकिन काफी देर हो चुकी थी। यह मानवीय भूल थी, पुलिस की चूक थी या पुलिस की किसी रणनीति का हिस्सा, लेकिन लोग सवाल पूछ रहे हैं कि डीजीपी साहब के कार्यक्रम में पुलिस कुछ छिपाना चाह रही थी। बहरहाल, इसका उत्तर तो पुलिस अधिकारी ही दे सकते हैं। फिर भी डीजीपी स्तर के अधिकारी के कार्यक्रम के आमंत्रण के लिए पत्रकारों के वर्गीकरण का यह कृत्य वाकई में समझ से परे है।