दादरी बाइपास : एनटीपीसी ने वापस मांगी जमीन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने तलाश लिया है विकल्प ?
Dadri Bypass: NTPC asked for the land back, has Greater Noida Authority found an alternative?

Panchayat 24 : दादरी क्षेत्र के लिए लाइफ लाइन कहा जाने वाले दादरी बाइपास से जुड़ी हुई एक बड़ी खबर आ रही है। बाइपास निर्माण के लिए दी गई जमीन को एनटीपीसी ने वापस मांग लिया है। इसके बाद बाइपास के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे थे। इस बीच ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने बाइपास को जारी रखने के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया है। प्राधिकरण को समस्या समाधान के लिए विकल्प भी मिल गया है। प्राधिकरण जल्द ही समस्या समाधान की दिशा में प्रयास शुरू कर देगा।
क्या है है पूरा मामला ?
दरअसल, दादरी क्षेत्र को नोएडा ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट से जोड़ने वाला एकमात्र दादरी-सूरजपुर-छलेरा (डीएससी) मार्ग ही रहा है। इस मार्ग पर ट्रेफिक के भारी दबाव और दिल्ली-हावड़ रेल मार्ग पर रेलवे फाटक के अधिकांश समय बंद रहने के कारण ट्रेफिक जाम की भारी समस्या बनी रहती है। इसके अतिरिक्त दादरी कंटेनर डिपो के लिए भी भारी भरकम कंटेनर शहर के बीचों बीच से रेलवे रोड़ से होकर गुजरते थे। इससे ट्रेफिक की समस्या और अधिक भीषण हो गई। चंद मिनटों की दूरी को पार करने में दो से तीन घंटे तक लगते थे। ऐसे यहां से होकर गुजरने वाले वाहन चालकों और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। जाम की समस्या से मुक्ति के लिए दादरी बाइपास की मांग उठी थी। कंटेनर डिपो और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के प्रयासों से दादरी बाइपास का निर्माण शुरू किया गया था। यह बाइपास कंटेनर डिपो के पास से शुरू होकर रूपबास गांव के पश्चिमी छोर से होता हुआ पुराने जीटी रोड़ से मिलना था। यह बाइपास मार्ग कुछ दूरी तक एनटीपीसी रेलवे लाइन के पास से होकर गुजरना था। लेकिन जीटी रोड़ के पास जमीन मालिकों ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन देने का विरोध किया। हालांकि प्राधिकरण की ओर से इस जमीन के मालिकों से समझौता करने का प्रयास किया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया। बाइपास निर्माण का काम रूपबास गांव के पास आकर लगभग दस सालों तक रूका रहा। बाद में साल 2018 में बाइपास निर्माण का कार्य एक बार फिर शुरू हुआ।
बाइपास निर्माण के लिए एनटीपीसी ने अस्थाई तौर पर दी जमीन
उत्तर प्रदेश में साल 2017 में विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार चुनी गई। दादरी से भाजपा प्रत्याशी तेजपाल सिंह नागर विजयी हुई। दादरी बाइपास निर्माण को पूरा कराना उनके चुनावी वायदों में से एक था। चूंकि जिस जमीन से होकर दादरी बाइपास को गुजरना था, उसका मामला हाईकोर्ट में लंबित था। ऐसे में बाइपास निर्माण आसान नहीं था। हालांकि एक बार हाईकोर्ट के जज ने भी दादरी पहुंचकर इस जमीन का मौका मुआयना किया लेकिन समाधान नहीं निकल सका। बाद में एनटीपीसी ने साल 2018 में रेलवे लाइन के साथ साथ जीटी रोड़ तक लगभग 1.1 किमी लंबी और 10 मीटर चौड़ी अस्थाई सड़क बनाने के लिए अपनी जमीन देने के लिए तैयार हो गया। विधायक तेजपाल सिंह नागर और सांसद डॉ महेश शर्मा के प्रयासों से यह संभाव हो सका था। बाइपास निर्माण के बाद दादरी क्षेत्र के लोगों को रेलवे रोड़ पर फाटक के कारण लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिली थी।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बाइपास को जीटी रोड़ से जोड़ने का विकल्प तलाशा
एनटीपीसी द्वारा अस्थाई तौर पर दादरी बाइपास के लिए दी गई अपनी जमीन को वापस मांग लिया है। यह खबर दादरी क्षेत्र के लोगों को चिंतित करने वाली है। वहीं, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण और विशेष तौर पर दादरी कंटेनर डिपों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है। हालांकि प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि एनटीपीसी को उनकी जमीन लौटाने से पूर्व रूपबास गांव के पास से दादरी बाइपास को सीधे पुराने जीटी रोड़ से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने इसका रास्ता खोज लिया है। जल्द 1.1 किमी की इस सड़क के निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। हालांकि इस संबंध में एनटीपीसी दादरी के सक्षम अधिकारी से संपर्क कर यह जानने का प्रयास किया गया लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
एनटीपीसी ने किन्हीं कारणों से दादरी बाइपास के निर्माण के लिए अस्थाई तौर पर दी गई अपनी जमीन को वापस लौटाने की मांग की है। एनटीपीसी को यह जमीन लौटाने से पूर्व रूपबास गांव के पास से 1.1 किमी लंबी सड़क निर्माण कर दादरी बाइपास को जीटी रोड़ से जोड़ा जाएगा।
——— ए के सिंह, महा प्रबंधक, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण