मुख्यमंत्री के आदेश, अधिकारियों के दावे और सिस्टम के प्रयासों को बारिश के पानी ने डूबोया, तस्वीरें कर रही हैं सच्चाई बयां
The Chief Minister's orders, the claims of the officials and the efforts of the system were drowned by the rain water, the pictures are telling the truth
Panchayat24 : बारिश का मौसम शुरू होने से पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार आदेश दे रहे थे कि समय रहते नालों की सफाई और जल निकासी की पूरी व्यवस्था कर ली जाए। नालों से सिल्ट निकाल ली जाए,जिससे नालों का पानी ओवफ्लो होकर रास्तों में जमा न हो।
अधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री के आदेशों और दिशानिर्देशों का उसी जोश से पालन करता हुआ दिखाई दिया। जगह जगह नालों की सफाई करते हुए कर्मचारी देखे गए। अधिकारी भी सोशल मीडिया पर अपनी निगरानी में यह सबकुछ करते हुए दिखने का प्रयास करते रहे। बारिश शुरू होने से पूर्व सिस्टम ने दावे कर दिए कि समय रहते नालों की सफाई और जल निकासी की पूरी व्यवस्था कर ली है।
लेकिन मौसम की पहली बारिश ने साबित कर दिया कि जिले में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के दावों को कितनी गंभीरता से लिया। नालों की सफाई और जल निकासी के लिए सिस्टम ने कितनी गंभीरतस से प्रयास किए। हालत यह हो गई है कि बारिश दर बारिश मुख्यमंत्री के आदेश, अधिकारियों के दावे और सिस्टम के प्रयासों को लोग बारिश के पानी में डूबता हुआ देख रहे हैं।
दो संस्थाओं के बीच अटका दादरी रेलवे रोड़ पर जल भराव का मामला
दादरी रोलवे रोड़ पर जल भराव की समस्या दादरी नगरपालिका और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बीच अटका हुआ है। वैसे तो दादरी रेलवे रोड़ दादरी नगर के बीचों बीच स्थित है, लेकिन नगरपालिका परिषद इसे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अन्तर्गत बताकर पल्ला झाड़ने का प्रयास करती है। वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण भी इसे अपने अधिसूचित क्षेत्र में नहीं होने की बात कहकर पीछा छुड़ा लेता है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी के कुछ स्थानों की जलभराव की तस्वीरें ।
दादरी निवासी मनोज गोयल का कहना है कि दादरी से होकर लाखों लोग प्रतिदिन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली के लिए गुजरते हैं। इस मार्ग पर ट्रेफिक का काफी दबाव है। मामूली सी बरसात में रेलवे फलाईओवरसे नीचे उतरने के साथ ही लोगों को एक तालाब से होकर गुजरना पड़ता है। यह तालाब बारिश के पानी से बन जाता है। कई बार बाइक सवार इसमें हादसे का शिकार हो जाते हैं।
वहीं नगरपालिका परिषद के सभासद सुमित बैसोया का कहना है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से इस स्थान पर बारिश का पानी भरने की समस्या आम हो गई है। लोगों को अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए पानी से होकर गुजरना ही पड़ता है।
सामाजिक संस्थान उड़ान के संस्थापक सदस्य शिवओम शर्मा का कहना है कि जल भराव से सबसे अधिक समस्या स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है। पानी कॉलोनियों के मार्गों तक भर जाता है। कई कॉलोनियों के रास्ते इससे बंद हो जाते है। लोग घरों में कैद होने के लिए मजबूर हैं।

इस संबंध में दादरी नगरपालिका अध्यक्ष गीता पंडित का कहना है कि फलाई ओवर को रेलवे विभाग ने बनाया है। जबकि सड़क से जोड़ने वाले फ्लाई ओवर को सेतू निगम द्वारा बनाया गया है। वहीं रेलवे रोड़ का निर्माण ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा बनाया गया है। यह प्राधिकरण के अन्तर्गत आता है। नगरपालिका ने नालो की सफाई तथा अन्य उपाय किए हैं जिससे नगर में जल भराव की समस्या उत्पन्न न हो। लेकिन जिस स्थान पर यह समस्या हर बान उत्पन्न हो जाती है। वह सेतू निगम और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अन्तर्गत आती है। इसके बावजूद नगरपालिका ने कई बार यहां पर लिंक टायल तथा अन्य उपाय किए हैं। लेकिन यह स्थाई उपाय नहीं है। सड़क को ऊंचा करके बनाने की जरूरत है। इसके इसे प्राधिकरण से बात की गई है। नगरपालिका के पास इसके लिए बजट का अभाव है।
वहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ अमनदीप सिंह का कहना है कि मामला अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है। किसी ने इस संबंध में शिकायत भी नहीं की है। वैसे प्राधिकण उन स्थानों के मार्गों के रखरखाव की जिम्मेवारी रखता है जो उनके अधिसूचित क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद वह विषय को देखेंगे। यदि यह उनके अधिकार क्षेत्र का मामला है तो शीघ्र समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ग्रेटर नोएडा के क्षेत्र में यदि कहीं पर भी जल भराव की समस्या है तो उसके समाधान के लिए कार्य किया जाएगा।

बारिश के बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कई स्थानों पर जल भराव की समस्या पैदा हो गई। फोटों में आप देख सकते हैं कि किस तरह से हाईराइज सोसायटी और सर्विस रोड़ पर पानी जमा हो गया है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ग्रेटर नोएडा वेस्ट के प्रति हमेशा सौतेला व्यवहार करता है।
इस संबंध में ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित सुपरटेक ईकोविलेज-वन के निवासी मनीष कुमार का कहना है कि ग्रेटर नोएडा वेस्सट में प्राधिकरण के समस्या समाधान के दावे बकवास और बोल बच्चन के डॉयलोग के अलावा कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास के लिए ग्रेटर नोएडा के लिए एक अतिरिक्त प्रभारी वाले सीइओ के स्थान पर स्थाई प्रभार वाले सीईओ की जरूरत बताई। उनका कहना है कि सीईओ साहब पदभार ग्रहण करने के इतने दिनों बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कम से कम निरीक्षण के नाम पर ही सही, एक चक्कर तो लगा लेते तो वास्तविकता उनके सामने आ जाती। मनीष कुमार कहते हैं कि सीईओ साहब के पास पहले से ही पांच जिलों का भार है। वह प्राधिकरण की समस्याओं का अतिरिक्त भार क्यों उठाएंगे।
वहीं ईरोस वन निवासी श्याम ठाकुर ने भी मनीष कुमार की बात का समर्थन किया है। उनका कहना है कि प्राधिकरण मीडिया में बड़े बड़े दावे करता है। उनका उद्देश्य केवल खबरों में बने रहना है। ग्राउंड पर शायद ही कोई काम दिखाई दे।
गौर सिटी दो के 12वें एवेंन्यू निवासी राकेश रंजन ने तंज कसते हुए कहा है कि इनको भी पता है कि जनता के बीच अविश्वास का भाव है।
मनीष कुमार की बात का ही कुछ समर्थन करते हुए गौर सिटी वन के 5वें एवेन्यु निवासी प्रीत भार्गव करते हुए नजर आते हैं। उनका कहना है कि जब तक प्राधिकरण में फुलटाईम सीईओ नहीं आएंगे, तब तक रेसिडेंटस का कोई भला नहीं होने वाला। वर्तमान सीईओ साहब पर मेरठ कमिश्नरी के अन्य कामों का भी दबाव रहता है।