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एक खबर ने दो राजनीतिक दलों में मचा दी खलबली, गौतम बुद्ध नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म, खबर का सम्‍पूर्ण विश्लेषण

A news created a stir in two political parties, discussions are hot in Gautam Buddha Nagar, complete analysis of the news

Panchayat 24 : हाल ही में मीडिया में एक समाचार प्रकाशित हुआ जिसके बाद गौतम बुद्ध नगर की दो राजनितिक दलों में हलचाल मच गई। राजनितिक चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया। कायसबाजी का दौर जारी है। हालांकि इस खबर में किसी नेता का नाम नहीं लिया गया है। केवल इशारों ही इशारों में जिले की राजनीति में बड़े बदलाव की और इशारा किया गया है। खबर में स्पष्ट तौर से भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी का जिक्र किया गया है। जिसके बाद दोनों ही राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के मन में खबर की वास्तविकता को जानने की जिज्ञासा है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष के बयान ने इस जिज्ञासा को और अधिक बढ़ा दिया है। अपनी इस खबर में Panchayat 24 मीडिया में प्रकाशित खबर का विश्‍लेषण प्रस्‍तुत किया है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों के बाद उत्‍तर प्रदेश में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही है। साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक बिसात बिछाई जाने लगी हैं। ऐसे में हाल ही में एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर ने गौतम बुद्ध नगर में राजनीतिक चर्चाओं के बाजार को गर्म कर दिया। दरअसल, खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने सपा में वापसी के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन इससे पहले ही सपा में सक्रिय कुछ नेताओं ने उनका एक वीडियो पार्टी हाईकमान को भेज दिया। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया जिसके कारण नेताजी का समाजवादी पार्टी में शामिल होने का सपना पूरा नहीं हो सका है। खबर में यहां तक दावा किया गया है कि नेताजी समाजवादी पार्टी में शामिल होकर साल 2027 में होने वाले चुनावों में दो विधानसभा सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी कर रहे थे। खबर के बाद समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में इस कद्दावर नेता का नाम जानने की इच्‍छा तेज हो गई है। वहीं, गौतम बुद्ध नगर में राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है।

कौन है भाजपा के कद्दावर नेता जो घर वापसी कर समाजवादी पार्टी में लौटना चाहते है ?

मीडिया में प्रकाशित इस खबर का विश्‍लेषण करने से पूर्व हमने गौतम बुद्ध नगर की राजनीति के जानकारों, समाजवादी पार्टी और भाजपा के सूत्रों से इस बारे में जानकारी की। इस बारे में पूरे विश्‍वास के साथ कोई भी कुछ कहने को तैयार नहीं था। लेकिन खबर की भाषाशैली को देखकर अनुमान अवश्‍य लगाया। इनमें समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले कई वरिष्‍ठ नेताओं के नाम सामने आए, लेकिन इनमें से दो नाम ऐसे थे जिनकी ओर यह खबर इशारा करती हुई प्रतीत हो रही है। बता दें कि साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव से पूर्व बड़ी संख्‍या में समजवादी पार्टी के नेताओं ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। इनमें यह दो नाम भी शामिल थे।

नरेन्‍द्र सिंह भाटी भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में वापसी करने वाले है ?

सूत्रों के अनुसार प्रकाशित खबर में समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले जिस नेता की ओर इशारा किया गया है संभवत: वह नाम बड़ा नाम नरेन्‍द्र सिंह भाटी का है। वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर सिकन्‍द्रबाद विधानसभा सीट से दो बार जनता दल और एक बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक रहे थे। वह पार्टी के टिकट पर दो बार लोकसभा का  चुनाव भी लड़े थे लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।

नरेन्‍द्र सिंह भाटी समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक संदस्‍यों में से एक रहे हैं। उन्‍हें मुलायम सिंह यादव का भरोसेमंद माना जाता था। वह न केवल समाजवादी पार्टी का पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश का बड़ा चेहरा रहे हैं, बल्कि राजनी‍ति में गुर्जर समाज के बड़े नेताओं में उनकी गिनती होती है। एक समय वह पार्टी का सबसे बड़ा एक मात्र गुर्जर चेहरा भी रहे थे। बाद में बदली हुई परिस्थितियों में पार्टी में अपनी उपेक्षा के चलते नरेन्‍द्र सिंह भाटी ने भाजपा ज्‍वाइन कर ली।

भाजपा ने उनके राजनीतिक कद और पार्टी के लिए उपयोगिता को देखतने हुए उन्‍हें विधान परिषद का सदस्‍य भी बना दिया। भाजपा को जिला बुलन्‍दशहर और गौतम बुद्ध नगर की कुल दस विधानसभा सीटों पर नरेन्‍द्र सिंह भाटी की उपस्थिति का लाभ मिला। विशेष तौर पर साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में मिहिर भोज प्रकरण के चलते गुर्जर बाहुल्‍य दादरी विधानसभा सीट पर गुर्जर मतदाता भाजपा के विरोध में थे।

समाजवादी पार्टी ने लगभग यह मान लिया था कि इस बार उनका प्रत्‍याशी दादरी विधानसभा सीट पर विजय पताका फहरा देगा, लेकिन भाजपा ने इस सीट पर प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की। गुर्जर मतदाताओं ने मिहिर भोज प्रकरण के बावजूद भाजपा उम्‍मीदवार के पक्ष में बंपर मतदान किया। इस जीत में नरेन्‍द्र सिंह भाटी की भूमिका बहुत अहम रही। विशेष तौर पर भाटी गौत्र के गुर्जर बाहुल्‍य गांवों में। इतना ही नहीं, लोकसभा चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्‍मीदवार डॉ महेश शर्मा की रिकार्ड जीत में भी उनकी भूमिका को पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं ने काफी सराहा है।

राजनीतिक जानकारों की माने तो इस सबके बावजूद नरेन्‍द्र सिंह भाटी उस शैली से राजनीतिक भूमिका का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं जिसके लिए वह समाजवादी पार्टी में जाने जाते थे। वहीं, निकट भविष्‍य में भाजपा में उनके लिए एमएलसी से अलग कोई अन्‍य संभावना दिखाई भी नहीं दे रही है। जिस तरह से लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रदर्शन किया है ऐसे में कई नेता भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी ज्‍वाइन कर सकते हैं। हो सकता है कि नरेन्‍द्र सिंह भाटी भी भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी ज्‍वाइन कर विधानसभा चुनाव लड़ने का विचार कर रहे हो ? यदि वह ऐसा करते हैं तो वह पार्टी से दादरी, सिकन्‍द्राबाद और जेवर विधानसभा से टिकट की मांग कर सकते हैं।

नरेन्‍द्र सिंह भाटी की सपा में शामिल होने की खबर से असहज है सपाई ?

राजनीतिक जानकारों और समाजवादी पार्टी सूत्रों के अनुसार नरेन्‍द्र सिंह भाटी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अपुष्‍ट खबरों के बाद पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी है। उनके अनुसार यदि नरेन्‍द्र सिंह भाटी की घर वापसी होती है तो उसका सबसे अधिक प्रभाव जिले में सपा के वरिष्‍ठ नेताओं पर ही होगा। पार्टी में उनका वर्चस्‍व समाप्‍त हो जाएगा। संभवत: नरेन्‍द्र सिंह भाटी पार्टी में अपनी पूर्व की स्थिति में आ जाए। वर्तमान में समाजवादी पार्टी के पास कोई बड़ा गुर्जर नेता भी नहीं है। ऐसे में पार्टी उन्‍हें बड़ी जिम्‍मेवारी सौंप सकती है। ऐसे में गौतम बुद्ध नगर सहित जिले के वरिष्‍ठ सपा नेता कतई नहीं चाहेंगे कि नरेन्‍द्र सिंह भाटी की पार्टी में वापसी हो। संभवत: ऐसे नेताओं ने ही नरेन्‍द्र सिंह भाटी की घर वापसी का विरोध किया हो।

भाजपा के नेता नहीं चाहते नरेन्‍द्र सिंह का पार्टी में कद बढ़े ?  

भाजपा में शामिल होने वाले नरेन्‍द्र सिंह भाटी पिछले एक दशक से चली आ रही भारतीय जनता पार्टी की गुटबाजी से नहीं बच सके हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी में सुरेन्‍द्र सिंह नागर की एंट्री के बाद वह तेजी से अखिलेश यादव के करीब आए थे। अखिलेश यादव ने सुरेन्‍द्र सिंह नागर को राज्‍यसभा सांसद और पार्टी का राष्‍ट्रीय महा‍सचिव बनाकर कद बढ़ा दिया। अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव के अधिकांश करीबियों से दूरी बना ली थी। इनमें नरेन्‍द्र सिंह भाटी का नाम भी शामिल था। एक समय प्रतीत होने लगा था कि वह नरेन्‍द्र सिंह भाटी की उपेक्षा करके सुरेन्‍द्र सिंह नागर को पार्टी में बड़ा गुर्जर चेहरे के तौर पर स्‍थापित करना चाहते हैं। लेकिन साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद सुरेन्‍द सिंह नागर ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्‍वाइन कर ली। भाजपा ने भी उन्‍हें राज्‍यसभा सांसद बनाया। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व नरेन्‍द्र सिंह भाटी भी समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्‍वाइन कर ली।

जिस समय नरेन्‍द्र सिंह भाटी ने समाजवादी पार्टी ज्‍वाइन की उस समय गौतम बुद्ध नगर में भाजपा की गुटबाजी नया आकार ले रही थी। इस गुटबाजी में सुरेन्‍द्र सिंह नागर डॉ महेश शर्मा और दादरी विधायक तेजपाल सिंह नागर के विरोधी गुट जेवर विधायक धीरेन्‍द्र सिंह के पक्ष में खड़े थे। गुर्जर समाज का सर्वमान्‍य नेता बनने की राजनीतिक प्रतिस्‍पर्धा के चलते नरेन्‍द्र सिंह भाटी सुरेन्‍द्र सिंह नागर के विरोध में डॉ महेश शर्मा गुट का हिस्‍सा बन गए।

हालांकि गौतम बुद्ध नगर की भाजपा की गुटबाजी में डॉ महेश शर्मा गुट इक्‍कीस साबित हुआ, लेकिन गुर्जर समाज का बड़ा भाजपा चेहरा सुरेन्‍द्र सिंह नागर साबित हुए। राजनीतिक जानकारों की माने तो नरेन्‍द्र सिंह भाटी अपने जीवन की लगभग अंतिम राजनीतिक पारी खेल रहे हैं। वह प्रदेश की सत्‍ताधारी पार्टी के विधान परिषद सदस्‍य भी हैं। ऐसे में उनके पास भाजपा छोड़कर दोबारा समाजवादी पार्टी में शामिल होना बहुत सहज नहीं होगा। ऐसे में वह भाजपा में ही अपनी भूमिका को बढ़ाना चाहेंगे। लेकिन यह भी सत्‍य है कि भाजपा के अंदर कुछ नेता, विशेष तौर पर गुर्जर समाज के लोग, नहीं चाहते हैं कि नरेन्‍द्र सिंह भाटी को पार्टी में कोई बड़ी जिम्‍मेवारी मिले अथवा उनका कद बड़ा हो ?

सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव में उत्‍तर प्रदेश में भाजपा की हार के बाद पार्टी निकट भविष्‍य में पार्टी भूमिका देने के लिए पार्टी नेताओं का सर्वे कर रही है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नरेन्‍द्र सिंह भाटी की भूमिका, विशेष तौर पर गुर्जर समाज में स्‍वीकार्यता, के आधार पर सर्वे में उनके नाम पर सकारात्‍मक बातें सामने आई है। ऐसे में पार्टी उन्‍हें बड़ी जिम्‍मेवारी दे सकती है। संभवत: ऐसे में विरोधी गुट अथवा गुर्जर समाज के पार्टी नेताओं द्वारा इस तरह की चर्चाओं को हवा दी गई है जिससे उनकी पार्टी में नकारात्‍मक छवि पेश हो, ऐसी चर्चाएं ही मीडिया में प्रकाशित खबर का आधार हैं।

मदन चौहान भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले हैं ?

राजनीतिक जानकार, समाजवादी पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों की माने तो एक ऐसा ही नाम मदन चौहान का भी है जो कई साल पूर्व समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपाा में आने के बाद पार्टी में उनकी उस तरह की उपस्थिति नहीं दिखाई दे रही है जिस प्रकार की समाजवादी पार्टी में होती थी। ऐसे में कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि मीडिया में प्रकाशित जिस खबर ने गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में हलचल मचाई हुई है, उसका इशारा मदन चौहान की ओर है।

मदन चौहान समाजवादी पार्टी का एक बड़ा नाम रहे हैं। पश्चिम उत्‍तर प्रदेश में वह समाजवादी पार्टी का क्षत्रिय समाज का बड़ा नाम हुआ करते थे। वह लगातार तीन बार गढ़मुक्‍तेश्‍वर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीता था। समाजवादी पार्टी की सरकार में वह मनोरंजन कर राज्‍यमंत्री भी रहे थे। इसके अतिरिक्‍त पार्टी ने उन्‍हें कई बड़ी जिम्‍मेवारियां भी सौंपी थी। साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्‍होंने समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर बहुजन समाज पार्टी के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू की। हालांकि इसमें उन्‍हें कामयाबी नहीं मिल। बहुजन समाज पार्टी के साथ उनका सफर लंबा नहीं चल सका और उन्‍होंने भाजपा से हाथ मिला लिया। फिलहाल वह भारतीय जनता पार्टी का हिस्‍सा हैं।

मीडिया में भाजपा के कद्दावर नेता द्वारा पार्टी छोड़कर सपा में शामिल होने की खबर के प्रकाशित होने के बाद जिन तरह से कयासों का दौर जारी है। उससे प्रतीत होता है कि मदन चौहान एक बार फिर समाजवादी पार्टी में शामिल सकते हैं। खबर में गौतम बुद्ध नगर जिले की दो सीटों पर दावेदारी पेश करने की जिस बात का जिक्र किया गया है, वह मदन चौहान के लिहाज से भी सटीक बैठता है। जानकार मानते है, यदि मदन चौहान भाजपा छोड़कर सपा से विधानसभा चुनाव 2027 में ताल ठोकते हैं तो वह नोएडा या फिर जेवर विधानसभा सीट से पार्टी के सामने दावेदारी पेश कर सकते हैं। हालांकि जानकार यह भी मानते हैं कि यदि ऐसा होता है तो मदन चौहान के लिए परिस्थितियां बहुत अनुकूल होने वाली नहीं है। ऐसी स्थित में संभवत: वह गढ़मुक्‍तेश्‍वर विधानसभा सीट से ही अपनी दावेदारी पेश करें।

वर्तमान में बदले हुए पूरे राजनीतिक परिदृश्‍य पर विचार करने के बाद एक बात तो तय है कि भले ही कोई नेता अंदरखाने भाजपा छोड़कर सपा में जाने की जुगत लगा रहा हो, लेकिन किसी भी नेता के लिए खुलकर पार्टी छोड़ने की घोषणा करना अभी बहुत आसान नहीं दिख रहा है। मीडिया में प्रकाशित खबर का पूरा विश्लेषण करने के बाद नरेन्‍द्र सिंह भाटी और मदन चौहान ऐसे बड़े चेहरों के रूप में सामने आए हैं जो सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। लेकिन उनकी भी वर्तमान परिस्‍थमित उन्‍हें भाजपा छोड़ने की अनुमति देती हुई दिखाई नहीं दे रही है। फिलहाल प्रकाशित खबर का सत्‍य भविष्‍य के गर्भ में ही छिपा हुआ है।

 

सपा छोड़कर भाजपा में जा चुके कई नेता सपा में लौटने का मन बना रहे हैं। ऐसे कई नेताओं ने संपर्क भी किया है। लेकिन राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि  जो लोग पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हुए हैं, पार्टी में उनकी वापसी के नाम की चर्चा से पूर्व उनसे स्‍वीकृति अनिवार्य है।

———————— सुधीर भाटी, जिलाध्‍यक्ष समाजवादी पार्टी, गौतम बुद्ध नगर

 

कुछ पत्रकारों ने मुझसे इस खबर पर सवाल पूछा था। लेकिन ऐसे किसी नेता का नाम मेरे सामने नहीं आया। मेरा मानना है चुनाव से पूर्व नेताओं का पार्टी छोड़कर दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होना अब सामान्‍य प्रक्रिया बन गई है। हालांकि मुझे कोई नेता ऐसा नहीं लगता है जो समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुआ हो और अब वह पुन: समाजवादी पार्टी में शामिल होना चाहता हो। सभी नेता जानते हैं कि पार्टी छोड़ने के बाद दोबारा पार्टी में वापस लौटने पर उनको पार्टी में वह तवज्‍जो नहीं मिलती।

———— सतेन्‍द्र सिंह सिसौदिया, क्षेत्रीय अध्‍यक्ष, भाजपा, पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश


 

मैं कभी भी सत्‍ता परिवर्तन से पार्टी के प्रति अपनी आस्‍था नहीं बदलता। मेरा राजनीतिक जीवन इस बात का गवाह है। समाजवादी पार्टी को छोड़ने का निर्णय मैंने काफी सोच विचार के बाद लिया था। इसके पीछे कई कारण रहे हैं। वर्तमान में मैं भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता हूं। पार्टी ने समय समय पर मुझे जो भी जिम्‍मेवारी दी है, मैं उनका पूरी तरह से निर्वहन कर रहा हूं। भाजपा छोड़कर किसी दूसरे दल में जाने का सवाल ही नहीं उठता है। कई बार कुछ खबरें मीडिया  में अचानक प्रकाशित होती हैं जो आश्‍चर्यचकित करती हैं।

———— नरेन्‍द्र सिंह भाटी, उत्‍तर प्रदेश विधान परिषद सदस्‍य, भाजपा

 

कयासों के आधार पर राजनीतिक निर्णय नहीं होते हैं। आगामी विधानसभा चुनाव  में अभी बहुत समय है। इस बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं है। वर्तमान में  मैं भारतीय जनता पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हूं। मैंने भाजपा छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल होने पर कोई विचार नहीं किया है। न ही मेरा ऐसा कोई इरादा है।

———————- मदन चौहान, पूर्व  विधायक एवं भाजपा नेता

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