मेट्रीमोनियल साइट पर झूठ और फरेब का धंधा जोरों पर, बेमेल रिश्ते परिवारों पर पड़ रहे भारी
The business of lies and fraud is in full swing on matrimonial sites, mismatched relationships are taking a toll on families

Panchayat 24 : समाज में मेट्रीमोनियल साइट्स पर रिश्ते तलाशने का ट्रेंड तेजी से चल रहा है। शुरूआती दौर में माता पिता और परिवार के लोग इन रिश्तों को स्वीकार करने के लिए आसानी से तैयार नहीं होते थे। इसको मजबूरी में किया गया समझौता कहे या फिर आवश्यकता, माता पिता भी अब मेट्रीमोनियल साइट्स पर अपने बच्चों के लिए रिश्ते तलाशने में कोई गुरेज नहीं करते हैं। काफी जांच पड़ताल के बावजूद बेमेल रिश्ते बन रहे हैं। यह परिवारों पर भारी पड़ रहे हैं। इन साइटों पर झूठ, फरेब और धोखाधड़ी का धंधा जोरो से चल रहा है। कई बार ऐसी भी खबरें सामने आई हैं कि महिलाओं से ठगी के साथ शोषण भी किया है। मेट्रीमोनियल साइट्स से मिलने वाले धोखे की पीड़ा वह परिवार ही समझ सकता है, जिसने इसको झेला है।
सेंट्रल नोएडा जोन में बिसरख पुलिस ने एक ऐसे ही व्यक्ति राहुल चतुर्वेदी को गिरफ्तार किया है। राहुल जीवन साथी डॉट कॉम और वेटर हॉफ साइट जैसी मेट्रोमोनियल साइट्स पर शादी का झांसा देकर लड़कियों से ठगी की वारदातों को अंजाम देता था। वह सोशल साइटों पर अपनी फर्जी प्राेफाइल डालकर लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसाता था। शादी का झांसा देकर उनसे ठगी करता था। उनके पैसो पर ऐश करता था। लड़की और कई बार लड़की का भरोसा जीतने के लिए वह उसके परिवार के लोगों से भी मिलता था। मतलब सिद्ध होने के बाद वह फोन बंद कर लेता था। फिर दूसरी प्रोफाइल से नई लड़की को फंसाता था। राहुल लगभग 35 साल की नौकरी पेशा महिलाओं को विशेषतार पर अपने जाल में फंसाता था। इसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि इस उम्र में जीवनसाथी की तलाश मुश्किल दौर में पहुंच जाती है, विशेषकर लड़कियों के लिए। पुलिस के अनुसार राहुल अभी तक लगभग 15 लड़कियों को अपना शिकार बनाकर उनसे दस लाख से अधिक की ठगी कर चुका है।
क्या मेट्रीमोनियल साइट रिश्तों की तलाश के लिए आवश्यक हो गई हैं ? मेट्रीमोनियल साइट पर उपलब्ध प्रोफाइल के आधार पर विचार, चरित्र और आचरण का पता चल सकता है ? मेट्रीमोनियल साइटों पर इस बात की संभावना अधिक होती है कि चाल, चरित्र और वैचारिक सामंजस्य झूठा हो ? ऐसा नहीं है कि सामाजिक स्तर पर होने वाली शादियों में झूठ, फरेब और धोखाधड़ी की गुंजाईश नहीं होती। या फिर यह शादियां टूटती नहीं है। लेकिन इसकी संभावना बहुत कम होती है। इन रिश्तों की परख सामाजिक स्तर पर मेट्रीमोनियल साइटों की अपेक्षा अधिक बेहतर होती है। मेट्रीमोनियल साइट्स से बनने वाले रिश्तों के विश्वास के लिए कोई आधार नहीं होता है। जबकि सामाजिक स्तर पर रीति रिवाजों से बनने वाले रिश्तों के पीछे नैतिक आधार मजबूत होता है। वहीं, इन रिश्तों में ठगी की संभावना न के बराबर होती है।
भले ही कामकाजी और अतिव्यस्त जीवनशैली वाले परिवारों में मेट्रीमोनियल साइटों पर रिश्ते तलाशने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह भी सत्य है कि इन रिश्तों में दरार भी उतनी ही तेजी से पड़ती है। फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए आने वाले मामलों की लगातार बढ़ती संख्या इस बात की पुष्टि करती है। इनमें मेट्रीमोनियल और प्रेम विवाह के मामलों की संख्या अधिक होती है। कुछ लोग मेट्रीमोनियल साइटों पर रिश्ते तलाशने के पीछे यह तर्क अवश्य देते हैं कि यहां युवक एवं युवती को जीवनसाथी चुनने के लिए विकल्प अधिक होते हैं। यदि ऐसा है तो यह बात भी सहीं है कि अधिक विकल्प होने के कारण भ्रमित होने की संभावना भी उतना ही बढ़ जाती है। मेट्रीमोनियल साइट्स ने रिश्तों की तलाश को एक बाजारोन्नमुख बना दिया है। बाजारवाद का मूल उद्देश्य लाभ और हानि पर विचार करना होता है, नैतिक अनैतिक पर नहीं।