किसान संगठन के नेता का बड़ा आरोप : किसान आन्दोलन की आड़ में निजी हित के लिए आन्दोलन से जुड़े है कुछ लोग, वीडियो वायरल
Big allegation by the leader of farmers organization: Under the guise of farmers movement, some people are associated with the movement for personal interest, video viral

Panchayat 24 : गौतम बुद्ध नगर में कई दशकों से बड़ी संख्या में किसानों के धरना प्रदर्शन और आन्दोलन चल रहे हें। कई बार किसान आन्दोलनकर्ताओं पर किसान आन्दोलनों की आड़ में निजी हितों को प्रोत्साहित करने के भी आरोप लगते रहे हैं। हालांकि न आरोपों को राजनीति से प्रेरित मान जाता रहा है। वर्तमान में जिले में चल रहे किसान आन्दोलन से जुड़े एक किसान संगठन के बड़े नेता ने किसान आन्दोलन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान नेता का कहना है कि कुछ किसान निजी हित के लिए किसान आन्दोलन से जुड़ गए हैं। किसान नेता का कहना है कि यह किसान अपने निजी हितों के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। इस संबंध में किसान नेता का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। पंचायत 24 ने किसान नेता से वायरल वीडियो के बारे में जानकारी करने के लिए फोन किया, लेकिन बात नहीं हो सकी।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, दादरी क्षेत्र में अंसल बिल्डर ने टाउनशिप बसाने के लिए कई साल पूर्व बील अकबरपुर, रामगढ़, भोगपुर एवं कैमराला आदि गांवों के किसानों की जमीन खरीदी थी। बाद में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर बिल्डर का विरोध किया। कई बार बिल्डर एवं किसानों के बीच टकराव की स्थिति आई। जिला प्रशासन को मध्यस्थता करनी पड़ी है। कुछ किसान बिल्डर के खिलाफ कोर्ट गए हैं। काफी किसानों ने बिल्डर को जमीन पर कब् जा नहीं दिया है। कुछ किसानों द्वारा जमीन पर खेती भी शुरू कर दी गई है। वहीं, मामले में सर्वोत्तम बिल्डर का भी नाम जुड़ गया है। बिल्डर द्वारा जमीन पर कब्ज लेने का प्रयास शुरू किया गया, जिसका किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है। हाल ही में दो पक्षों के बीच मारपीट एवं गोली बारी भी हुई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि शुक्रवार को किसानों के विरोध के बीच गिरफ्तार किसानों को छोड़ दिया गया।
किसान आन्दोलन से जुड़े कुछ किसान निजी हितों के लिए यह कुछ भी करने को तैयार
इस बीच भारतीय किसान यूनियन (बलराज गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलराज भाटी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में बलराज भाटी कह रहे हैं कि रामगढ़ गांव में असंल और सर्वोत्त बिल्डर के खिलाफ किसानों की मांगों को लेकर शुरू हुए आन्दोलन में उनकी अहम भूमिका थी। उन्होंने ही किसान आन्दोलन को शुरू किया था। इस दौरान हमने देखा कि कुछ किसान अपने निजी हित की पूर्ति के लिए किसान आन्दोलन से जुड़ गए हैं। वह अपना स्वार्थ साधने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। इसी कारण मुझे अपने संगठन भारतीय किसान यूनियन (बलराज गुट) को लेकर वापस हटना पड़ा।
खेत की जुताई कर रहे किसानों से आन्दोलन में शामिल किसानों ने की मारपीट
वीडियो में बलराज भाटभ् ने कहा कि हाल ही में एक सप्ताह पूर्व किसानों के बीच मारपीट एवं फायरिंग हुई। कैमराला गांव निवासी किसान अशोक, बिजेन्द्रऔर उसका भाई अंसल बिल्डर को बेची गई जमीन की जुताई एवं बुवाई कर रहे थे। कुछ किसान धरने से उठकर आए और लाठी, डंडों और हथियारों से लैस होकर आए और खेत की जुताई कर रहे किसानों पर हमला कर दिया। फायरिंग हुई। कई लोगों को चोट भी आई। पुलिस ने दोनों पक्ष के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।
कुछ किसान नेता हमलावर किसानों को बिल्डर के बाउंसर बताकर आग को हवा देना चाहते थे
वायरल वीडियो में बलराज भाटी ने कहा कि कुछ किसान नेता हमलावर किसानों को बिल्डर के बाउंसर बता रहे हैं। यह गलत है। दोनों ही पक्ष के लोग किसान थे। इतना ही नहीं ऐसे किसान नेता दूसरे किसान संगठनों को भी यही बता रहे थे कि किसानों पर बिल्डर के बाउंसरों ने हमला किया है। ऐसा करके कुछ किसान नेता मामले का राजनीतिकरण करना चाहते थे। उनका उद्देश्य यही था कि किसानों पर अत्याचारों की बात सुनकर दूसरे संगठन एकत्रित हो जाएं और आक्रोशित होकर बड़ा आन्दोलन खड़ा करें।
वायरल वीडियो में किसान नेता ने पुलिस कार्रवाई को सराहा है
वायरल वीडियो में किसान नेता बलराज भाटी ने दादरी पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है। बलराज भाटी ने कहा कि कुछ किसान कह रहे हैं कि वह जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। भारतीय किसान यूनियन (बलराज गुट) के भी घेराव में शामिल होने की बात कही है। बलराज भाटी ने स्पष्ट कहा कि मैं और मेरे संगठन ऐसे लोगों और किसानों से कोई संबंध नहीं रखते है। यह आपस का मामला था। समझौता कराना चाहिए था। बलराज भाटी ने दादरी कोतवाली प्रभारी का आगे बढ़कर बचाव किया और पुलिस पर लग रहे एकतरफा आरोपों को खारिज किया।
वायरल वीडियो में बलराज भाटी का इशारा संयुक्त किसान मोर्चा की ओर
वायरल वीडियो में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलराज भाटी का इशारा इस मामले में आन्दोलन पर बैठे संयुक्त किसान मोर्चा की ओर है। हमने इस बारे में संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि और किसान नेता सुनील फौजी से वायरल वीडियो के बारे में बातचीत की। सुनील फौजी ने वायरल वीडियो को हास्यपद एवं किसानों की लड़ाई को कमजोर करने वाला बताया। सुनील ने बलराज भाटी पर आरोप लगाया कि वह पुलिस और बिल्डर की पैरोकारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा पूरी पवित्रता से किसानों की लड़ाई लड़ रहा है। इस बारे में जिला प्रशासन और बुलन्दशहर विकास प्रधिकरण से वार्ता प्रस्तावित हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वार्ता न हो बिल्डर अथवा पुलिस को साइट पर नहीं जाना चाहिए। पूरे आन्दोलन में संयुक्त मोर्चा की नियत साफ एवं किसान हित में है।
वायरल वीडियो में बलराज भाटी स्क्रिप्ट पढ़ते हुए दिखे
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलराज भाटी भले ही के 6 मिनट 2 सेकेण्ड के वीडियो में अंसल-सर्वोत्तम बिल्डर के खिलाफ चल रहे किसान आन्दोलन में शामिल किसानों की नियत पर सवाल उठा रहे थे। वह पूरी वीडियो में खुद को पूरे प्रकरण से अलग और धरनारत किसानों को किसान हितों से निजी हितों के लिए समझौता करने वाला बता रहे हो, लेकिन वह पूरी वीडियो में एक पूर्व लिखित पटकथा को पढ़ते हुए दिखाई दिए। कई बार बोलते बोलते वह बीच बीच में अटक गए जिसका उन्होंने सुधार किया।
पुलिस और बिल्डर की पूरी तरह से बचाव
वायरल वीडियो में बलराज भाटी पूरे समय बिल्डर और पुलिस का बचाव करते हुए दिखाई दिए। उन्होंने वीडियो में कहा कि कुछ लोग दादरी पुलिस पर झूठे लांछन लगा रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि पुलिस ने एक तरफा कार्रवाई की है। ऐसा नहीं है। पुलिस ने हमला करने वाले और जिन पर हमला हुआ, दोनों पक्षों पर कार्रवाई की है। यह आपस का मामला था। जो लोग इसको बिल्डर से जोड़कर आन्दोलन कर रहे हैं। वह गलत कर रहे हैं। मामले में समझौता कराना चाहिए था।
Panchayat 24 का नजरिया
देश में किसान आन्दोलनों पर किसान हितों की आड़ में निजी हितों के लिए चंद लोगों द्वारा राजनीति करने का आरोप लगता रहा है। गौतम बुद्ध नगर में किसान आन्दोलनों का लंबा इतिहास रहा है। वर्तमान में भी कई स्थानों पर किसान आन्दोलन चल रहे हैं। किसान आन्दोलनों पर आरोप लगाने वाले लोग अधिकांशत: किसान आन्दोलनों का नेतृत्व करने वालों पर निशाना साधते हैं। आरोपियों का कहना होता है कि हर बार किसान आन्दोलन में वहीं किसान और किसानों की वही पुरानी समस्याएं शामिल होती है, लेकिन नेतृत्वकर्ता बदल जाते हैं। किसान आन्दोलन का नेतृत्व करने वालों पर आरोप लगते हैं कि किसान आन्दोलन के बाद उनकी दिशा और दशा तेजी से बदलती है। किसान आन्दोलनों का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ किसान आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता उठाते हैं। हालांकि ऐसे आरोपों का कोई आधार नहीं होता है। चूंंकि किसान आन्दोलन सत्ता पक्ष के खिलाफ होते हैं। ऐसे में इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि इन आरोपों के पीछे राजनीतिक द्वेष हो। लेकिन जिस तरह से भारतीय किसान यूनियन (बलराज गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलराज भाटी का वीडियो वायरल हुआ है, वह वाकई किसान आन्दोलनों की साख पार सवाल खड़ा करता है। इस प्रकरण में आरोप लगाने वाला और आरोपित, दोनों पक्ष किसान ही हैं। पूरे प्रकरण में पंचायत 24 किसी भी पक्ष की न तो पैरोकारी करता है, और न ही किसी भी पक्ष को क्लीन चिट देता है। पूरे प्रकरण में यह तय है कि एक पक्ष झूठ बोल रहा है। सवाल उठता है कि झूठ क्यों बोला जा रहा है ? यह कतई संभव नहीं है कि झूठ बोलने वाला पक्ष बिना स्वार्थ के ऐसा कर रहा है। यह प्रकरण समय समय पर किसान आन्दोलनों पर लगने वाले आरोपों पर लोगों को विचार करने के लिए मजबूर करता है। अंसल-सर्वोत्तम बिल्डर के खिलाफ चल रहा किसान आन्दोलन हो या फिर कोई अन्य किसान आन्दोलन हो, यदि किसान आन्दोलन में शामिल किसानों की इस प्रकार की भूमिका होगी तो यह किसान आन्दोलनों की विसवश्नीयता के लिए चिंता का विषय है।