गलत परंपराएं आसानी से पीछा नहीं छोड़ती, अच्छी परंपरा शुरू करने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाने का अभाव है
Wrong traditions are not easily abandoned, there is a lack of sincere effort to start good traditions

Panchayat 24 : क्या बुरी आदतों को छोड़ना और अच्छी आदतें सीखना वाकई बहुत मुश्किल है ? यह सवाल इस लिए उठता है कि इतिहास की आदतें ही आज की परम्पराएं बनी है। आज की आदतें आने वाले कल परम्पराओं का रूप लेंगी। दरअसल, बीते साल पूरे नवंबर महीने पुलिस ने यातायात माह का आयोजन किया । यातायात नियमों को लेकर लोगों को न केवल जागरूक किया बल्कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों पर पुलिस ने करवाई भी की। बी सेल्फिश स्लोगन भी दिया। फिर भी लोग मौका मिलते ही यातायात नियमों का उल्लंघन करने से बाज नहीं आए। यातायात नियमों के उल्लंघन के कारण भीषण हादसा भी हुआ। कई लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ी।
पुलिस एवं प्रशासन सडक सुरक्षा माह का आयोजन कर रहा है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने सड़क हादसों में जान गवाने वाले लोगों की बढ़ती संख्या पर काबू करने के उद्देश्य से क्रांतिकारी निर्णय लिया हैँ। उन्होंने नो हेलमेट, नो फ्यूल का आदेश जारी कर दिया है। अर्थात गौतम बुद्ध नगर जिले में कोई भी दुपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के अपने वाहन में पेट्रोल पम्प पर तेल नहीं डलवा सकेगा। यह निर्णय कितना कारगर साबित होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हालांकि सुरक्षा करणों से पूर्व में किसी भी व्यक्ति को पेट्रोल पम्प से बोतल मे तेल दिए जाने की सख्त मनाही थी। इस आदेश की क्या स्थिति है यह किसी से छुपा नहीं है ।
पुलिस विभाग हो या फिर समाज, गलत आदतों को जल्दी स्वीकार कर लेता है। यह गलत आदतें ही भविष्य में परम्परा का रूप ले लेती है। जबकि अच्छी आदतों को चलन मे लाने के लिए बार बार ईमानदारी से प्रयास करने की आवश्यकता होती हैं। यातायात नियमों का पालन करना नागरिकों के जीवन रक्षा के लिए आवश्यक है। लोगों को इनका पालन स्वत: ही करना चाहिए। फिर भी पुलिस और प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद लोग मौका पाते हीं सडक पर अपनी सुविधानुसार शॉर्ट कट अपनाते से बाज नहीं आ रहे हैं। पुलिस के बारे में भी यह बातें सटीक बैठती हैं।
दादरी से गाज़ियाबाद तक चलने वाली डग्गामार बसें एक बार फिर दादरी कोतवाली के सामने खड़ी होने लगी हैँ। इतना ही नहीं यहां से स्वारी भी बैठा रहीं हैं। बता दे कि कुछ साल पूर्व पुलिस ने बड़ी दिलेरी दिखाते हुए सडक पर अतिक्रमाण करने वाली इन डग्गामार बसों को इस लिए हटवाया था कि इनके कारण यात्रियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी होती थी। दरअसल, इन डग्गामार बसों की पूर्व में शिकायत करने पर पुलिस द्वारा यही बात कहीं जाती थी कि यह बसें पहले से ही यहाँ खड़ी होती चली आ रही हैं। इस गलत परम्परा को कई साल बाद पुलिस ने ही बंद कराया था। ऐसे में सवाल उठता है कि दादरी नगर को जाम और सड़क पर अतिक्रमण मुक्त बनाने का संकल्प लेने वाली दादरी पुलिस के सामने एक गलत परम्परा फिर से कैसे जन्म ले रही है ? क्या रोज कोतवाली के सामने सड़क पर खड़ी होने वाली डग्गामार बसें पुलिस को दिखाई नही दे रही हैं ? या पुलिस जान बूझकर देखना नहीं चाहती ?