ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

यूपीसीड़ा की नाक के नीचे हो रहा बड़ा खेल, औद्योगिक क्षेत्र के बीचों बीच बसा दी कॉलोनी, प्रशासन भी मौन !

A big game is happening right under the nose of UPSIDA, a colony was established in the middle of the industrial area, the administration is also silent!

Panchayat 24 : जिले में चारों तरफ भूमाफियााओं द्वारा कानून को ताक पर रखकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण और यूपीसीड़ा के अधिसूचित क्षेत्र और डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कॉलोनियां काटी जा रही है। प्राधिकरण और प्रशासन इन कॉलोनियों में समय रहते कार्रवाई करने में असमर्थ प्रतीत हो रहे हैं। परिणामस्‍वरूप भूमाफियाओं और कॉलोनाइजरों द्वारा झूठे वायदे करके  आम आदमी की गाढी कमाई को लूटा जा रहा है। ऐसा ही एक मामला यूपीसीडा की औद्योगिक साइट सी के अन्‍तर्गत प्रकाश में आया है। यहां लगभग 100 बीघा जमीन पर भूमाफिया, कॉलोनाइजर और डवेलपर यूपीसीडा की नाक के नीचे फ्री होल्‍ड आवासीय गतिविधियां चला रहे हैं। बड़े पैमाने पर यहां प्‍लॉट काटे जा रहे हैं। छोटे छोटे टुकड़ों में डवेलपरों को यह जमीन बेची जा चुकी है। अब यहां अलग अलग कैटेगरी के फ्लैट भी तेजी से तैयार किए जा रहे हैं। आश्‍चर्य की बात यह है कि इस अवैध निर्माण पर यूपीसीडा के आला अधिकारियों की दृष्टि अभी तक नहीं पड़ी है। वहीं, जिला प्रशासन भी इस मामले को लेकर अभी तक उदासीन ही दिखाई दे रहा है।

क्‍या है पूरा मामला ?

दरअसल, ग्रेटर नोएडा वेस्‍ट को ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाले 130 मीटर रोड़ से कुछ दूरी पर गुलिस्‍तानपुर-दादरी और सूरजपुर मार्ग पर यूपीसीडा की साइट सी स्थित है। यहां औद्योगिक क्षेत्र में लगभग एक सौ बीघा जमीन का औद्योगिक इकाई लगाने के लिए अधिग्रहण किया गया था। बाद में इस जमीन के अधिग्रहण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जानकारी के अनुसार जमीन के अधिग्रहण को हाईकोर्ट से रद्द कर दिया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। यहां पर भी यूपीसीडा को निराशा ही हाथ लगी।

तेजी से बढ़ती जमीन की कीमतों के चलते इस जमीन पर भूमाफियाओं, कॉलोनाइजरों और डवेलपरों की नजर टिक गई। वर्तमान में इस जमीन को ऊंची कीमतों पर कॉलोनाइजरों और डवेलपरों को अलग अलग टुकडों में बेच दिया गया है। यहां पर बड़े पैमाने पर प्‍लॉटिंग हो चुकी है। कुछ ही समय में यहां मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। बड़े पैमाने पर फ्लैट के निर्माण का काम चल रहा है। कमर्शियल गतिविधियों के लिए भी यहां पर निर्माण कार्य चल रहा है। डवेलपर और कॉलोनाइजर द्वारा बाकायदा यहां पर साइट ऑफिस खेलकर घर खरीदारों को आकर्षित किया जा रहा है। सेल्‍स ऑफिस की ओर से प्‍लॉट और फ्लैट बेचने के लिए पम्‍पलेट के माध्‍यम से साइट का प्रचार एवं प्रसार किया जा रहा है। जगह जगह बड़े बड़े होर्डिंग, बोर्ड और बैनर लगाए जा रहे हैं। लेकिन यूपीसीडा और जिला प्रशासन अभी तक पूरे प्रकरण पर मौन है।

Panchayat 24 की टीम ने इस निर्माण साइट का मौका मुआयना किया। इस दौरान एक डवेलपर साइट पर कुछ कर्मचारियों से इस बारे में भी बातचीत की। बातचीत के दौरान हमने साइट स्‍टॉफ से निर्माण साइट के ले आउट प्‍लान, सीवर, एसटीपी  प्‍लांट और कई जानकारियों के बारे में जानने का प्रयास किया। हालंकि साइट स्‍टॉफ इस बारे में कोई विश्‍वसनीय जानकारी नहीं दे सका। स्‍टॉफ की ओर से बार बार यह जरूर कहा गया कि इस जमीन पर सभी नियमों एवं कानूनों का पालन करते हुए निर्माण कार्य किया जा रहा है।

अधिग्रहण रद्द होने के बाद यहां आवासीय निर्माण किया जा सकता है ? खड़े हैं कई सवाल 

यूपीसीडा की औद्योगिक साइट सी के बीचों बीच जिस जमीन पर बसाई जा रही फ्री कॉलोनी बसाई जा रही है, उसका अधिग्रहण रद्द हुआ है। सवाल उठता है कि क्‍या अधिग्रहण रद्द होने के बाद यहां औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिसूचित क्षेत्र के बीचों बीच आवासीय गतिविधियां की जा सकती है ? क्‍या यह जमीन आबादी क्षेत्र में दर्ज है ? क्‍या न्‍यायालय से अधिग्रहण रद्द होना आवासीय गतिविधि संचालित करने का आधार है ? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्‍या इस क्षेत्र में फ्री होल्‍ड आवासयीय गतिविधि संचालित करने के लिए यूपीसीडा अथवा जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई है ? यदि यहां पर फ्री होल्‍ड आवासीय गतिविधियां शुरू हो गई। यहां बनने वाले फ्लैटों और प्‍लाटों में लोग आकर रहने लगे तो उनके लिए बुनियादी सुविधाएं कौन मुहैया कराएगा ? ग्रेटर नोएडा, यूपीसीडा या फिर जिला पंचायत विभाग यहां के लोगों के लिए जल निकासी, सीवन लाइन या फिर पीने के पानी की व्‍यवस्‍था और विद्य़त आपूर्ति कराएंगे ? व्‍यवहारिक तौर पर इसकी संभावना कतई नहीं है। ऐसे में इस फ्री होल्‍ड आवासीय परियोजना का भविष्‍य क्‍या होगा ? कुछ इसी प्रकार की समस्‍याओं का दंश जिले की अधिकांश फ्री होल्‍ड आवासीय, रिहायसी कॉलोनियां झेल रही है।

यूपीसीड़ा की सड़कों से कॉलोनी की सड़कोंं को लिंक किया गया है 

यूपीसीडा के औद्योगिक साइट के बीचों बीच बसाई जा रही इस कॉलोनी की सड़कों को यूपीसीडा की सड़कों से लिं‍क कर दिया गया है। दरअसल, यूपीसीड़ा की सड़कों को औद्योगिक गतिविधियों के प्रयोग के लिए बनाया गया है। यदि इन सड़कों को आवासीय एवं रिहायसी गतिविधियां के लिए प्रयोग किया जाएगा तो यहां लोगों और वाहनों की भीड़ बढ़ेगी। परिणामस्‍वरूप यहां भविष्‍य में जाम की समस्‍या भी पैदा होगी और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।

इस संबंध में यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल शर्मा से Panchayat 24  ने बातचीत की। उन्‍होंने कहा कि इस बारे में उन्‍हें जानकारी मिली है। इस जमीन का अधिग्रहण रद्द हो चुका है। इसके बावजूद इस जमीन पर आवासीय एवं रिहायसी गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती हैं। इस बारे में यूपीसीडा से किसी ने कोई अनुमति नहीं ली है। कुछ लोगों ने उन्‍हें जिला पंचायत का एक शासनादेश दिखाकर इस निर्माण के वैध होने की बात कही थी। मामले में विधिक  विशेषज्ञों से सलाह के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यूपीसीडा की सड़कों से इस फ्री होल्‍ड़ आवासीय एवं रिहायसी निर्माण तथा कॉलोनी की सड़कों को लिंक किया गया है। इसके लिए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया जाएगा।

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