जेवर विधानसभा

किसान महापंचायत : हम जेवर एयरपोर्ट का विरोध नहीं करते, किसानों से किए वायदे पूरे करें सरकारें : राकेश टिकैत

Kisan Mahapanchayat: We do not oppose Jewar Airport, governments should fulfill the promises made to farmers : Rakesh Tikait

Panchayat24.com : जेवर में आयोजित हुई किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता राकेश टिकैत ने हिस्‍सा लिया। किसानों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने प्रदेश और केन्‍द्र सरकार से कहा कि विकास में किसानों को हिस्‍सेदार बनाया जाए। किसान जेवर में बन रहे एयरपोर्ट का विरोध नहीं कर रहे हैं। वह प्रदेश और केन्‍द्र सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण से पूर्व उनसे किए गए वायदों को पूरा करें। सरकारों से सहमति के बाद किसानों ने अपनी जमीन का अधिग्रहण स्‍वीकार किया है लेकिन अभी भी किसान अपनी मांगों को लेकर सरकारों के दरवाजों पर चक्‍कर काट रहे हैं।

राकेश टिकैत ने स्‍थानीय किसानों की समस्‍याओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित शहरों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर किसानों के गांवों को जाने वाले रास्‍तों को नष्‍ट किया जा रहा है। यह समस्‍या उस समय और जटिल हो जाती है जब सरकारें किसानों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्‍ध नहीं कराते हैं।

किसानों की केन्‍द्र सरकार से मांग है। किसानों की प्रदेश सरकार से मांग है और किसानों की एनजीटी से भी मांग है। राकेश टिकैत ने कहा कि किसान महापंचात को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है कि राकेश टिकैत जेवर एयरपोर्ट में व्‍यवधान पैदा करने आ रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट किसानों की सहमति के बिना बन पाना संभव नहीं था। किसान जेवर एयरपोर्ट को रोकना नहीं चाहता। बस उनके रास्‍ते लोटा दो और समझौतों का ईमानदारी से पालन किया जाए।

उन्‍होंने कहा किसान सरकाराें से अपनी समस्‍याओं को लेकर बातचीत करना चाहते हैं। चर्चा से ही समाधान निकलता है। उन्‍होंने तीन कृषि कानूनों के विरोध में 13 महीने तक चले आन्‍दोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इतना लम्‍बा आन्‍दोलन किसानों ने चलाया इसके बाद सरकार ने किसानों की समस्‍याओं को समझा और तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया। उन्‍होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारों को जनता की बातों को सुनना होता है। यदि सरकार अहंकारी हो जाती है तो जनता को आन्‍दोलन का रास्‍ता अपनाना पड़ता है। पिछले कुछ महीनों से सरकार समस्‍याओं पर चर्चा के स्‍थान पर नकारात्‍मक विचार अपना रही है। उन्‍होंने सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि समस्‍या का समाधान चर्चा से होगा या आन्‍दोलन के बाद, यह सरकारें तय करें।

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