ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

शाहबेरी बना नासूर फिर भी बसाई जा रही हैं कई शाहबेरी, प्राधिकरण और शासन की उदासीनता आम आदमी पर भारी

Shahberi has become a problem, yet many Shahberis are being settled, the indifference of the authorities and the government is taking a toll on the common man

Panchayat 24 : दादरी बाइपास के आसपास ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की अधिसूचित जमीन पर तेजी से हो रहा अवैध निर्माण भविष्‍य का शाहबेरी साबित होगा। यहां बसाई जा रही कॉलोनी में लोगों को सुन्‍दर सपने दिखाकर सपनों का घर खरीदने के लिए कॉलोनाइजर प्रोत्‍साहित कर रहे हैं। कॉलोनाइजर इस जमीन को प्राधिकरण द्वारा स्‍वीकृत बताकर अपने लाभ के लिए झूठ बोलकर भोले भाले लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। लगभग सात किमी लंबे दादरी बाइपास पर कई कॉलोनियां काटी जा रही है।

दिल्‍ली एनसीआर इंडस्ट्रियल पार्क भी एक ऐसी ही कॉलोनी है जिसको कॉलोनाइजरों द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकस प्राधिकरण की अधिसूचित जमीन पर बसाया जा रहा है। यहां लोगों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ेगा। सार्वजनिक निर्माण एवं जल निकासी ऐसी अवैध कॉलोनियों में बड़ी समस्‍या बनती है। पहले तो इस तरह की कॉलोनी का बिना प्राधिकरण की स्‍वीकृति के कोई कानूनी अस्तित्‍व नहीं है। यदि प्राधिकरण की उदासीनता से ऐसी कॉलोनी बस भी जाती हैं तो यह कहना मुश्किल होगा कि कब तक बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी ? उस समय इन कॉलोनियों में बसने वाले लोगों को अपनी गलितयों का एहसास होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी ? बिल्‍डर अथवा कॉलोनाइजर मुनाफा कमाकर जा चुका होगा ?

दरअसल, ग्रेटर नोएडा वेस्‍ट में अवैध निर्माण का सबसे बड़ा केन्‍द्र बन चुके शाहबेरी में आज लोग भारी समस्‍याएं झेल रहे हैं। अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण ट्रेफिक जाम, जल निकासी और कई अन्‍य मूलभूत समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है। जल भराव शाहबेरी में बड़ी समस्‍या बन चुकी है। यहां बरसात को छोड़ दीजिए, दैनिक उपयोग के जल की निकासी की कोई उचित व्‍यवस्‍था नहीं है। दादरी विधायक तेजपाल सिंह नागर ने हाल ही में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से मुलाकात की है। उन्‍होंने जनहित एवं विकास से जुड़े कई मुद्दों पर मुख्‍यमंत्री से चर्चा की है। इनमें शाहबेरी में जल जमाव की समस्‍या भी शामिल है। तेजपाल सिंह नागर ने मुख्‍यमंत्री से शाहबेरी में होने वाले जल जमाव के स्‍थाई समाधान का अनुरोध किया है।

शाहबेरी एक अवैध निर्माण से सुसज्जित क्षेत्र है। यह वही शाहबेरी है जहां दो इमारतें जमीनदोज होने से नौ लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद अवैध निर्माण करने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की बात शासन और सरकार की ओर से कही गई थी। समय बीतने के बाद परिणाम शून्‍य है। शाहबेरी में इस घटना के बाद कई गुना अवैध निर्माण हो चुका है। इतना ही नहीं जिले में कई शाहबेरी बनकर तैयार हो चुके हैं या फिर बनने की तैयारी में हैं। भविष्‍य में इन शाहबेरियों (अवैध कॉलोनियों) की पैरवी में फिर कोई विधायक खड़ा होगा। फिर किसी सरकार पर शाहबेरी रूपी अवैध निर्माण के शहर में आधी अधूरी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का दबाव होगा। कारण स्‍पट है, यहां बसने वाला बड़ा वोटबैंक।

दरअसल, शाहबेरी में अवैध निर्माण के लिए सबसे बड़ा दोषी ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की उदासीनता रही है। जिस समय शाहबेरी तथा आसपास के क्षेत्र में अवैध निर्माण का गोरखधंधा फल फूल रहा था, प्राधिकरण आंखें बंद किए हुए था। प्राधिकरण में फैले भ्रष्‍टाचार ने अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बाधी दी थी। परिणामस्‍वरूप अधिकारियों ने प्राधिकरण के हितों को दरकिनार करके निजी हितों के लिए काम किया। शाहबेरी की समस्‍या प्राधिकरण, प्रशासन और शासन के लिए नासूर बन चुकी है।  इसके बावजूद प्राधिकरण शाहबेरी में पूर्व में हुई गलतियों से सबक लेने को तैयार नहीं है। जगह जगह अधिसूचित क्षेत्र में तेजी से अवैध निर्माण करके बसाए जा रहे कई शाहबेरी जैसी कॉलोनिों के प्रति आंखें बंद करके पूर्व में की गई गलतियों को प्राधिकरण दोहरा रहा है।

सवाल उठता है क्‍या वोटबैंक के दबाव में सरकारें अवैध निर्माण पर मौन होकर सबकुछ चुपचाप देखती रहेंगी ? क्‍या इसके दुष्‍परिणामों से प्राधिकरण और सरकार अनजान हैं ? इस मौन के कारण बिल्‍डर और कॉलोनाइजर दोनों हाथों से सरकार और आम आदमी को लूटते रहेंगे ?  सवाल यह भी उठता है क्‍या गौतम बुद्ध नगर में अवैध शाहबेरी बसने का यह सिलसिला ऐसे ही लगातार आगे बढ़ता रहेगा ? अभी जिले में कितने शाहबेरी और बनेंगे ? क्‍या प्रा‍धिकरण जैसा चल रहा है वैसा चलने दो की नी‍ति पर काम कर रहा है ? आला अधिकारी अपनी जिम्‍मेवारी से बचकर भविष्‍य में आने वाले अधिकारी के लिए इस समस्‍या को छोड़ रहे हैं ? यदि ऐसा है तो यह समस्‍या तेजी से बढ़ेगी।

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