न्यू नोएडा में अधिसूचित जमीन पर निर्माण को लेकर नोएडा प्राधिकरण हुआ सजग, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की उदासीनता से कॉलोनाइजरों की चांदी
Colonizers are benefiting from the indifference of Greater Noida Authority towards construction on notified land

Panchayat 24 : न्यू नोएडा के भविष्य को लेकर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण सजग दिखाई दे रहा है। उसने नोएडा में अधिसूचित जमीनों पर होने वाले निर्माण एवं कब्जे को रोकने के लिए अधिसूचित क्षेत्र का एरियल और सेटेलाइट सर्वे लगातार किया जा रहा है। वहीं, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ग्रेटर नोएडा फेस-2 में अधिसूचित जमीनों पर हो रहे निर्माण को लेकर लगातार उदासीन बना हुआ है। प्राधिकरण की उदासीनता के कारण क्षेत्र में कॉलोनाइजरों और भूमाफियाओं की चांदी हो रही है। बड़े पैमाने पर ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी परियोजना ग्रेटर नोएडा फेज-2 के लिए अधिसूचित जमीनों को किसानों से खरीदकर कॉलोनियां बसाई जा रही है।
क्या है पूरा मामला ?
गौतम बुद्ध नगर में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण लगातार अधिसूचित क्षेत्र में होने वाले निर्माण को लेकर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकण न्यू नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकण ग्रेटर नोएडा फेज-2 के नाम से नए औद्योगिक शहर बसाने की तैयारी कर रहे हैं। न्यू नोएडा और ग्रेटर नोएएडा फेस-2 को धरातल पर उतारने के लिए नोएडा प्राधिकरण, शासन और सरकार पूरी तैयारी कर चुकी है। चार चरणों में बसने वाला यह शहर गौतम बुद्ध नगर और बुलन्दशहर जिलों के 80 गांवों पर बसाया जाएगा। जबकि ग्रेटर नोएडा फेज-2 गौतम बुद्ध नगर, हापुड़ और बुलन्दशहर के 144 गांवों की जमीन पर बसाया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण ने इतिहास से सबक लेते हुए न्यू नोएडा को बसाने से पूर्व पूरी तरह से अधिसूचित क्षेत्र को संरक्षित करने की तैयारी कर ली है। प्राधिकरण की टीम लगातार क्षेत्र का सर्वे कर रही है। एरियल एवं सैटेलाइट सर्वे किए जा रहे हैं। वहीं, ग्रेटर नोएडा फेज-2 के लिए अधिसूचित जमीनों पर लगातार कॉलोनियां काटी जा रही हैं।
इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहा है अधिसूचित क्षेत्र में निर्माण
वैसे तो ग्रेटर नोएडा फेस-2 के लिए अधिसूचित लगभग हर गांव में कॉलोनाइजर अधिसूचित जमीनों पर कॉलोनियां बसा रहे हैं। लेकिन दादरी एवं उसके आसपास का क्षेत्र कॉलोनाइजरों और भूमाफियाओं के विशेष तौर पर निशाने पर है। वर्तमान में दादरी बाइपास की महत्वपूर्ण लोकेशन के कारण कॉलोनाइजर और भूमाफिया किसानों से प्राधिकरण की अधिसूचित जमीनें खरीद रहे हैं। लगभग सात किमी लंबे दादरी बाइपास पर दर्जन भर कॉलोनाइजर कॉलोनी बसा रहे हैं। इनमें दिल्ली एनसीआर इंडस्ट्रियल पार्क के नाम से चिटेहरा गांव की जमीन पर कॉलोनी बसाई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलोनाइजर ने किसानों से खरीदी गई जमीन के साथ ग्राम समाज की जमीन को भी कब्जे में ले लिया है। वहीं, सिंचाई विभाग एवं चकरोड़ मार्ग को भी कब्जा कर लिया है।
कॉलोनाइजर ने प्राधिकराण की जमीन पर भी कर दी प्लॉटिंग
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा ग्रेटर नोएडा फेज-2 के लिए किसानों से सीधी जमीन की सीधी खरीद भी की है। प्राधिकरण ने चिटेहरा गांव में बड़े पैमाने पर किसानों से सीधे जमीन का क्रय किया हे। ग्रामीणों का आरोप है कि चिटेहरा गांव की जमीन पर दादरी बाइपास के पास बसाई जा रही दिल्ली एनसीआर इंडस्ट्रियल पार्क कॉलोनी के लिए कॉलोनाइजर ने प्राधिकरण द्वारा किसानों से खरीदी गई जमीन को भी कब्जे में ले लिया है।
देर से होगी प्राधिकरण की कार्रवाई तो फंस जाएंगे प्लॉट खरीददार
ग्रेटर नोएडा फेज-2 परियोजना के लिए ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की अधिसूचित जमीनों पर बसाई जा रही कॉलोनी प्राधिकरण और इन कॉलोनियों में अपने घर का सपना देखकर प्लॉट खरीदने वाले लोगों के लिए भविष्य में परेशानी का सबब बनेंगी। कॉलोनाइजर मुनाफा कमाकर भाग जाएगा। वहीं, परियोजना को पूरा करने के लिए प्राधिकरण को अधिसूचित क्षेत्र में हो रहे निर्माण पर कार्रवाई करनी होगी। ऐसे में प्राधिकरण और प्लाॅट खरीददार आमने सामने होंगे। प्लाॅट खरीददारों को भारी नुकसान उठाता पड़ सकता है। कुछ ऐसा ही नजारा ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यमुना प्राधिकरण में बसाई जा रही कॉलोनियों में देखने में आ रहा है। यहां प्लॉट खरीददार अपने जीवन भर की कमाई लगाकर अज्ञानता के चलते अथवा कॉलोनाइजरों के बहकावें में आकर प्लॉट खरीद लेते है। बाद में प्राधिकरण कार्रवाई कर इन जमीनों को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई करते हैं।